{"_id":"e62f34d74b6be1ac2cccd82a0f80f499","slug":"nota-5","type":"story","status":"publish","title_hn":"उम्मीदवार पसंद न आए तो क्या करें, जानिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उम्मीदवार पसंद न आए तो क्या करें, जानिए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 20 Mar 2014 08:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव 2014 में प्रयोग की जाने वाली ईवीएम मशीन में मतदाताओं के लिए नोटा नामक एक नया बटन जोड़ा गया है।
यूटी प्रशासन के चुनाव विभाग की ओर से मतदाताओं को मतदान के अधिकार के बारे में जागरूक करने के साथ साथ उन्हें ईवीएम में ‘नन ऑफ द अबव’ (नोटा) बटन के बारे में भी बताया जाएगा।
लोगों को बताया जाएगा कि ईवीएम में नोटा का मतलब क्या है? पहली बार चुनाव आयोग ने लोगों को नोटा का विकल्प भी दिया है ताकि अगर किसी को कोई उम्मीदवार पसंद नहीं आता है तो वह नोटा का बटन दबा सके।
उम्मीद की जा रही है कि नोटा का विकल्प चंडीगढ़ में भी उम्मीदवारों की हार-जीत में अहम भूमिका निभाएगा। यूटी प्रशासन ने पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रो.सुशांत को ईवीएम का नोडल ऑफिसर नियुक्त किया है।
विज्ञापन
उनकी टीम को एक वैन दी गई है जो कि शहर के अलग अलग हिस्सों में जाकर लोगों को ईवीएम के उपयोग के बारे में तो बताएगी ही, साथ ही उन्हें ईवीएम में लगे नोटा बटन के बारे में भी अवगत कराएगी।
साथ ही एनजीओ थिएटर एज भी शहर के लोगों को नोटा के बारे में बताएगी। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से शहर के अलग अलग हिस्सों में आयोजित किए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रमों में भी नोटा के बारे में बताया जाएगा। ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने भी नोटा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
क्या है नोटा
चुनाव आयोग की कोशिश है कि मतदान केंद्र तक उन मतदाताओं को भी लाया जाए जिसे कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है और जिसका मन राजनीतिक व्यवस्था से भर गया है।
ऐसा करने से मतदान के प्रतिशत में भी बढ़ोतरी होगी क्योंकि नोटा का विकल्प चुन कर उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है।
इसलिए इस बार मतदाताओं को ईवीएम में एक विकल्प दिया गया है कि अगर उन्हें कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है तो वह ‘उपरोक्त में कोई नहीं’ (नोटा) बटन दबा सकते हैं। लोगों की आसानी के लिए इसे स्थानीय भाषा में भी लिखा जाएगा। ईवीएम में अंतिम बटन नोटा का होगा।
विज्ञापन
यूटी प्रशासन के चुनाव विभाग की ओर से मतदाताओं को मतदान के अधिकार के बारे में जागरूक करने के साथ साथ उन्हें ईवीएम में ‘नन ऑफ द अबव’ (नोटा) बटन के बारे में भी बताया जाएगा।
लोगों को बताया जाएगा कि ईवीएम में नोटा का मतलब क्या है? पहली बार चुनाव आयोग ने लोगों को नोटा का विकल्प भी दिया है ताकि अगर किसी को कोई उम्मीदवार पसंद नहीं आता है तो वह नोटा का बटन दबा सके।
विज्ञापन
उम्मीद की जा रही है कि नोटा का विकल्प चंडीगढ़ में भी उम्मीदवारों की हार-जीत में अहम भूमिका निभाएगा। यूटी प्रशासन ने पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रो.सुशांत को ईवीएम का नोडल ऑफिसर नियुक्त किया है।
विज्ञापन
उनकी टीम को एक वैन दी गई है जो कि शहर के अलग अलग हिस्सों में जाकर लोगों को ईवीएम के उपयोग के बारे में तो बताएगी ही, साथ ही उन्हें ईवीएम में लगे नोटा बटन के बारे में भी अवगत कराएगी।
साथ ही एनजीओ थिएटर एज भी शहर के लोगों को नोटा के बारे में बताएगी। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से शहर के अलग अलग हिस्सों में आयोजित किए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रमों में भी नोटा के बारे में बताया जाएगा। ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने भी नोटा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
क्या है नोटा
चुनाव आयोग की कोशिश है कि मतदान केंद्र तक उन मतदाताओं को भी लाया जाए जिसे कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है और जिसका मन राजनीतिक व्यवस्था से भर गया है।
ऐसा करने से मतदान के प्रतिशत में भी बढ़ोतरी होगी क्योंकि नोटा का विकल्प चुन कर उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है।
इसलिए इस बार मतदाताओं को ईवीएम में एक विकल्प दिया गया है कि अगर उन्हें कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है तो वह ‘उपरोक्त में कोई नहीं’ (नोटा) बटन दबा सकते हैं। लोगों की आसानी के लिए इसे स्थानीय भाषा में भी लिखा जाएगा। ईवीएम में अंतिम बटन नोटा का होगा।