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सिटी ब्यूटीफुल में गोबर से बनेगी बिजली, प्लांट लगाने का प्रस्ताव पास

Sun, 30 Apr 2017 09:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 30 Apr 2017 09:56 AM IST
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Now the power will be made from cow's dung, chandigarh news
electricity - फोटो : Amar Ujala
अब शहर में गाय के गोबर से बिजली भी बनेगी। नगर निगम ने बिजली बनाने वाले बायो गैस प्लांट लगाने का प्रस्ताव पास कर दिया है, जिसकी लागत 4 करोड़ रुपये है। इस प्लांट में प्रतिदिन 10 मीट्रिक टन गोबर को प्रोसेस किया जा सकता है। अभी तक शहर में गोबर लोगों और नगर निगम के लिए सिरदर्दी बना हुआ है क्योंकि कई बार गोबर से सीवरेज जाम हो चुका है। 
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मेयर आशा जसवाल के सुझाव पर यह प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया है। यह प्लांट गौशाला के आसपास ही लगेगा। शहर में तीन गौशालाएं हैं, जो कि सेक्टर-45, गांव मलोया और सेक्टर-25 में हैं। यह तीनों ही गौशालाएं एनजीओ और धार्मिक संगठनों की ओर से चलाई जा रही हैं। यह गौशालाएं भी गोबर के निपटारे की मांग नगर निगम से कर चुकी हैं। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 में दो कैटल पाउंड भी हैं, जिसमें 750 पशु हैं। सभी गौशालाएं और कैटल पाउंड मिलाकर कुल ढ़ाई हजार पशु इनमें हैं। ऐसे में 2500 कैटल से प्रतिदिन 15 हजार(15 मीट्रिक टन) गोबर निकलता है।
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नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार ई टेंडर प्रक्रिया की ओर से प्लांट लगाने के लिए बिड मंगवाई जाएगी। प्लांट लगाने के लिए जमीन नगर निगम की ओर से ही कंपनी को उपलब्ध करवाई जाएगी। प्लांट को चलाने, रखरखाव, इकट्ठा करना और ट्रासपोर्ट का काम कंपनी ही 5 साल तक संभालेगी। मेयर आशा जसवाल का कहना है कि प्लांट लगने से जहां गोबर की दिक्कत दूर हो जाएगी वहीं बिजली पैदा होगी। साथ ही कमाई भी बढ़ेगी।
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 धमकी दी फिर आया एजेंडा

Now the power will be made from cow's dung, chandigarh news
चंडीगढ़ की मेयर आशा जसवाल - फोटो : File Photo
सिरदर्दी बना हुआ है गोबर 
इस समय धनास की मिल्क कालोनी और मलोया की ग्वाला में गोबर सिरदर्दी बना हुआ है। जगह-जगह गोबर गिरा रहता है, जिस कारण रिहायशी इलाकों में दुर्गंध आती है और मक्खियां और मच्छरों ने रेजिडेंट्स को परेशान किया हुआ है।

 धमकी दी फिर आया एजेंडा
मेयर बनने के बाद ही आशा जसवाल ने बायोगैस प्लांट लगाने का प्रस्ताव अधिकारियों को बनाने के लिए कहा था लेकिन अधिकारी यह प्रस्ताव लेकर नहीं आ रहे थे। 28 अप्रैल को होने वाली सदन की बैठक से पहले भी उक्त एजेंडा नहीं बनना था जिस पर मेयर ने अधिकारियों को धमकी भी दी कि अगर यह एजेंडा नहीं आया तो दूसरे प्रस्ताव भी पास होने के लिए वह सदन में भेजने की मंजूरी नहीं देगी।
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