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लाडलों को पार्क में भेजने से पहले खबर पढ़ें

Mon, 08 Dec 2014 02:03 PM IST
कुलदीप शुक्ला/अमर उजाला, चंडीगढ़
कुलदीप शुक्ला/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 08 Dec 2014 02:03 PM IST
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No Safety in Parks of Childrens, Be Aware

सिटी ब्यूटीफुल में बच्चों का पार्क में जाना महफूज नहीं रह गया है। बच्चों को सॉफ्ट टारगेट मानकर अपराधी उन पर लगातार नजर रखते हैं और पार्क में मौका मिलते ही उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं। ऐसी वारदातों में कई बार अभिभावकों की लापरवाही अपराधियों के लिए वरदान बन जाती है। इनमें से कुछ बच्चों को बहलाकर ले जाते हैं, तो बहुत से उठाकर ले जाते हैं।

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केस नंबर वन
मनीमाजरा स्थित शिवालिक पार्क में जीवन भाई के साथ खेल रहा था। उसी दौरान उसका अपहरण कर लिया गया। जीवन को एक अज्ञात महिला मूंगफली दिलवाने के नाम पर ले गई थी। इसके चार दिन बाद जीवन खरड़ रोड पर एक ऑटो की डिक्की में रोता हुआ मिला।
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केस नंबर टू
मौलीजागरा स्थित पार्कं से तीन साल की बच्ची गायब हो गई। इस वारदात को सालों बीत गए हैं, लेकिन उस मासूम का अभी तक कोई सुराग नहीं लगा सकी है।

शहर में 1600 से ज्यादा पार्क
आंकड़ों के अनुसार शहर में लगभग 1600 छोटे-बड़े पार्क हैं। सुबह और शाम दोनों समय तकरीबन हर पार्क में बच्चे खेलने पहुंचते हैं। कुछ के साथ माता-पिता या अन्य बड़े लोग होते हैं, तो बहुत से बच्चे अकेले पहुंचते हैं।

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ये कहना है लोगों का

No Safety in Parks of Childrens, Be Aware

पार्क के बाहर बीट बॉक्स बनाया जाए। इससे पार्क के अंदर आने-जाने वालों की पहचान की जा सकेगी। इसके साथ ही अन्य सेक्टर के लोगों को पार्क में जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
बलजिंदर सिंह बिट्टू, फासवेग चेयरमैन, निवासी सेक्टर-21

परिजनों को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों को किसी की अनजान व्यक्ति के पास छोड़ने जैसी गलती कभी नहीं करनी चाहिए। पार्क के बाहर पेट्रोलिंग करवाने से ऐसी वारदातों पर बहुत हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
डॉ. ओपी वर्मा, निवासी सेक्टर-20

कोट
बीट बॉक्स पर मौजूद पुलिसकर्मियों को पार्क की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी। ड्यूटी के दौरान ये पुलिसकर्मी पार्क का भी राउंड लगाएंगे। इस दौरान यदि कोई संदिग्ध दिखता है, तो उससे पूछताछ भी करेंगे।
सुखचैन सिंह गिल
एसएसपी, चंडीगढ़

ये शुरू करेगी पुलिस

No Safety in Parks of Childrens, Be Aware

1- चंडीगढ़ पुलिस के आला अधिकारी का कहना है बच्चों की सुरक्षा पर अभिभावकों को विशेष ध्यान देना होगा। हालांकि, पुलिस विभाग भी पोस्टर, बैनर और पम्फलेट के सहारे बच्चों के अभिभावकों को इस बारे में जागरूक करेगी।
2- पीसीआर पर तैनात जवानों की ड्यूटी सुबह और शाम पार्कों के आसपास लगाई जाएगी। इससे वे पूरे क्षेत्र की निगरानी कर सकेंगे। इससे अपराधियों के मन में डर बना रहेगा।

ये जरूर ध्यान रखें
1-बच्चों को अकेला बाहर न भेंजे।
2-बच्चों को उनके साथियों के भरोसे पर बाहर न भेजे।ं
3-बच्चों को अनजान लोगों से मिलने, उनकी दी हुई चीजों को खाने से रोकें।
4- बच्चे यदि बाहर जाने की जिद करें, तो जहां तक संभव हो खुद जाएं या किसी अन्य बड़े को भेजें।

चाइल्ड हेल्पलाइन से मोहाली के लोग अनजान

No Safety in Parks of Childrens, Be Aware

शहर को राज्य सरकार वर्ल्ड क्लास सिटी के रूप में विकसित कर रही है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक प्रत्येक की सेवा में जिला पुलिस तैयार रहने का दावा करती है। पुलिस द्वारा कई सुविधाएं भी लोगों को दी जा रही है, लेकिन लोग अभी तक इसके बारे में अनजान है।

ताजा मामला पुलिस द्वारा बच्चों की सुरक्षा के लिए चलाई गई 1090 चाइल्ड हेल्पलाइन का है। करीब दो साल पहले ये सेवा पुलिस ने शुरू की है, लेकिन तब से इक्का दुक्का ही फोन ही हेल्पलाइन पर आए। छह महीने में बच्चों की समस्याओं से जुड़ा कोई फोन हेल्पलाइन पर नहीं आया है।

दूसरी ओर अन्य मामलों से जुड़ी कॉल हेल्पलाइन पर जरूर आती हैं। सबसे ज्यादा कॉल पति-पत्नी के मामलों से जुड़ी समस्याओं की होती हैं। पुलिस जानकारों की माने तो जब भी कोई हादसा व घटना होती है, तो लोग सीधे 100 नंबर पर ही शिकायत दर्ज करवाते हैं। शहर में यदि बच्चों से जुड़ी कोई समस्या होती है तो भी लोगों के दिमाग में सौ नंबर आता है। किसी का इस तरफ ध्यान जाता ही नहीं है।

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