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बच्चों की नींव खोखली: क्यों 15-17 साल के किशोर बन रहे क्रिमिनल? अपराध और शिक्षा के बीच चौंकाने वाला ट्रेंड

Tue, 18 Mar 2025 02:44 PM IST
अंकेश ठाकुर रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Tue, 18 Mar 2025 02:44 PM IST
सार

कम उम्र के किशोर अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं। अपराध के इस दलदल में 15 से 17 साल के किशोर ज्यादा फंस रहे हैं। इसकी कई वजह हो सकती हैं, लेकिन कमजोर बुनियादी शिक्षा के कारण बच्चे न तो सही पढ़ नहीं पा रहे हैं। 

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No detention policy undermines children basic education they become criminals at age of 15-17 Chandigarh news
Teenager, crime, child demo - फोटो : freepik

विस्तार

बिना परीक्षा में फेल किए 8वीं तक प्रमोट करने की नीति का असर अब स्कूलों में दिखने लगा है। नौवीं कक्षा में फेल होने वाले छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई स्कूलों में आधे से ज्यादा बच्चे पास नहीं हो पा रहे। कमजोर बुनियादी शिक्षा के कारण बच्चे न तो सही से अंग्रेजी पढ़ पा रहे हैं और न ही आसान गुणा-भाग कर पा रहे हैं। एनसीआरबी के आंकड़े बता रहे हैं कि अब यही वर्ग सबसे ज्यादा अपराध में लिप्त पाया जा रहा है।

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आठवीं कक्षा तक छात्रों को पास करने की बाध्यता वाली नो-डिटेंशन पॉलिसी ने बच्चों की बुनियादी शिक्षा को कमजोर कर दिया है। 8वीं तक बच्चा कुछ न भी लिखे तो भी मजबूरन स्कूलों को छात्र को अगली कक्षा में प्रमोट करना पड़ता है। नतीजा यह हो रहा है कि जब वे नौवीं कक्षा में पहुंचते हैं तो बड़ी संख्या में छात्र फेल हो जाते हैं। अमर उजाला की पड़ताल में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सरकारी स्कूलों के रिजल्ट के आंकड़ों के अनुसार नौवीं में फेल होने वाले छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई स्कूलों में यह संख्या 35-45 फीसदी तक पहुंच चुकी है। 
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9वीं फेल बच्चों को कोचिंग देने वाले शिक्षक मनोज शुक्ला ने बताया कि उनके पास हर साल 9वीं में कई बच्चे फेल होकर आते हैं। वो सबसे पहले उनकी नॉलेज चेक करते हैं। हैरानी की बात है कि नौवीं के कई बच्चों को ठीक ढंग से अंग्रेजी तक नहीं पढ़ने आती। वो साधारण गुणा-भाग तक करने में असमर्थ होते हैं। हिंदी भी खराब हैं। पहले बच्चों को दूसरी-तीसरी कक्षा जैसी पढ़ाई करानी पड़ती है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि नो डिटेंशन पॉलिसी ने बच्चों की शैक्षणिक नींव को कमजोर कर दिया। बिना मजबूत बुनियादी शिक्षा के 9वीं और 10वीं में पहुंचने वाले कई छात्र बोर्ड परीक्षाओं के डर से या कमजोर प्रदर्शन के चलते पढ़ाई छोड़ देते हैं।

अपराध और शिक्षा के बीच एक चौंकाने वाला ट्रेंड

चंडीगढ़ में अपराध और शिक्षा के बीच एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। एनसीआरबी की पीएसआई 2022 रिपोर्ट के अनुसार कुल 832 अंडर ट्रायल कैदियों में 347 कैदी 10वीं से कम पढ़े लिखे हैं लेकिन ये अनपढ़ नहीं हैं। ये करीब 42 फीसदी है। वहीं, कुल 363 दोषी कैदियों में से 133 ने 10वीं से कम पढ़ाई की हैं। ये 36.6 फीसदी है। संभवतः ये नो डिटेंशन पॉलिसी की वजह से 8वीं पास हैं लेकिन कभी 10वीं नहीं पास कर पाए। यही वर्ग अब सबसे ज्यादा अपराध में लिप्त पाया जा रहा है। रिपोर्ट ने उजागर किया है कि बिना मजबूत नींव के आगे बढ़ने वाले छात्र ही अधिक संख्या में अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं।

समाधान क्या हो सकता है? 

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, नो-डिटेंशन पॉलिसी को पूरी तरह समाप्त किए बिना इसमें कुछ आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं। प्रत्येक कक्षा में छात्रों का मूल्यांकन किया जाए और आवश्यकतानुसार उन्हें अतिरिक्त कक्षाएं दी जाएं। प्राथमिक कक्षाओं में ही गणित, विज्ञान और भाषा पर विशेष ध्यान दिया जाए। माता-पिता को भी बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाए। शिक्षकों को भी नई शिक्षण विधियों से अवगत कराते हुए उनकी ट्रेनिंग कराई जाए।

सेक्टरों के कुछ स्कूलों में 9वीं कक्षा में फेल बच्चों की संख्या 

स्कूल                         2023-24 2022-23 2021-22 2020-21 2019-20 2018-19
जीएमएसएसएस-56         78          73          4        10         139         184
जीएमएसएसएस-20         63         32           39       21         60           52
जीएमएसएसएस-25         32        23            15       66          87           81
जीएमएसएसएस-44बी       41        34           29        29           36           44
जीएमएसएसएस-28डी       34        49           18           0          26          24            

गांव-कालोनियों के कुछ स्कूलों में 9वीं कक्षा में फेल बच्चों की संख्या

स्कूल                          2023-24 2022-23 2021-22 2020-21 2019-20 2018-19
जीएचएस-हल्लोमाजरा             120      123      71         76          145        190
जीएमएचएस-मलोया 2             104       84       76         17          48             --
जीएमएचएस-धनास आरसी 2       74       83        80         40          90           150
जीएमएसएसएस-खुड्डा अलीशेर    48       81        54          27          89          33
जीएमएसएसएस-धनास              44        64         --          69          109        109

एनसीआरबी-पीएसआई 2022 के आंकड़ों के अनुसार

अंडर ट्रायल कैदी -कुल 832
अनपढ़ - 113
10वीं से नीचे - 347
10वीं से ऊपर लेकिन ग्रेजुएट नहीं - 274
ग्रेजुएट - 67
टेक्निकल डिग्री - 27
पोस्ट ग्रेजुएट – 4

दोषी कैदी - कुल 363
अनपढ़ - 78
10वीं से नीचे - 133
10वीं से ऊपर लेकिन ग्रेजुएट नहीं -106
ग्रेजुएट - 31
टेक्निकल डिग्री - 9
पोस्ट ग्रेजुएट - 6

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