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सुखना चो और घग्गर को प्रदूषित करने वाली 60 कंपनियों को नोटिस, दो को यूनिट बंद करने के आदेश

Wed, 23 Oct 2019 02:03 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 23 Oct 2019 02:03 AM IST
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Notice to 60 companies polluting Sukhna Cho and Ghaggar, two ordered to shut down units
चंडीगढ़। एनजीटी की एक्जीक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन रिटायर्ड जस्टिस प्रीतम पाल ने मंगलवार को चंडीगढ़ का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (सीपीसीसी) को फटकार लगाते हुए कहा कि कंपनियों से निकलने वाले पानी में डायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (डीओडी) की मात्रा काफी अधिक है। साथ ही सुखना चो और घग्गर में जाने वाले इस पानी को न रोकने को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की। इसके बाद बोर्ड ने आनन-फानन में 60 कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया। एनवायरमेंट एक्ट एवं नियम के प्रोविजन को नहीं मानने वाली दो फर्मों को भी अपनी यूनिट बंद करने का आदेश दिए गए हैं।
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रिटायर्ड जस्टिस प्रीतम पाल ने नगर निगम कमिश्नर केके यादव, सीपीसीसी के मेंबर सेक्रेटरी एसएन नौटियाल से मुलाकात की। इस दौरान स्मार्ट सिटी के अंतर्गत बनाए जाने वाले पांच एसटीपी के बारे में जानकारी ली। निगम कमिश्नर ने बताया कि टेंडर की प्रक्रिया जारी है। जल्द एसटीपी के लिए टेंडर अलॉट कर दिया जाएगा। इसके बाद सीपीसीसी से इंडस्ट्रियल एरिया में बनी कंपनियों से निकलने वाले पानी के साथ निकलने वाले डीओडी के बारे में जानकारी ली। साथ ही सुखना चो और घग्गर में जाने वाले ट्रीटेड पानी को लेकर नाराजगी जताई। कहा कि जब डीओडी की मात्रा अधिक होगी तो फिर पानी गंदा और विषैला हो जाएगा। कहा कि जब कंपनियां लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। इसके बाद बोर्ड ने तत्काल 60 कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया। साथ ही दो कंपनियों से निकलने वाले पानी में बीओडी की मात्रा ज्यादा होने पर तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिन स्थानों से सुखना चो और घग्गर में पानी जाने वाले सभी स्थानों को चेक करने को कहा गया है ताकि ट्रीटेड पानी को ही नदी व नाले में डाला जाए।
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डीओडी की मात्रा लेसदेन 10 डीओडी से ज्यादा
एनवायरमेंट प्रोटेक्शन रूल 1986 में प्रावधान है कि इंडस्ट्रियल यूनिटों से जो वाटर ए लूएंट वेस्ट निकलेगा उसे जनरल स्टैंडर्ड के मुताबिक ही नदी व नालों में डाला जाएगा। इसमें बीओडी मात्रा लेसदेन 10 डीओडी तक ही होनी चाहिए। इसके अलावा नाइट्रेट व फास्फोरस की मात्रा भी काफी कम होनी चाहिए। इंडस्ट्रियल यूनिट इस प्रावधान का पालन नहीं कर रहे। रिपोर्ट के अनुसार सभी सुखना चो और घग्गर में जाने वाले पानी में डीओडी की मात्रा काफी है।
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सूखा गीला कचरा अलग अलग लेने की व्यवस्था से भी नाखुश
रिटायर्ड जस्टिस प्रीतम पाल ने शहर में सूखा गीला कचरा अलग-अलग लेने की व्यवस्था से भी नाखुश दिखे। कमिश्नर केके यादव ने फिलहाल शहर में चल रहीं व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। जस्टिस ने कहा कि इस व्यवस्था को थोड़ी और बड़े स्तर पर लागू किया जाए। लोगों को जागरूक करें ताकि बेहतर तरीके से कचरा सेग्रीगेट हो सकें। कमिश्नरद ने जेपी प्लांट की कार्य प्रणाली को लेकर भी शिकायत की। बताया कि प्लांट कचरा प्रोसेस नहीं कर पा रहा है इसलिए शहर का कचरा डंपिंग ग्राउंड पर भेजना पड़ रहा है। जस्टिस ने जल्द प्लांट के निरीक्षण की भी बात कही।
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