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PGI डायरेक्टर के बेटी-दामाद की नियुक्ति पर सवाल

Sun, 29 Mar 2015 12:48 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 29 Mar 2015 12:48 PM IST
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objection on appointment of chandigarh pgi director daughter and son-in-law

पीजीआई में पिछले साल एडहॉक पर रखे असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति पर सवाल खड़े हो गए हैं। इनमें से दो पदों पर पीजीआई के डायरेक्टर वाईके चावला की बेटी और दामाद की नियुक्ति की गई है।

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नियुक्तियों में भ्रष्टाचार का संदेह जताते हुए प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और चीफ विजिलेंस अफसर को शिकायत भेजी गई है। शिकायत में संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर चेतन पीएस राव पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए सवाल किया गया है कि जब संस्थान के लोग ही कमेटी में शामिल होंगे तो वह अपने बॉस के रिश्तेदारों को कैसे फेल कर सकते हैं।
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पीजीआई के 1967 एक्ट के रूल नंबर सात के मुताबिक संस्थान के डायरेक्टर के पास एडहॉक प्रोफेसर की नियुक्ति की पावर है। अपने संबंधियों के नाम के आवेदन आने पर उन्होंने तत्कालीन पीजीआई डीन को स्क्रूटनी कमेटी, सेलेक्शन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त कर दिया, ताकि भाई-भतीजावाद का आरोप न लगे।
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शिकायतकर्ता को सलेक्‍शन में बेइमानी का संदेह

objection on appointment of chandigarh pgi director daughter and son-in-law

शिकायतकर्ता सुभाष चंदर का कहना है कि पिछले साल मार्च में पीजीआई ने एडहॉक प्रोफेसरों की सात पोस्ट निकाली थी। इनमें कार्डियोलाजी व आप्थलमोलॉजी डिपार्टमेंट की दो-दो पोस्ट थी। लोकल सलेक्शन कमेटी ने कार्डियोलॉजी के लिए दस कैंडिडेट फाइनल इंटरव्यू के लिए सलेक्ट किए। इंटरव्यू के दौरान छह कैंडिडेंट चुने गए।

इनमें से डॉ. अंकुर गुप्ता और डॉ. पराग को चुना गया। बताया जा रहा है कि डॉ. अंकुर गुप्ता डायरेक्टर के दामाद हैं। इसी तरह से आप्थलमोलॉजी डिपार्टमेंट में फाइनल इंटरव्यू के लिए 11 कैंडिडेट चुने गए। इंटरव्यू में आठ डाक्टरों का सलेक्शन हुआ, लेकिन नियुक्ति डॉ. दीक्षा कटोच व डॉ. पारुल चावला गुप्ता की हुई।

डॉ. पारुल चावला डायरेक्टर पीजीआई की बेटी हैं। शिकायकर्ता के मुताबिक नियुक्तियों में ईमानदारी नहीं बरती गई है। जब संस्थान के लोग कमेटी में शामिल होंगे तो वह बॉस के रिश्तेदारों को कैसे फेल कर सकते हैं। जब डायरेक्टर की बेटी ने आवेदन किया था तो उन्हें सलेक्शन कमेटी के लिए संस्थान के बाहर सदस्यों को बुलाना चाहिए था, ताकि बेइमानी की गुंजाइश न रहे।

हमें नियुक्तियों पर संदेह है। डिप्टी डायरेक्टर पर जिम्मेदारी थी कि वे एडहॉक प्रोफेसरों की नियुक्ति में पूरी पारदार्शिता बरतते। साथ उन्हें डायरेक्टर को गाइड करना था। यह एक तरीके से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की प्रैक्टिस है। यदि आला अधिकारी ऐसा करेंगे तो नीचे के अधिकारी तो भ्रष्टाचार में पूरी तरह से लिप्त हो जाएंगे।
-सुभाष चंदर, चेयरमैन, एंटी करप्शन फ्रंट पीजीआई

अभी शिकायत मेरे पास नहीं पहुंची है। शिकायत मिलने पर जरूरी कदम उठाएंगे।
-प्रो. सुरजीत सिंह, चीफ विजिलेंस अफसर, पीजीआई

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