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Chandigarh News: सरस्वती नदी के इतिहास को अब पाठ्यक्रम में पढ़ सकेंगे विद्यार्थी
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एनसीईआरटी की किताबों में शामिल हुई सरस्वती नदी की गाथा
द बिगनिंग ऑफ इंडियन सिविलाइजेशन भारतीय सभ्यता का एक चैप्टर पढ़ाया जाएगा छठी कक्षा की किताब में
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्राचीन ऋग्वेद ग्रंथ के बाद अब देश की प्राचीनतम नदियों के शामिल सरस्वती नदी की गाथा एनसीईआरटी की किताबों में पढ़ाई जाएगी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सरस्वती नदी के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल किया है। एनसीईआरटी ने छठी कक्षा में सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में सरस्वती सिंधु सभ्यता को पाठ्यक्रम में शामिल किया है। द बिगनिंग ऑफ इंडियन सिविलाइजेशन भारतीय सभ्यता का एक अध्याय एनसीईआरटी की छठी किताब में पढ़ाया जाएगा।
इससे पहले एससीईआरटी की दसवीं कक्षा में सरस्वती सिंधु सभ्यता नाम से एक पूरा पाठ्यक्रम शामिल किया गया है। पाठ्यक्रम में हड़प्पा सभ्यता में सरस्वती नदी को घग्गर-हाकरा नदी का नाम दिया गया है। भारत में इसे घग्गर एवं पाकिस्तान में हकरा कहा जाता है, क्योकि इसी क्षेत्र में सरस्वती बहती थी और इसरों के द्वारा पेलियो चैनल इसी ट्रैक के लिए गए थे।
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच ने बताया कि बोर्ड के प्रयास रंग लाए हैं। जिस तरह से हरियाणा बोर्ड की किताबों में सरस्वती बोर्ड के प्रयासों से सरस्वती नदी के ऐतिहासिक व पौराणिक व वैज्ञानिक आधार पर सरस्वती बोर्ड द्वारा प्रयास किए गए एवं जो सरस्वती के किनारे पनपी सभ्यताएं जिसमें आदि बद्री से लेकर कुरुक्षेत्र राखीगढ़ी, कालीबंगा, बनावली, हड़प्पा मोहनजोदड़ो राजस्थान में कालीबंगा व गुजरात में धोलावीरा एवं लोथल के बारे में बताया गया। अब हरियाणा बोर्ड के सिलेबस के साथ-साथ एनसीईआरटी की छठी कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में सम्मिलित किया गया है।
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द बिगनिंग ऑफ इंडियन सिविलाइजेशन भारतीय सभ्यता का एक चैप्टर पढ़ाया जाएगा छठी कक्षा की किताब में
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्राचीन ऋग्वेद ग्रंथ के बाद अब देश की प्राचीनतम नदियों के शामिल सरस्वती नदी की गाथा एनसीईआरटी की किताबों में पढ़ाई जाएगी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सरस्वती नदी के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल किया है। एनसीईआरटी ने छठी कक्षा में सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में सरस्वती सिंधु सभ्यता को पाठ्यक्रम में शामिल किया है। द बिगनिंग ऑफ इंडियन सिविलाइजेशन भारतीय सभ्यता का एक अध्याय एनसीईआरटी की छठी किताब में पढ़ाया जाएगा।
इससे पहले एससीईआरटी की दसवीं कक्षा में सरस्वती सिंधु सभ्यता नाम से एक पूरा पाठ्यक्रम शामिल किया गया है। पाठ्यक्रम में हड़प्पा सभ्यता में सरस्वती नदी को घग्गर-हाकरा नदी का नाम दिया गया है। भारत में इसे घग्गर एवं पाकिस्तान में हकरा कहा जाता है, क्योकि इसी क्षेत्र में सरस्वती बहती थी और इसरों के द्वारा पेलियो चैनल इसी ट्रैक के लिए गए थे।
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हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच ने बताया कि बोर्ड के प्रयास रंग लाए हैं। जिस तरह से हरियाणा बोर्ड की किताबों में सरस्वती बोर्ड के प्रयासों से सरस्वती नदी के ऐतिहासिक व पौराणिक व वैज्ञानिक आधार पर सरस्वती बोर्ड द्वारा प्रयास किए गए एवं जो सरस्वती के किनारे पनपी सभ्यताएं जिसमें आदि बद्री से लेकर कुरुक्षेत्र राखीगढ़ी, कालीबंगा, बनावली, हड़प्पा मोहनजोदड़ो राजस्थान में कालीबंगा व गुजरात में धोलावीरा एवं लोथल के बारे में बताया गया। अब हरियाणा बोर्ड के सिलेबस के साथ-साथ एनसीईआरटी की छठी कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में सम्मिलित किया गया है।
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