हरियाणा के 8 जिलों में 900 एकड़ फसल राख: सरकार ने मांगी रिपोर्ट, नमी में 2% की मिल सकती है छूट; विपक्ष बोला...
विपक्षी पार्टियों ने आग व बारिश के कारण किसानों को हुए नुकसान के मुआवजे की मांग सरकार से उठाई है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि प्रदेश में फसलों के खराब होने की सभी घटनाओं का संज्ञान लेकर सरकार किसानों को मुआवजा देकर भरपाई करें।
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हरियाणा के आठ जिलों में खेतों में गेहूं की खड़ी फसल को लगी आग के मामलों पर सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को कृषि विभाग से रिपोर्ट मांगी है। इसमें पूछा है कि आग कब, कहां और कितनी एकड़ में लगी और घटनाओं की वजह क्या है। गेहूं में यह आग शुक्रवार रात को आई आंधी से बिजली के तारों में शार्ट-सर्किट होने से लगी।
इससे प्रदेश में 900 एकड़ फसल जल गई। अकेले झज्जर में 200 एकड़ व कुरुक्षेत्र में 57 एकड़ फसल राख हो गई। यहां आग की चपेट में आने से कई पशु भी जल गए। इसके अलावा, जींद, कुरुक्षेेत्र, यमुनानगर, हिसार, सिरसा, भिवानी और फतेहाबाद जिले में आग लगने से 100 एकड़ गेहूं की फसल गईं। झज्जर मफसल जलने से नाराज किसानों ने जाम लगाया और मुआवजा मांगा। आग की घटनाओं के बाद शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने खेतों में जाकर बर्बाद हुई फसलों का आकलन भी किया।
इसके अलावा, सरकार गेहूं खरीद में दो फीसदी नमी में छूट दे सकती है। इसका कारण विभिन्न जिलों में दो दिन तक हुई बूंदाबांदी है। बारिश से खेतों व मंडियों में खुले में पड़ी फसल भीग गई है, इसलिए नमी की ज्यादा शिकायत मिल रही है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से अनुरोध करके सरकार जल्द छूट का एलान कर सकती है। अभी किसानों को केवल 12 फीसदी की छूट है।
सरकार ने सभी जिलों के डीसी, मंडी बोर्ड, कृषि विभाग और खाद्य एवं आपूर्ति विभाक के अधिकारियों के निर्देश दिए हैं कि मंडियों में आने वाले गेहूं के एक-एक दाने की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद सुनिश्चित की जाए। प्रदेश की सभी 417 मंडियों में भी अतिरिक्त इंतजाम करने को भी कहा है।
उठान ने नहीं पकड़ी तेजी : 52.40 लख मीट्रिक टन पहुंचा, 16.44 ही उठा
मंडियों में उठान अभी भी धीमी है। शनिवार शाम तक कुल 52.40 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) गेहूं की आवक हो चुकी है, जबकि मात्र 16.44 एलएमटी गेहूं ही उठ पाई है। विभिन्न एजेंसियां 45.43 एलएमटी गेहूं खरीद चुकी हैं। सरकार का दावा है कि 2,65,064 किसानों को 2498 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं।
आवक की रफ्तार तेज, उठान धीमा...अब आगे यह समस्या
सरकार ने मंडियों में गेहूं की खरीद जल्द तो शुरू करवा दी पर खरीद एजेंसियों की तैयारियों पर निगरानी नहीं रखी। इसी लापरवाही के कारण एजेंसियों की तरफ से मंडी लेबर कांट्रेक्टर (एमएलसी) और मंडी ट्रांसपोर्ट कांट्रेक्टर (एमटीसी) की तैयारी के बगैर मंडी में गेहूं की खरीद शुरू कर दी, जोकि तकरीबन एक सप्ताह से ज्यादा उठान में देरी हो गई। अभी 22 से 24 एलएमटी गेहूं की आवक अनुमानित है।
विपक्ष ने उठाई आग व बारिश से बर्बाद हुए गेहूं के मुआवजे की मांग
विपक्षी पार्टियों ने आग व बारिश के कारण किसानों को हुए नुकसान के मुआवजे की मांग सरकार से उठाई है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि प्रदेश में फसलों के खराब होने की सभी घटनाओं का संज्ञान लेकर सरकार किसानों को मुआवजा देकर भरपाई करें। वहीं, इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने कहा कि सरकार ने किसानों को जल्द मुआवजा नहीं दिया तो पार्टी सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ेगी।
हुड्डा ने कहा कि किसान का अनाज कहीं भी सुरक्षित नहीं है। मंडियां गेहूं से अटी पड़ी हैं, जिससे किसान सड़कों पर अपनी फसल रखने को मजबूर हैं। सरकार 25 फीसदी से ज्यादा गेहूं की उठान नहीं करवा सकी है। भाजपा सरकार ने ना बारदाने की व्यवस्था की, ना तिरपाल और ना ही उठान। मौसम के पूर्वानुमान के बावजूद सरकार ने गेहूं को पानी से बचने के लिए उचित प्रबंध नहीं किया।
उधर, इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने कहा कि धूल भारी आंधी और बारिश से कई जिलों में लाखों टन फसल खराब हो गई है। किसानों के 30 लाख टन से अधिक गेहूं की उठान नहीं हुई है। वहीं, आग की चपेट में आकर करीब 1000 एकड़ से अधिक फसल पूरी तरह से जल गई है। पीएम नरेंद्र मोदी की रैली के लिए किसानों को उनकी फसल का मुआवजा दिया जा सकता है, तो आग व बारिश से हुए नुकसान के लिए भी मुआवजा दिया जाए।