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नोटबंदी का असर: सरकारी अस्पतालों ने नहीं मानी पीएम की बात, मरीज हुए परेशान

Thu, 10 Nov 2016 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 10 Nov 2016 01:41 AM IST
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Notbandi effect, public hospitals, PM modi, the nervous patient
सरकारी अस्पतालों ने नहीं मानी पीएम की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के नाम संदेश में सबको भरोसा दिया था कि अस्पतालों में अगले दो दिन तक पांच सौ और एक हजार के नोट लिए जाएंगे किसी को कोई दिक्कत नहीं आएगी। लेकिन पांच सौ और एक हजार की नोट न होने पर शहर के तीनों बड़े अस्पतालों जीएमसीएच 32, जीएमएसएच 16 में मरीजों के चिकनगुनिया और डेंगू के टेस्ट नहीं किए गए। 
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जीएमएसएच में डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने कहा कि पांच सौ की नोट देने पर एमआरआई नहीं की जा सकती क्योंकि ऐसा करने पर यह ब्लैक मनी हो जाएगी और पीजीआई में मरीजों के टेस्ट तक नहीं हुए।  दिक्कतें आईं। दवाएं और खाना तक नहीं मिला। 
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 रीढ़ की हड्डी और गर्दन में तकलीफ से परेशान अंबाला निवासी विनोद बुधवार को एमआरआई कराने पहले जीएमसीएच - 32 गए। वहां से उन्हें सेक्टर - 16 जीएमएसएच भेज दिया गया। लेकिन दोनों जगह डॉक्टरों ने एमआरआई करने से मना कर दिया। ।  विनोद ने बताया कि एमआरआई की फीस 2800 रुपये है। इसके लिए जीएमएसएच में उससे सौ-सौ रुपये के नोट मांगे जा रहे थे। अस्पताल ने 500 और 1000 के नोट लेने से इनकार कर दिया। एमआरआई  न होने पर विनोद जीएमएसएच के डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट जी दीवान से मिले। लेकिन उन्होंने भी पेशेंट की सहायता करने से इनकार कर दिया। 
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घंटों इंतजार के बाद भी मेडिकल हाल से नहीं मिलीं दवाएं

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सरकारी अस्पतालों ने नहीं मानी पीएम की बात
दोनों अस्पतालो में खुले पैसे नहीं होने के कारण डेंगू और चिकनगुनिया के टेस्ट कराने मरीजों को लौटा दिया गया। जालंधर से जीएमसीएच 32 आए राकेश कुमार ने बताया कि खुले पैसे नही होने के कारण यहां पर टेस्ट नहीं हो रहे हैं। इसलिए परेशानी हो रही है।

 इसी तरह दोनों अस्पतालो में स्थित मेडिकल हाल में मरीजों को खुले पैसे नहीं होने के कारण बैरंग लौटना पड़ा। सेक्टर 16 जीएमएसएच में अंबाला से आए रमेश कुमार ने बताया कि कैँटीन संचालक ने 500 रुपये का नोट नहीं होने के कारण खाना देने से मना कर दिया। इसी तरह धनास निवासी प्रेमरानी सेक्टर - 16 जीएमएसएच हॉस्पिटल दिखाने आई थीं। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने देखने के बाद कहा कि केमिस्ट शॉप से दवा ले आओ।

जब उसने शॉप में 500 रुपये का नोट दिया तो पहले तीन घंटे तक उसको दवा नहीं दी गई। बाद मेें 150 रुपये की दवाई देने के बाद दुकानदार ने 50 रुपये अधिक काट लिए। उसकी शिकायत भी किसी ने नहीं सुनी।  सेक्टर - 43 निवासी सत्यवान ने बताया कि वह सुबह 10 बजे डॉक्टर को जीएमएसएच 16 आया। डॉक्टर ने देखने के बाद दवाएं लाने को कहा। एक हजार का नोट लेने से दुकानदार ने मना कर दिया। उसने कहा कि दवा लेने पांच घंटे बाद आओ। लेकिन पांच घंटे बाद भी दुकानदार ने दवा नहीं दी।

 पीजीआई में नहीं मिली दवाई
 पीजीआई पहुंचे राजिंदर ने बताया कि वह वायरल बुखार से पीड़ित हैं। पीजीआई में डॉक्टर को दिखाया। इसकेे बाद 500 रुपये का नोट लेकर दवाई लेने गए। लेकिन खुला पैसा नहीं होने के कारण  केमिस्ट्स ने दवाई देने से मना कर दिया। 10 से ज्यादा मेडिकल स्टोर पर जा चुका हूं, लेकिन पीजआई में दवाई नहीं मिली।
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