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Hindi News ›   Chandigarh ›   Now Center will look work of Privatization of Chandigarh Electricity Department

चंडीगढ़: अब केंद्र करवाएगा बिजली विभाग के निजीकरण का काम, नियुक्त किया सलाहकार

Thu, 08 Jul 2021 10:54 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 08 Jul 2021 10:54 AM IST
सार

चंडीगढ़ के बिजली विभाग के निजीकरण पर बार-बार लग रही हाईकोर्ट की रोक को देखते हुए केंद्र ने यह कदम उठाया है। ऊर्जा मंत्रालय के सचिव से प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने मुलाकात की है। अब प्रशासन केंद्र के निर्देश पर ही आगे कदम बढ़ाएगा। 
 

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Now Center will look work of Privatization of Chandigarh Electricity Department
electricity - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में बिजली विभाग का निजीकरण प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। केंद्र सरकार ने जनवरी 2021 तक विभाग का निजीकरण करने का आदेश दिया था, लेकिन हाईकोर्ट की ओर से बार-बार लगाई जा रही रोक की वजह से मामला लटकता जा रहा है। इसलिए अब ऊर्जा मंत्रालय ने अपने हाथ में कमान ले ली है। केंद्र में एक सलाहकार नियुक्त किया गया है, जो अब प्रशासन को बताएगा कि आगे क्या करना है।

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यूटी प्रशासन ने वर्ष 2019 में बिजली विभाग को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया शुरू की थी। वर्ष 2020 में कोरोना ने दस्तक दी तो प्रक्रिया की रफ्तार थम गई। इसके बाद 9 नवंबर 2020 को प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने इच्छुक कंपनियों से निजीकरण को लेकर आवेदन मांगे। प्रक्रिया के खिलाफ यूटी पावर मैन यूनियन ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन के निर्णय पर एक दिसंबर 2020 को रोक लगा दी थी। 

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सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका है मामला

हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ यूटी प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी और निजीकरण को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी। इस बीच यूनियन ने मई 2021 में फिर हाईकोर्ट में अर्जी दायर की और प्रक्रिया पर रोक की मांग की थी। हाईकोर्ट ने 10 जून को इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए निजीकरण की प्रक्रिया पर फिर से रोक लगा दी, लेकिन प्रशासन दोबारा सुप्रीम कोर्ट चला गया। इस बार भी सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को राहत दी और हाईकोर्ट की रोक को हटा दिया। 

बार-बार लग रही ब्रेक की वजह से निजीकरण का काम लटक गया। इसलिए अब ऊर्जा मंत्रालय ने दखल दिया है और इस मामले को जल्द पूरा करने के लिए एक सलाहकार की नियुक्ति की है। मंत्रालय ने प्रशासन को कहा है कि अब वह पूरे मामले को देखेंगे और बताएंगे कि आगे क्या करना है।

सलाहकार धर्मपाल ने ऊर्जा मंत्रालय के सचिव से की मुलाकात
बिजली विभाग की निजीकरण की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के लिए प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने बीते दिनों ऊर्जा मंत्रालय के सचिव से भी मुलाकात की है। बैठक में निजीकरण में आ रही रुकावटों पर चर्चा हुई। इसके बाद ही मंत्रालय ने कहा है कि अब वह ही प्रशासन को आगे का रास्ता दिखाएंगे। धर्मपाल ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उन्होंने मामले को ऊर्जा मंत्रालय को भेज दिया है। अब वह पूरे मामले को देखेंगे और उसके बाद बताएंगे कि आगे प्रशासन को क्या करना चाहिए।

दौड़ में हैं अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड समेत सात कंपनियां
चंडीगढ़ के बिजली विभाग को खरीदने की दौड़ में कुल सात कंपनियां हैं। इनमें अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टेरेलाइट पावर, रन्यू विंड एनर्जी, एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड शामिल हैं। शहर में इस समय 2.47 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 2.14 लाख लोग घरेलू बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि अन्य कामर्शियल, स्माल पावर, पब्लिक लाइटिंग और कृषि के कनेक्शन हैं। निजीकरण होने के बाद अंदेशा है कि बिजली के दाम कम भी हो सकते हैं और बढ़ भी सकते हैं, क्योंकि पिछले कई सालों से शहर में दाम नहीं बढ़ाए गए हैं।

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