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Chandigarh News: अब शहरों की भी होगी संसद, मेयर सौरभ जोशी का बड़ा प्रस्ताव
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चंडीगढ़। उत्तराखंड के ऋषिकेश में ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल की राष्ट्रीय बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में देश के तेजी से बढ़ते शहरीकरण और स्थानीय निकायों की स्वायत्तता पर चर्चा हुई। चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने भारतीय राष्ट्रीय शहरी संसद के गठन का एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया।
यह प्रस्ताव देश के सभी शहरों और स्थानीय निकायों को एक मजबूत आवाज देने के लिए है। मेयर जोशी ने कहा कि अब एक स्थायी राष्ट्रीय मंच की सख्त जरूरत है। इस मंच पर चुने हुए शहरी प्रतिनिधि एक साथ बैठकर शहरी चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर सकेंगे। वे सीधे राष्ट्रीय नीति निर्धारण में अपना योगदान भी दे पाएंगे। प्रस्तावित नेशनल अर्बन पार्लियामेंट ऑफ इंडिया एक स्थायी राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करेगी।
संसद की संरचना और कार्य
इस प्रस्तावित संसद में सभी नगर निगमों के मेयर, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल होंगे। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के विशेष आमंत्रित सदस्य और विषय विशेषज्ञ भी इसके सदस्य होंगे। यह शहरी संसद प्रतिवर्ष एक बार बैठक करेगी। इसमें शहरी बुनियादी ढांचा, वित्तीय स्वायत्तता, जल आपूर्ति, स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, किफायती आवास, डिजिटल गवर्नेंस, पर्यावरण स्थिरता और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। यह संस्था अपनी नीतिगत सिफारिशें और प्रस्ताव सीधे भारत की संसद, नीति आयोग, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों को भेजने के लिए अधिकृत होगी।
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यह प्रस्ताव देश के सभी शहरों और स्थानीय निकायों को एक मजबूत आवाज देने के लिए है। मेयर जोशी ने कहा कि अब एक स्थायी राष्ट्रीय मंच की सख्त जरूरत है। इस मंच पर चुने हुए शहरी प्रतिनिधि एक साथ बैठकर शहरी चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर सकेंगे। वे सीधे राष्ट्रीय नीति निर्धारण में अपना योगदान भी दे पाएंगे। प्रस्तावित नेशनल अर्बन पार्लियामेंट ऑफ इंडिया एक स्थायी राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करेगी।
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संसद की संरचना और कार्य
इस प्रस्तावित संसद में सभी नगर निगमों के मेयर, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल होंगे। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के विशेष आमंत्रित सदस्य और विषय विशेषज्ञ भी इसके सदस्य होंगे। यह शहरी संसद प्रतिवर्ष एक बार बैठक करेगी। इसमें शहरी बुनियादी ढांचा, वित्तीय स्वायत्तता, जल आपूर्ति, स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, किफायती आवास, डिजिटल गवर्नेंस, पर्यावरण स्थिरता और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। यह संस्था अपनी नीतिगत सिफारिशें और प्रस्ताव सीधे भारत की संसद, नीति आयोग, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों को भेजने के लिए अधिकृत होगी।
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