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Chandigarh News: सरकारी स्कूलों में अब बिना पीपीपी और आधार कार्ड के भी होंगे दाखिले
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ईंट-भट्ठों और प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए अभिभावकों का शपथ-पत्र होगा मान्य
शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी किए निर्देश
चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अब बिना पीपीपी और आधार कार्ड नंबर के भी दाखिले हो सकेंगे। सरकारी स्कूलों में घट रही विद्यार्थियों की संख्या और प्रवासी बच्चों के दाखिले में आ रही दिक्कतों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने यह फैसला लिया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डाॅ. जी अनुपमा ने सभी डीईओ और डीईईओ को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि प्रवेश उत्सव के तहत नामांकन में परिवार पहचान पत्र और आधार नंबर की अनिवार्यता जरूरी नहीं है। यदि बच्चे के पास जन्म का प्रमाणपत्र नहीं है तो आंगनबाड़ी रिकार्ड, अस्पताल या नर्स व दाई के रजिस्टर इत्यादि का भी रिकार्ड उपलब्ध नहीं है तो माता-पिता की ओर से बच्चे की आयु को लेकर दिए जाने वाला शपथ पत्र मान्य होगा।
बताते चलें कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 में पहली से 11वीं तक पढ़ने वाले 4.64 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ा था। इसको लेकर हरियाणा सरकार ने काफी नाराजगी जताई थी और डीईओ को सख्त निर्देश दिए थे। नए सत्र के लिए 23 मार्च से पहली अप्रैल तक प्रवेश उत्सव (दाखिला प्रक्रिया) अभियान में ईंट-भट्ठों और खासकर प्रवासी मजदूरों के बच्चों के दाखिले में बिना पीपीपी और आधार नंबर के परेशानी का सामना करना पड़ा। फील्ड के अधिकारियों ने मुख्यालय को इस दिक्कत से अवगत कराया। अब विभाग ने पीपीपी और आधार कार्ड की शर्त को हटा दिया है। पत्र में कहा कि बिना पीपीपी और आधार नंबर के दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का डाटा एमआईएस पोर्टल पर अलग से अपलोड किया जाए। साथ ही विद्यालय के दाखिला-खारिज रजिस्टर में उसका नामांकन करके शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत दी जाने वाली नि:शुल्क हकदारियां जैसे मुफ्त पाठ्य पुस्तकें, कार्य पुस्तकें इत्यादि दी जाएं।
स्कूल छोड़ने वालों की बढ़ रही संख्या चिंताजनक
सरकारी स्कूलों में लगातार विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने के मामले बढ़ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2022-23 में पहली से 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाले 55,41,592 बच्चों का डाटा यू-डीआईएसई पोर्टल पर पंजीकृत किए गए। मगर 2023-24 में जब वार्षिक परीक्षा परिणाम के आधार पर बच्चों का डाटा अपडेट किया गया तो प्रदेशभर के सभी स्कूलों में कक्षा पहली से 11वीं तक पढ़ने वाले 4.64 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया। खास बात यह है कि इन बच्चों ने सरकारी स्कूल छोड़कर किसी निजी स्कूल में भी दाखिला नहीं लिया।
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शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी किए निर्देश
चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अब बिना पीपीपी और आधार कार्ड नंबर के भी दाखिले हो सकेंगे। सरकारी स्कूलों में घट रही विद्यार्थियों की संख्या और प्रवासी बच्चों के दाखिले में आ रही दिक्कतों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने यह फैसला लिया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डाॅ. जी अनुपमा ने सभी डीईओ और डीईईओ को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि प्रवेश उत्सव के तहत नामांकन में परिवार पहचान पत्र और आधार नंबर की अनिवार्यता जरूरी नहीं है। यदि बच्चे के पास जन्म का प्रमाणपत्र नहीं है तो आंगनबाड़ी रिकार्ड, अस्पताल या नर्स व दाई के रजिस्टर इत्यादि का भी रिकार्ड उपलब्ध नहीं है तो माता-पिता की ओर से बच्चे की आयु को लेकर दिए जाने वाला शपथ पत्र मान्य होगा।
बताते चलें कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 में पहली से 11वीं तक पढ़ने वाले 4.64 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ा था। इसको लेकर हरियाणा सरकार ने काफी नाराजगी जताई थी और डीईओ को सख्त निर्देश दिए थे। नए सत्र के लिए 23 मार्च से पहली अप्रैल तक प्रवेश उत्सव (दाखिला प्रक्रिया) अभियान में ईंट-भट्ठों और खासकर प्रवासी मजदूरों के बच्चों के दाखिले में बिना पीपीपी और आधार नंबर के परेशानी का सामना करना पड़ा। फील्ड के अधिकारियों ने मुख्यालय को इस दिक्कत से अवगत कराया। अब विभाग ने पीपीपी और आधार कार्ड की शर्त को हटा दिया है। पत्र में कहा कि बिना पीपीपी और आधार नंबर के दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का डाटा एमआईएस पोर्टल पर अलग से अपलोड किया जाए। साथ ही विद्यालय के दाखिला-खारिज रजिस्टर में उसका नामांकन करके शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत दी जाने वाली नि:शुल्क हकदारियां जैसे मुफ्त पाठ्य पुस्तकें, कार्य पुस्तकें इत्यादि दी जाएं।
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स्कूल छोड़ने वालों की बढ़ रही संख्या चिंताजनक
सरकारी स्कूलों में लगातार विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने के मामले बढ़ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2022-23 में पहली से 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाले 55,41,592 बच्चों का डाटा यू-डीआईएसई पोर्टल पर पंजीकृत किए गए। मगर 2023-24 में जब वार्षिक परीक्षा परिणाम के आधार पर बच्चों का डाटा अपडेट किया गया तो प्रदेशभर के सभी स्कूलों में कक्षा पहली से 11वीं तक पढ़ने वाले 4.64 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया। खास बात यह है कि इन बच्चों ने सरकारी स्कूल छोड़कर किसी निजी स्कूल में भी दाखिला नहीं लिया।
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