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हरियाणा में लोकायुक्त के पास नहीं कोई शक्तियां, न स्वत: संज्ञान ले सकते और न कार्रवाई का अधिकार
Tue, 30 Jul 2019 09:28 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 30 Jul 2019 09:28 AM IST
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फाइल फोटो
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हरियाणा में गठन के वर्षों बाद भी लोकायुक्त को जरूरी शक्तियां नहीं मिल पाई हैं। सालाना रिपोर्ट में ऐसा होने के परिणाम साफ दिखाई पड़े। भ्रष्टाचार पर प्रहार के लिए लोकायुक्त तो बिठा दिए गए, लेकिन सीधे कार्रवाई करने का अधिकार आज तक नहीं मिल पाया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश व हरियाणा के लोकायुक्त नवल किशोर अग्रवाल ने सोमवार को राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य को वर्ष 2018-2019 की वार्षिक रिपोर्ट सौंपी।
इसमें सालाना लेखा-जोखा के साथ एक बार फिर लोकायुक्त को पर्याप्त शक्तियां दिए जाने का उल्लेख किया गया है। अपनी पिछली रिपोर्ट में भी लोकायुक्त ने सरकार से कार्रवाई केलिए उचित अधिकार मांगे थे, लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। अग्रवाल की सौंपी रिपोर्ट में एक अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 तक का वार्षिक ब्यौरा दिया गया है। लोकायुक्त ने राज्यपाल को भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए वर्ष भर में उठाए गए कदमों की भी विस्तार से जानकारी दी।
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इसमें सालाना लेखा-जोखा के साथ एक बार फिर लोकायुक्त को पर्याप्त शक्तियां दिए जाने का उल्लेख किया गया है। अपनी पिछली रिपोर्ट में भी लोकायुक्त ने सरकार से कार्रवाई केलिए उचित अधिकार मांगे थे, लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। अग्रवाल की सौंपी रिपोर्ट में एक अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 तक का वार्षिक ब्यौरा दिया गया है। लोकायुक्त ने राज्यपाल को भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए वर्ष भर में उठाए गए कदमों की भी विस्तार से जानकारी दी।
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याद रहे कि प्रदेश में लोकायुक्त के पास जांच के बाद सिर्फ कार्रवाई की सिफारिश का अधिकार है। उनकी सिफारिश पर विभाग एक्शन टेकन रिपोर्ट तक समय पर नहीं भेजते। आज तक लोकायुक्त की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट पर कितना अमल हुआ, ये जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पाई है। लोकायुक्त कार्यालय में स्टाफ भी पर्याप्त नहीं है। कुल 70 पदों में से लगभग 30 पर ही स्थायी नियुक्तियां हैं। अनेक पद रिक्त पड़े हैं, जबकि कुछ पदों पर अनुबंधित स्टाफ काम कर रहा है।
लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल भी मध्यप्रदेश के लोकायुक्त की तर्ज पर शक्तियां मुहैया कराने की मांग कर चुके हैं। लोकायुक्त को अपनी जांच एजेंसी चाहिए, फैसले को मानने के लिए सरकारी विभाग बाध्य हों, अवमानना पर दंडित और स्वत संज्ञान पर केस दर्ज करने जैसी शक्तियों की भी दरकार है। सबसे पहले पूर्व लोकायुक्त जस्टिस प्रीतम पाल सिंह ने भी अपनी तमाम वार्षिक रिपोर्ट में अधिकार प्रदान करने और बजट में वृद्धि करने की मांग उठाई थी।
लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल भी मध्यप्रदेश के लोकायुक्त की तर्ज पर शक्तियां मुहैया कराने की मांग कर चुके हैं। लोकायुक्त को अपनी जांच एजेंसी चाहिए, फैसले को मानने के लिए सरकारी विभाग बाध्य हों, अवमानना पर दंडित और स्वत संज्ञान पर केस दर्ज करने जैसी शक्तियों की भी दरकार है। सबसे पहले पूर्व लोकायुक्त जस्टिस प्रीतम पाल सिंह ने भी अपनी तमाम वार्षिक रिपोर्ट में अधिकार प्रदान करने और बजट में वृद्धि करने की मांग उठाई थी।