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इस बार दिवाली पर मुसीबत बन सकती पराली, ये बड़ी वजह आई सामने

Fri, 02 Nov 2018 11:53 AM IST
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 02 Nov 2018 11:53 AM IST
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north india Trouble to stubble Prblem on Diwali
सांकेतिक तस्वीर

पिछले साल दिवाली पर स्मॉग ने पंजाब से लेकर दिल्ली तक को दहलाया था। इस बार भी आशंका बन गई है कि दिवाली के पटाखे और पराली का धुआं मिल कर कहर ढाएंगे। क्योंकि पंजाब में धान की कटाई निर्धारित समय से बहुत लेट चल रही है। पिछले साल दिवाली अक्तूबर के तीसरे हफ्ते में थी। उस समय पंजाब में धान की कटाई का पीक सीजन होता है। 

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कटाई के साथ ही खेतों में पराली जलाई गई। जिससे राष्ट्रीय राजधानी का मिजाज कई दिनों तक बिगड़ा रहा। आपात स्थिति पैदा हो गई, राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बना, काफी सियासत हुई और अदालतों ने दखल दिया। इस बार खेतीबाड़ी माहिर और पर्यावरणविद राहत की सांस ले रहे थे। क्योंकि दिवाली नवंबर के पहले सप्ताह में है। पंजाब में धान की कटाई तब तक खत्म हो जाती है। उस समय सिर्फ बासमती बचता है, जिसकी पराली समस्या नहीं है। 
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माहिरों का मानना था कि पराली का धुआं पहले खत्म हो जाएगा, उसके बाद दिवाली भी निकल जाएगी। लेकिन सितंबर के अंत में पकी फसल पर हुई बेमौसम बरसात ने सारे समीकरण बिगाड़ दिए। बारिश के चलते धान की कटाई काफी लेट हो गई है। इस बार दो सौ लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन एक नवंबर तक मंडियों में सिर्फ 9908342 टन धान की खरीद ही हो सकी है। जिससे साफ है कि दिवाली के आसपास भी धान की कटाई जोरों पर रहेगी। जिस कारण पराली और पटाखों का धुआं लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए मुसीबत बनेंगे।

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15000 शिकायतें, 40 लाख जुर्माना

north india Trouble to stubble Prblem on Diwali
सांकेतिक तस्वीर

पराली जलाने की राज्य भर से अब तक 15000 शिकायतें आई हैं। पराली प्रबंधन की मशीनरी पर सब्सिडी और जागरूकता अभियान के कारण इस बार पराली जलाने के मामलों में काफी गिरावट आई है। पिछले साल इस समय तक 23000 शिकायतें आ चुकी थीं। 2017 में पराली जलाने के कुल 43660 मामले आए थे। जबकि, 2016 में इनकी संख्या 80879 थी।

 पराली जलाने की घटनाओं में लगातार गिरावट आ रही है। खेतीबाड़ी विभाग को उम्मीद थी कि इस बार संख्या घट कर बारह हजार रह जाएगी, लेकिन उससे काफी ज्यादा शिकायतें अब तक आ चुकी हैं। पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने अब तक आई शिकायतों को लेकर किसानों पर 40 लाख रुपये का जुर्माना किया है।

अब तक नहीं दी पराली प्रबंधन की पूरी मशीनरी
केंद्र सरकार ने पिछले साल पराली के कहर के बाद पंजाब को सहायता देने का एलान किया था। जिसके तहत खेत में ही पराली का प्रबंधन करने वाली मशीनें किसानों को पचास प्रतिशत और सोसायटी को 80 प्रतिशत सब्सिडी पर दी जानी थीं। इस साल 24972 मशीनें किसानों को दी जानी चाहिए थीं। 

यह काम एक अक्तूबर को कटाई शुरू होने से पहले हो जाना चाहिए था। लेकिन एक नवंबर तक भी सिर्फ 22,200 मशीनें ही दी गई हैं। विभाग ने किसानों के लिए डेडलाइन बढ़ा कर सात नवंबर कर दी है, आगे भी इसे बढ़ाया जा सकता है। ताकि वे मशीनें खरीद कर विभाग को सब्सिडी के लिए आवेदन करें।

200 लाख टन में से बीस लाख टन बासमती है, दस  प्रतिशत धान का नुकसान है। इस तरह 162 लाख टन धान के मंडियों में आने की उम्मीद है, जिसमें से 102 लाख टन आ चुका है। रोजाना सात लाख टन फसल आ रही है। इस तरह दिवाली पर बहुत कम फसल ही बचेगी। - काहन सिंह पन्नू, सचिव, खेतीबाड़ी विभाग, पंजाब

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