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अब घर के पास मिलेगा इलाज, आवासीय इलाकों में खुलेंगे नर्सिंग होम
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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने आवासीय इलाकों में नर्सिंग होम खोलने की तैयारी कर ली है। इसके लिए नर्सिंग होम नीति तैयार की गई है, जिसका प्रारूप जारी कर दिया गया है। साथ ही शहरवासियों से 30 दिन के भीतर इस पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। सुझाव लिखित में वित्त सचिव के दफ्तर में जमा कराने होंगे। सांसद किरण खेर ने नर्सिंग होम को शुरू करने की मंजूरी देने की मांग की थी, जिसका पहले विरोध किया गया था, लेकिन अब जाकर प्रशासन ने इसके लिए नीति तैयार कर ली है।
नर्सिंग होम नीति के प्रारूप के अनुसार, आवासीय इमारतों में मुख्य प्रशासक की लिखित मंजूरी के बाद ही नर्सिंग होम खोलने की मंजूरी मिलेगी। इमारत में केमिस्ट शॉप खोलने की इजाजत नहीं होगी। एक सेक्टर में अधिकतम चार नर्सिंग होम की अनुमति दी जाएगी, जबकि शहर की बात करें तो शुरुआत में मौजूदा को छोड़कर अधिकतम 30 नर्सिंग होम की अनुमति दी जाएगी। ये इजाजत उस भवन के लिए ही दी जाएगी, जिसका क्षेत्रफल 500 स्क्वायर यार्ड के बराबर होगा और जो सेक्टर में वी4, वी5, वी6 सड़क के नजदीक बनी होगी। भवन मालिक या फिर उसके परिवार से कोई डॉक्टर होना चाहिए और तय कन्वर्जन चार्जेज के भुगतान पर ही इसकी इजाजत मिलेगी। मौजूदा नर्सिंग होम का अगर कोई क्षेत्रफल बढ़वाना चाहता है तो वह साथ वाले प्लॉट को भी मिला सकता है, लेकिन दोनों प्लॉट का मालिक एक ही होना चाहिए।
बता दें कि वर्ष 1999 में आवासीय इलाकों में निजी नर्सिंग होम की अनुमति दी गई थी, लेकिन वर्ष 2005 में इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। स्थानीय सांसद किरण खेर ने भी यूटी प्रशासक के समक्ष इस मामले को उठाया था और नर्सिंग होम खोलने की अनुमति देने की मांग की थी।
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पार्किंग की होनी चाहिए सुविधा, तभी मिलेगी इजाजत
जिस भवन में नर्सिंग होम की इजाजत ली जानी है, उसमें मौजूद बेड की संख्या के मुताबिक पार्किंग की सुविधा भी जरूरी होगी। बिना बेड वाले नर्सिंग होम को कम से कम पांच वाहनों के पार्किंग की जगह रखनी होगी। भवन के बाहर पार्किंग के लिए 200 मीटर के क्षेत्रफल की जगह जरूरी होगी। प्रशासन व नगर निगम इन नर्सिंग होम से पार्किंग की फीस ले सकेंगे। नर्सिंग होम के लिए फिजिबिलिटी कमेटी की सलाह पर मुख्य प्रशासक द्वारा जांच की जाएगी। इस कमेटी में असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर, सीनियर टाऊन प्लानिंग व प्रशासन और नगर निगम से एग्जीक्यूटिव इंजीनियर शामिल होंगे, जो लोग एमडी, एमएस, एमडीएस, बीएएमएस में ग्रेजुएट होंगे, वही इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। इस योग्यता की जांच स्वास्थ्य निदेशक की तरफ से की जाएगी। एस्टेट ऑफिस व मुख्य प्रशासक की तरफ से अधिकृत कोई भी अधिकारी परिसर की जांच कर सकेगा और यह देखेगा कि मिली इजाजत को लेकर सभी नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
सरकारी अस्पतालों का घटेगा बोझ, मरीजों को भी मिलेगी राहत
सेक्टरों में निजी नर्सिंग होम खुलने से शहरवासियों को काफी फायदा मिलेगा। ग्लोबल हेल्थ केयर के निदेशक डा. संजीव भाटिया का कहना है कि इससे लोगों को प्राथमिक और द्वितीय स्तर के इलाज के लिए ज्यादा भटकना नहीं पड़ेगा। आमतौर पर लोग छोटी सर्जरी के लिए शहर के सरकारी अस्पतालों में ही जाते हैं, जहां पर पहले से ही लंबी वेटिंग होती है। कई बार चक्कर काटने और टेस्ट में जो पैसे खर्च होते हैं, उससे थोड़ी ज्यादा राशि में नर्सिंग होम में अच्छे से इलाज मिल सकता है। साथ ही मानसिक तनाव से भी छुटकारा मिल सकेगा। फाइव स्टार के अस्पतालों के मुकाबले नर्सिंग होम में इलाज कराना सस्ता होगा। आजकल तो हर किसी के पास हेल्थ बीमा की सुविधा है। ऐसे में लोगों को दिक्कत नहीं आएगी। इसका एक फायदा यह भी होगा कि शहर के सरकारी अस्पतालों से मरीजों का बोझ कम होगा। शहर में नर्सिंग होम की मांग काफी दिनों से हो रही थी। पूर्व प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने इसके लिए काफी मेहनत की और उन्हीं के बदौलत यह सुविधा शहरवासियों को मिलेगी।
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नर्सिंग होम नीति के प्रारूप के अनुसार, आवासीय इमारतों में मुख्य प्रशासक की लिखित मंजूरी के बाद ही नर्सिंग होम खोलने की मंजूरी मिलेगी। इमारत में केमिस्ट शॉप खोलने की इजाजत नहीं होगी। एक सेक्टर में अधिकतम चार नर्सिंग होम की अनुमति दी जाएगी, जबकि शहर की बात करें तो शुरुआत में मौजूदा को छोड़कर अधिकतम 30 नर्सिंग होम की अनुमति दी जाएगी। ये इजाजत उस भवन के लिए ही दी जाएगी, जिसका क्षेत्रफल 500 स्क्वायर यार्ड के बराबर होगा और जो सेक्टर में वी4, वी5, वी6 सड़क के नजदीक बनी होगी। भवन मालिक या फिर उसके परिवार से कोई डॉक्टर होना चाहिए और तय कन्वर्जन चार्जेज के भुगतान पर ही इसकी इजाजत मिलेगी। मौजूदा नर्सिंग होम का अगर कोई क्षेत्रफल बढ़वाना चाहता है तो वह साथ वाले प्लॉट को भी मिला सकता है, लेकिन दोनों प्लॉट का मालिक एक ही होना चाहिए।
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बता दें कि वर्ष 1999 में आवासीय इलाकों में निजी नर्सिंग होम की अनुमति दी गई थी, लेकिन वर्ष 2005 में इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। स्थानीय सांसद किरण खेर ने भी यूटी प्रशासक के समक्ष इस मामले को उठाया था और नर्सिंग होम खोलने की अनुमति देने की मांग की थी।
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पार्किंग की होनी चाहिए सुविधा, तभी मिलेगी इजाजत
जिस भवन में नर्सिंग होम की इजाजत ली जानी है, उसमें मौजूद बेड की संख्या के मुताबिक पार्किंग की सुविधा भी जरूरी होगी। बिना बेड वाले नर्सिंग होम को कम से कम पांच वाहनों के पार्किंग की जगह रखनी होगी। भवन के बाहर पार्किंग के लिए 200 मीटर के क्षेत्रफल की जगह जरूरी होगी। प्रशासन व नगर निगम इन नर्सिंग होम से पार्किंग की फीस ले सकेंगे। नर्सिंग होम के लिए फिजिबिलिटी कमेटी की सलाह पर मुख्य प्रशासक द्वारा जांच की जाएगी। इस कमेटी में असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर, सीनियर टाऊन प्लानिंग व प्रशासन और नगर निगम से एग्जीक्यूटिव इंजीनियर शामिल होंगे, जो लोग एमडी, एमएस, एमडीएस, बीएएमएस में ग्रेजुएट होंगे, वही इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। इस योग्यता की जांच स्वास्थ्य निदेशक की तरफ से की जाएगी। एस्टेट ऑफिस व मुख्य प्रशासक की तरफ से अधिकृत कोई भी अधिकारी परिसर की जांच कर सकेगा और यह देखेगा कि मिली इजाजत को लेकर सभी नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
सरकारी अस्पतालों का घटेगा बोझ, मरीजों को भी मिलेगी राहत
सेक्टरों में निजी नर्सिंग होम खुलने से शहरवासियों को काफी फायदा मिलेगा। ग्लोबल हेल्थ केयर के निदेशक डा. संजीव भाटिया का कहना है कि इससे लोगों को प्राथमिक और द्वितीय स्तर के इलाज के लिए ज्यादा भटकना नहीं पड़ेगा। आमतौर पर लोग छोटी सर्जरी के लिए शहर के सरकारी अस्पतालों में ही जाते हैं, जहां पर पहले से ही लंबी वेटिंग होती है। कई बार चक्कर काटने और टेस्ट में जो पैसे खर्च होते हैं, उससे थोड़ी ज्यादा राशि में नर्सिंग होम में अच्छे से इलाज मिल सकता है। साथ ही मानसिक तनाव से भी छुटकारा मिल सकेगा। फाइव स्टार के अस्पतालों के मुकाबले नर्सिंग होम में इलाज कराना सस्ता होगा। आजकल तो हर किसी के पास हेल्थ बीमा की सुविधा है। ऐसे में लोगों को दिक्कत नहीं आएगी। इसका एक फायदा यह भी होगा कि शहर के सरकारी अस्पतालों से मरीजों का बोझ कम होगा। शहर में नर्सिंग होम की मांग काफी दिनों से हो रही थी। पूर्व प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने इसके लिए काफी मेहनत की और उन्हीं के बदौलत यह सुविधा शहरवासियों को मिलेगी।