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पंजाब: थर्मल ही नहीं सोलर बिजली भी राज्य में सबसे महंगी, 8-17 रुपये प्रति यूनिट पहुंचा भाव

Sat, 10 Jul 2021 09:44 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 10 Jul 2021 09:44 PM IST
सार

सिद्धू ने अकालियों को घेरा तो कांग्रेस की भी पोल खुल गई। पिछली अकाली-भाजपा सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में महंगे बिजली समझौते किए। कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में इसका भाव बढ़कर 8-17 रुपये प्रति यूनिट पहुंच गया है।

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Not only thermal but solar electricity is also costly in Punjab reaches approx 8 to 17 rupees per unit
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विस्तार

300 यूनिट मुफ्त बिजली के चुनावी वादों के बीच, पंजाब की जनता को आने वाले कई दशकों तक सस्ती बिजली मिलने की उम्मीद समाप्त हो चुकी है। पिछली अकाली-भाजपा सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में जहां निजी थर्मल पावर प्लांटों के साथ महंगे बिजली समझौते किए, वहीं इस मामले में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार भी पीछे नहीं रही। 

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प्रदेश मे सोलर पावर (सूर्य की रोशनी से बिजली) खरीदने के लिए आठ रुपये से 17 रुपये प्रति यूनिट तक की दर से समझौते किए गए हैं। जाहिर है, इस दाम पर खरीदी गई बिजली जब आम खपतकार तक पहुंचेगी तो उसे प्रति यूनिट बिजली पर 20 प्रतिशत बिजली कर, दो रुपये के बिजली ट्रांसमीशन से जुड़े खर्चे और गौ-सेस जैसे कई अन्य उपकर का भुगतान भी करना होगा।
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यह सारा मामला उस समय खुलकर सामने आया जब कैप्टन के धुर विरोधी कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ने बिजली की मौजूदा किल्लत के बीच अकाली-भाजपा पर ट्वीटर हमले शुरु किए तो सोलर पावर के खरीद समझौते भी चर्चा में आ गए। हालांकि सिद्धू ने शनिवार को अपने ट्वीट में बादल हस्ताक्षरित पीपीए थर्मल प्लांटों और बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा अक्षय ऊर्जा (सोलर पावर) मंत्री के रूप में 25 साल के लिए हस्ताक्षर किए पीपीए के आधार पर 5.97 रुपये से 17.91 रुपये प्रति यूनिट की दर से समझौते पर उंगली उठाते हुए लिखा कि यह जानते हुए कि सोलर उर्जा की लागत प्रति वर्ष 18 फीसदी की दर से घट रही है, उसके बावजूद महंगे समझौते किए गए। सिद्धू ने यह भी लिखा कि 2010 और आज इस बिजली की कीमत 1.99 रुपये प्रति यूनिट है।
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सिद्धू ने हालांकि इस मामले में कैप्टन सरकार का कोई उल्लेख न करते हुए बचाव किया लेकिन विपक्षी दलों ने तुरंत ही पुराना रिकार्ड खंगाल डाला। इसके तहत कैप्टन सरकार ने भी बायोमास प्रोजैक्टों के साथ 8.10 रुपये प्रति यूनिट के महंगे समझौते किए। इससे पहले अकाली-भाजपा शासन के दौरान सोलर पावर खरीदने के लिए तीन निजी कंपनियों से 17.91 रुपये प्रति यूनिट की दर से समझौते किए गए। यह कंपनियां अडानी ग्रुप से जुड़ी हैं। कुल 91 प्रोजैक्टों के लिए समझौते किए गए जिनमें से 22 सोलर पावर प्रोजैक्टों में बिजली खरीद समझौता 8 रुपये प्रति यूनिट की दर से किया गया। खास बात यह भी है कि यह सभी समझौते अगले 25 साल के लिए किए गए हैं।

यह है समझौतों की सबसे बड़ी गड़बड़ी

जैसा कि नवजोत सिद्धू ने ट्वीट के जरिए सोलर पावर की मौजूदा दर का जिक्र किया है। उसे देखते हुए अकाली-भाजपा और कांग्रेस के कार्यकाल में किए गए सोलर पावर के 25 वर्षीय समझौतों की बड़ी गड़बड़ी यह है कि समय के साथ-साथ नवीनतम तकनीकों के इस्तेमाल से इस बिजली के दाम में लगातार गिरावट आ रही है, लेकिन पंजाब की सरकारों ने समझौतों में इस बात का ध्यान नहीं रखा। 

नतीजतन सोलर पावर भी महंगे दाम पर ही खरीदी जाएगी। पीएसपीसीएल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014-15 में प्रति यूनिट 7.57 रुपये बिजली खरीदी गई, जो 2015-16 में महंगी होकर 8.06 रुपये प्रति यूनिट हो गई। कैप्टन सरकार के समय भी 2018 में बायोमास प्रोजैक्टों से समझौते किए गए हैं, जिसके तहत बिजली के दाम प्रति यूनिट आठ रुपये से अधिक ही रहने वाले हैं।
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