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Chandigarh News: पेमेंट अप्रूवल कमेटियों में अब उपप्रधान भी रहेंगे शामिल
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-हर दस दिन में बुलानी होगी निकाय अध्यक्ष को वित्त कमेटी की बैठक
-सीएम द्वारा स्वीकृत मांगों के बाद सरकार ने जारी किए आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने अब शहरी स्थानीय निकाय संस्थाओं में बनाई गई पेमेंट अप्रूवल कमेटियों में उपप्रधान को भी सदस्य बनाया गया है। इससे पहले, उपप्रधान इसके सदस्य नहीं थे। प्रदेशभर के उपप्रधानों ने इस पर आपत्ति जताई थी और शहरी स्थानीय निकाय मंत्री के साथ बैठक करके कमेटी में अपना नाम शामिल करने की मांग की थी। इस संबंध में मंगलवार को निकाय विभाग के आयुक्त विकास गुप्ता ने आदेश जारी किए हैं।
जारी किए आदेशों में 50 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए नगर परिषद या नगर पालिका अध्यक्ष की अगुवाई में उपाध्यक्ष, कार्यकारी अधिकारी या सचिव, चुनाव करके चयनित एक वार्ड पार्षद व जिस वार्ड से संबंधित कार्य है, उस वार्ड का पार्षद सदस्य होगा। यदि काम दो वार्डों में हैं तो जिस वार्ड में काम है, उस वार्ड का सदस्य इस कमेटी का सदस्य नहीं होगा। इसके अलावा 50 लाख से अधिक के कार्यों के लिए इस कमेटी में डीएमसी, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मतदान से चयनित पार्षद व जिस वार्ड में काम हुआ है, उससे संबंधित पार्षद सदस्य होंगे। इस समिति का अध्यक्ष निकाय का प्रधान होगा। वित्त कमेटी की बैठक की तिथि व समय अध्यक्ष तय करेंगे। समिति का कोरम आधी संख्या का होगा। निकाय अध्यक्षों को हर दस दिन में वित्त कमेटी की बैठक बुलानी होगी। एक माह में तीन बार यह बैठकें होंगी। इन बैठकों में निकायों के बिल पास होंगे।
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-सीएम द्वारा स्वीकृत मांगों के बाद सरकार ने जारी किए आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने अब शहरी स्थानीय निकाय संस्थाओं में बनाई गई पेमेंट अप्रूवल कमेटियों में उपप्रधान को भी सदस्य बनाया गया है। इससे पहले, उपप्रधान इसके सदस्य नहीं थे। प्रदेशभर के उपप्रधानों ने इस पर आपत्ति जताई थी और शहरी स्थानीय निकाय मंत्री के साथ बैठक करके कमेटी में अपना नाम शामिल करने की मांग की थी। इस संबंध में मंगलवार को निकाय विभाग के आयुक्त विकास गुप्ता ने आदेश जारी किए हैं।
जारी किए आदेशों में 50 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए नगर परिषद या नगर पालिका अध्यक्ष की अगुवाई में उपाध्यक्ष, कार्यकारी अधिकारी या सचिव, चुनाव करके चयनित एक वार्ड पार्षद व जिस वार्ड से संबंधित कार्य है, उस वार्ड का पार्षद सदस्य होगा। यदि काम दो वार्डों में हैं तो जिस वार्ड में काम है, उस वार्ड का सदस्य इस कमेटी का सदस्य नहीं होगा। इसके अलावा 50 लाख से अधिक के कार्यों के लिए इस कमेटी में डीएमसी, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मतदान से चयनित पार्षद व जिस वार्ड में काम हुआ है, उससे संबंधित पार्षद सदस्य होंगे। इस समिति का अध्यक्ष निकाय का प्रधान होगा। वित्त कमेटी की बैठक की तिथि व समय अध्यक्ष तय करेंगे। समिति का कोरम आधी संख्या का होगा। निकाय अध्यक्षों को हर दस दिन में वित्त कमेटी की बैठक बुलानी होगी। एक माह में तीन बार यह बैठकें होंगी। इन बैठकों में निकायों के बिल पास होंगे।
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