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टूटी उम्मीद: मनोनीत पार्षदों को नहीं मिली राहत, मेयर चुनाव में नहीं डाल पाएंगे वोट

Sun, 07 Jan 2018 09:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 07 Jan 2018 09:29 AM IST
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Nominated councillors can't vote in mayoral poll
- फोटो : File Photo
नगर निगम के 9 मनोनीत पार्षदों का 9 जनवरी को होने वाले मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में मतदान करने का सपना टूट गया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मनोनीत पार्षदों के वोटिंग अधिकार के मामले में स्टे नहीं दिया है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी। अब उस दिन बहस होगी।
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अगर मनोनीत पार्षदों को वोटिंग अधिकार मिल जाता है तो मेयर चुनाव की राजनीति बदल जाती, क्योंकि नगर निगम के 9 मनोनीत पार्षदों में से 5 को भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन की सिफारिश पर ही बनाया गया था। 1997 से 2017 तक हर चुनाव में मनोनीत पार्षदों ने वोटिंग का प्रयोग किया है। यह पहला मेयर चुनाव होगा जिसमें वे मतदान नहीं करेंगे। मनोनीत पार्षद को वोटिंग अधिकार न मिलने से अब मुकाबला कांग्रेस, भाजपा और भाजपा के बागी उम्मीदवारों के बीच होगा।
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सुनवाई के दौरान भाजपा के पूर्व पार्षद सतिंदर सिंह अपने वकील के साथ सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे थे। स्टे न मिलने पर सतिंदर सिंह ने इसे शहरवासियों की जीत बताया है। मालूम हो कि पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले साल सतिंदर सिंह की याचिका पर ही सुनवाई करते हुए मनोनीत पार्षदों के वोटिंग अधिकार को खारिज किया था। इस पर प्रशासन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई देखने के लिए मेयर आशा जसवाल के बेटे बृजेश्वर जसवाल भी दिल्ली पहुंचे थे। बृजेश्वर जसवाल भी पेशे से वकील हैं।
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फिर कांग्रेस न बन पाती किंग मेकर

Nominated councillors can't vote in mayoral poll
Satinder Singh - फोटो : File Photo
फिर कांग्रेस न बन पाती किंग मेकर
मनोनीत पार्षदों को अगर वोटिंग अधिकार मिल जाता तो कांग्रेस पार्टी जो इस समय किंग मेकर की स्थिति में है वह नहीं बन पाती। फिर जीत की चाबी मनोनीत पार्षदों के पास चली जाती। अब तक जो मेयर चुनाव हुए हैं उनमें मनोनीत पार्षदों की काफी अहम भूमिका रही।

मालूम हो कि कांग्रेस पार्टी ने 2001 से 2015 तक मनोनीत पार्षदों के दम पर ही नगर निगम पर कब्जा रखा है। 2016 में भाजपा के अरुण सूद भी मनोनीत के दम पर ही नगर निगम के मेयर बने थे। 

पहली बार मनोनीत पार्षदों पर नहीं लगेंगे आरोप
इससे पहले जब-जब राजनीतिक दलों के पार्षद क्रॉस वोटिंग करते रहे हैं, चुनाव के बाद आरोप मनोनीत पार्षदों पर ही लगे। हालांकि इस बार ऐसा नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि  21 साल बाद ऐसा पहली बार होगा जब नौ मनोनीत पार्षद मतदान नहीं करेंगे। ऐसे में इस बार यदि क्रॉस वोटिंग की नौबत आई तो हार का ठीकरा फोड़ने के मामले में कोई भी दल मनोनीत पार्षदों पर आरोप लगाकर नहीं बच सकेगा।
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