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Chandigarh News: चेतन जवड़ा ने कथक में दिखाई जयपुर घराने की झलक
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प्राचीन कला केंद्र की 324वीं मासिक बैठक में सजी शास्त्रीय नृत्य की महफिल
चंडीगढ़। सेक्टर-35 स्थित प्राचीन कला केंद्र के एमएल कौसर सभागार में रविवार को केंद्र की 324वीं मासिक बैठक में चेतन कुमार जवड़ा ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने जयपुर घराने की शास्त्रीय नृत्य परंपरा को लयकारी, सशक्त पद-संचालन, चक्करों और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया।
प्रस्तुति की शुरुआत भगवान शिव की स्तुति हे अमरनाथ, हे विश्वनाथ से हुई। इसके बाद राग बसंत पर आधारित नौ मात्राओं वाली ताल बसंत में कथक की बारीकियां प्रदर्शित कीं। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण उनके दादागुरु पंडित कन्हैयालाल जवड़ा की रचित एवं स्वरबद्ध ठुमरी रही। समापन द्रुत तीनताल में तेज तत्कार, जटिल परन, तिहाइयों और चक्करों के साथ हुआ।
संगत में सांवरमल कथक ने गायन एवं हारमोनियम, भवदीप जवड़ा ने पखावज एवं पढ़ंत, मुजफ्फर रहमान ने तबले और उत्कर्ष सोनी ने बांसुरी पर साथ दिया। बरेली से पहुंची प्रो. संध्या रानी ने प्राचीन कला केंद्र के सेमिनार से संबंधित जर्नल का विमोचन किया। इस दौरान कलाकारों को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर, सचिव सजल कौसर और दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय के उप-रजिस्ट्रार (शैक्षणिक) डॉ. देवेंद्र वर्मा भी उपस्थित रहे। पांचवीं पीढ़ी के कथक कलाकार चेतन कुमार जवड़ा प्रसिद्ध कथक गुरु पंडित राजकुमार जवड़ा के पुत्र एवं शिष्य और दिवंगत पंडित कन्हैयालाल जवड़ा के पौत्र-शिष्य हैं। वे 250 वर्षों से अधिक पुरानी पारिवारिक सांगीतिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। वर्तमान में जयपुर कथक केंद्र में नृत्य गुरु के रूप में कार्यरत हैं।
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चंडीगढ़। सेक्टर-35 स्थित प्राचीन कला केंद्र के एमएल कौसर सभागार में रविवार को केंद्र की 324वीं मासिक बैठक में चेतन कुमार जवड़ा ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने जयपुर घराने की शास्त्रीय नृत्य परंपरा को लयकारी, सशक्त पद-संचालन, चक्करों और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया।
प्रस्तुति की शुरुआत भगवान शिव की स्तुति हे अमरनाथ, हे विश्वनाथ से हुई। इसके बाद राग बसंत पर आधारित नौ मात्राओं वाली ताल बसंत में कथक की बारीकियां प्रदर्शित कीं। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण उनके दादागुरु पंडित कन्हैयालाल जवड़ा की रचित एवं स्वरबद्ध ठुमरी रही। समापन द्रुत तीनताल में तेज तत्कार, जटिल परन, तिहाइयों और चक्करों के साथ हुआ।
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संगत में सांवरमल कथक ने गायन एवं हारमोनियम, भवदीप जवड़ा ने पखावज एवं पढ़ंत, मुजफ्फर रहमान ने तबले और उत्कर्ष सोनी ने बांसुरी पर साथ दिया। बरेली से पहुंची प्रो. संध्या रानी ने प्राचीन कला केंद्र के सेमिनार से संबंधित जर्नल का विमोचन किया। इस दौरान कलाकारों को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर, सचिव सजल कौसर और दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय के उप-रजिस्ट्रार (शैक्षणिक) डॉ. देवेंद्र वर्मा भी उपस्थित रहे। पांचवीं पीढ़ी के कथक कलाकार चेतन कुमार जवड़ा प्रसिद्ध कथक गुरु पंडित राजकुमार जवड़ा के पुत्र एवं शिष्य और दिवंगत पंडित कन्हैयालाल जवड़ा के पौत्र-शिष्य हैं। वे 250 वर्षों से अधिक पुरानी पारिवारिक सांगीतिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। वर्तमान में जयपुर कथक केंद्र में नृत्य गुरु के रूप में कार्यरत हैं।
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