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NGT का कड़ा रुख: चंडीगढ़ पेरीफेरी में निर्माण पर सख्ती, प्रशासन से जवाब तलब, नियमों का उल्लंघन स्वीकार नहीं

Sat, 07 Feb 2026 11:28 AM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Sat, 07 Feb 2026 11:28 AM IST
सार

एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने कहा है कि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। न्यायाधिकरण ने चंडीगढ़ प्रशासन और पंजाब सरकार से पेरिफेरी क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर जवाब तलब करते हुए अगली सुनवाई पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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NGT strict stance on illegal constructions in the Chandigarh periphery
अवैध निर्माण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के पेरीफेरी एरिया में तेजी से हो रहे अवैध निर्माण और उससे पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने कहा है कि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। न्यायाधिकरण ने चंडीगढ़ प्रशासन और पंजाब सरकार से पेरिफेरी क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर जवाब तलब करते हुए अगली सुनवाई पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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यह मामला चंडीगढ़ और उससे सटे पंजाब के पेरीफेरी इलाकों में अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों से जुड़ा है, जिनका सीधा असर वन क्षेत्रों, जल स्रोतों, ग्रीन बेल्ट और इको-सेंसिटिव जोन पर पड़ रहा है। मामले की सुनवाई एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यदि यह पाया गया कि निर्माण गतिविधियां पर्यावरणीय मानकों और नियमों के विपरीत हैं तो संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश
यह याचिका काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स व अन्य की ओर से एनजीटी में दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चंडीगढ़ और पंजाब की राज्य प्राधिकरणों की ढिलाई के कारण पेरीफेरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध और अनियोजित निर्माण हो रहा है। सुनवाई के दौरान पंजाब और चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा जिसे एनजीटी ने स्वीकार कर लिया। न्यायाधिकरण ने निर्देश दिए कि पेरीफेरी क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों, उनके स्वरूप और पर्यावरणीय प्रभाव को रिकॉर्ड पर लिया जाए ताकि उस पर समुचित निर्णय लिया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को होगी।
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कृषि भूमि पर रेस्टोरेंट, नाइट क्लब और व्यावसायिक गतिविधियां चल रहीं
चंडीगढ़ और उससे सटे पंजाब के पेरीफेरी इलाकों में अवैध निर्माण का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। चंडीगढ़ की सीमा में आने वाले किशनगढ़, खुड्डा लाहौरा, कैंबावाला और खुड्डा जस्सू, जबकि पंजाब के मिर्जापुर, कांसल, नयागांव, जयंती माजरी, करौरां, सिसवां और नाडा जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। इन इलाकों में कृषि भूमि पर बिना भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) के फार्म हाउस, गेस्ट हाउस और अन्य ढांचे खड़े कर दिए गए हैं। कई स्थानों पर कृषि भूमि पर ही रेस्टोरेंट, नाइट क्लब और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। बड़े फार्म हाउस शादी-विवाह और आयोजनों के लिए किराये पर दिए जा रहे हैं, जिससे न केवल भूमि उपयोग नियमों का उल्लंघन हो रहा है बल्कि भूजल दोहन, हरियाली कटान और जल निकासी बाधित होने जैसी समस्याएं भी गंभीर रूप ले रही हैं।

ढीली पड़ती प्रशासनिक कार्रवाई
हालांकि, चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से समय-समय पर कार्रवाई भी की गई है। हाल ही में चंडीगढ़ एस्टेट ऑफिस ने सेक्टर-1 के चंडीगढ़ क्लब परिसर में करीब 6 से 7 एकड़ में बने अवैध स्ट्रक्चर को ध्वस्त किया था। इसके अलावा पेरिफेरी क्षेत्रों में भी कुछ अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई लेकिन यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। बड़ी संख्या में मामलों में डीसी कार्यालय और एसडीएम कोर्ट में सुनवाई लंबित है जबकि इस दौरान अवैध निर्माण लगातार बढ़ता जा रहा है।

चंडीगढ़ के भू-रिकॉर्ड और ग्रीन बेल्ट पर खतरा
चंडीगढ़ के कुल क्षेत्रफल में 10,672.16 एकड़ भूमि आवासीय उपयोग में है, जबकि 1,339.73 एकड़ वाणिज्यिक क्षेत्र के तहत आती है। परिवहन के लिए 2,046.1 एकड़, औद्योगिक उपयोग के लिए 1,326.5 एकड़ और सार्वजनिक व अर्ध-सार्वजनिक उपयोग के लिए 2,968.79 एकड़ भूमि चिह्नित है। इसके अलावा 2,113.97 एकड़ वन भूमि, 277.29 एकड़ ग्रीन बेल्ट और 302.33 एकड़ जल एवं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के अंतर्गत आती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पेरीफेरी क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर समय रहते रोक नहीं लगी तो ग्रीन बेल्ट और वन भूमि पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।


सुखना झील पर भी मंडरा रहा खतरा
पेरीफेरी क्षेत्र में हो रहे निर्माण का सीधा असर सुखना झील पर भी पड़ रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सुखना झील को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि झील का गला घोंटा जा रहा है। कोर्ट ने झील के कैचमेंट एरिया में हो रहे कंक्रीट निर्माण को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था। कभी सीमित और नियंत्रित विकास वाला यह इलाका अब अनियंत्रित निर्माण का शिकार होता जा रहा है, जिससे झील और उसके आसपास का पर्यावरण खतरे में है। एनजीटी की सख्ती से उम्मीद जगी है कि पेरीफेरी क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर लगाम लगेगी और पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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