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लोगों को तोहफा, हाउसिंग बोर्ड ने दी नीड बेस्ड चेंज को मंजूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 01 Jan 2016 10:05 AM IST
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चंडीगढ़ की जनता को नये साल का पहला तोहफा। दरअसल हाउसिंग बोर्ड ने स्टैंडर्ड साइज के हिसाब से नीड बेस्ड चेंज को मंजूरी दे दी है।
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बोर्ड ने अलग-अलग योजनाओं के तहत रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन और सोसायटियों को नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी का लाभ उठाने के लिए सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1960 में रजिस्ट्रेशन करवाने के भी आदेश दिए हैं। अलॉटियों के लिए हाउसिंग बोर्ड ने यह फैसला किया है कि जिन मकानों में लिफ्ट लगाना संभव होगा, उन मकानों में लोग लगवा सकेंगे।
मकानों में परिवर्तन करने संबंधी चंडीगढ़ प्रशासन की वेबसाइट पर स्टैंडर्ड डिजाइन अपलोड किया गया है। बोर्ड के अलॉटी बेवसाइट से डिजाइन डाउनलोड कर उसके निर्देशानुसार अतिरिक्त निर्माण करवा सकते हैं।
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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और सोसायटी के फ्लैट्स में जरूरत के अनुसार बदलाव करने की मंजूरी के साथ बोर्ड ने विशेष हिदायतें भी दी हैं। सीएचबी की ओर से नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी को मंजूरी देते हुए बदलाव करने को लेकर अलग-अलग डिजाईन नमूने के तौर पर वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं।
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इसके आधार पर जरूरत होने पर फ्लैट के मालिक और सोसायटी हाउसिंग बोर्ड की मंजूरी के साथ अपने फ्लैट में आवश्यक बदलाव कर सकेंगे। 13 प्रकार के बदलाव को वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि सीएचबी के सभी श्रेणियों की फ्लैट्स में नक्शे के आधार पर ही लिफ्ट के प्रावधान को मंजूरी दी जाएगी। बोर्ड की ओर से आर्डर नंबर 163 और 178 में जारी निर्देश में कोई बदलाव नहीं किए जाने की भी बात स्पष्ट की गई है।
न्यू नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी के अनुसार आवश्यकता आधारित परिवर्तन के लिए पहले हाउसिंग बोर्ड या प्रशासन प्रमाणित इंजीनियरिंग कंपनी या हाउसिंग बोर्ड से अनुमति लेनी होगी।
सीएचबी अलाटियों को रजिस्टर्ड एजेंसी होना आवश्यक
हाउसिंग बोर्ड ने यह भी तय किया है कि अलॉटियों की नीड बेस्ड या किसी भी अन्य मांगों को पर तभी फैसला लिया जाएगा जब वह मांग रजिस्टर्ड रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन की होंगी। बोर्ड ने अलॉटियों से कहा है कि वह चुनाव करवाकर आरडब्ल्यूए का गठन करें और उसके बाद आवंटियों और सोसायटियों को निष्पक्ष चुनाव कराकर सोसायटी व रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन को पंजीकृत करवाएं।
बोर्ड ने सोसायटियों को तीन महीने में (31 मार्च 2016 तक) अपने आरडब्ल्यूए का निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराकर इसका रजिस्ट्रेशन कराएं। पंजीकृत आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधियों की मांगें ही स्वीकार की जाएंगी।