'आप' की सुनामी में हरियाणा के दिग्गज ढेर
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का सपना संजोए प्रदेश के दिग्गज नेताओं का हौसला आम आदमी पार्टी ने पस्त कर दिया। हरियाणा से सटे सभी विधानसभा क्षेत्रों में हरियाणा भाजपा नेताओं के लाख प्रयास के बावजूद (आप) अपना दम दिखा गई। लिहाजा हरियाणा की खट्टर सरकार के नेताओं का जादू दिल्ली के रण में चलने से रह गया।
सौ दिन की उपलब्धियों पर खुश हो रही सरकार के लिए दिल्ली चुनाव के नतीजे किसी सदमे से कम नहीं हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता जो इस आस में बैठे थे कि दिल्ली चुनाव की परफारमेंस के नतीजे आने के बाद हरियाणा में भी रेवड़ियां बटेंगी। उनकी उम्मीदों को भी बड़ा झटका लगा है।
भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके दिल्ली विधानसभा चुनाव में हरियाणा भाजपा के नेताओं के अलावा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी करीब एक सप्ताह का समय दिया है। मुख्यमंत्री का फोकस जहां पंजाबी सीटों पर रहा, वहीं राम बिलास शर्मा को ब्राह्मण मतों, बिरेंद्र सिंह और ओम प्रकाश धनखड़ को जाट मतदाताओं को लुभाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
इसके अलावा यादव मुतदाताओं के लिए राव इंद्रजीत सिंह और गुर्जर मतो के लिए कृष्णपाल गुर्जर जैसे नेता चुनाव में दिन-रात एक किए थे, लेकिन आप के आगे इन दिग्गजों का जादू नहीं चल सका।
डेढ़ दर्जन सीटों की थी जिम्मेदारी
हरियाणा के नेताओं दिल्ली केसाथ लगती करीब डेढ़ दर्जन सीटों को जितवाने की जिम्मेदारी दी गई थी। हरियाणा के साथ लगते दिल्ली के क्षेत्र की जिम्मेदारी यह सोच कर दी गई थी कि यहां पर हरियाणा का प्रभाव रहेगा, लेकिन यह समीकरण भी फेल हो गए।
रिटायरमेंट की उम्र भी बनी चुनावी मुद्दा
हरियाणा में कर्मचारियों की उम्र 60 से घटाकर 58 वर्ष किया जाना भी दिल्ली के चुनाव में मुददा बन है। आम आदमी पार्टी ने हरियाणा सरकार के इस निर्णय का उलटा प्रचार भाजपा के खिलाफ यह कह कर किया कि दिल्ली में भी सरकार यही निर्णय लागू करेगी। इसके बाद मोदी को भी जनता को स्पष्टीकरण देना पड़ा था।
दिल्ली की हार के कारण पार्टी को दिल्ली में ही तलाशने होंगे। हरियाणा सरकार को बने अभी सौ दिन हुए हैं।
अनिल विज, स्वास्थ्य मंत्री, हरियाणा