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ये आई नई तकनीक जो घुटना कर देगी ठीक

Fri, 10 Jan 2014 01:13 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 10 Jan 2014 01:13 AM IST
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new technology which will fix the knee

भारत में घुटनों की बीमारी आम हो गई है। घुटना ट्रांसप्लांट के आंकड़ों में लगातार इजाफा हो रहा। विशेषज्ञों का दावा है कि ट्रांसप्लांट के बाद भी 15-20 प्रतिशत मरीज संतुष्ट नहीं हो पाते।

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चलते-फिरते, सीढ़ियां चढ़ते-उतरते उन्हें अहसास होने लगता है कि उनके शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग बनावटी या अप्राकृतिक है, लेकिन अब इसका भी हल निकल आया है।
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मैक्स हास्पिटल के मैक्स एलीट इंस्टीट्यूट आफ आर्थोपेडिक्स एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के डायरेक्टर डा. मनुज वधवा ने वीरवार को दावा किया कि सात साल की मेहनत के बाद बाद एट्यून नी सिस्टम लांच किया गया है।
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भारत में पहला एट्यून नी सिस्टम चंडीगढ़ के मैक्स हास्पिटल में लगाया गया है। इसके लगाने के बाद मरीज को प्राकृतिक घुटने का अहसास हो रहा है।

यह स्थिरता और आराम को बढ़ाता है। एट्यून एक कस्टमाइज्ड नी सिस्टम है, जो शरीर के साथ मेल खाता है। उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद मरीज आराम से उठ बैठ सकता है।

सीढ़ियां चढ़ सकता है। उसे पता ही नहीं चलेगा कि उसका घुटना ट्रांसप्लांट हुआ है। इसमें करीब दो लाख रुपये का खर्चा आता है।

इसलिए जरूरी है एट्यून सिस्टम
डा. वधवा के मुताबिक करीब 20 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जो बताते हैं कि प्रेशर पड़ने पर उन्हें महसूस होता है कि कहीं उनका इंप्लांट बाहर न निकल जाए।

खासकर सीढ़ियां चढ़ते वक्त व उतरते वक्त। कई मरीजों ने यह भी शिकायत की है कि ज्यादा घिसाई के बाद इंप्लांट मलबे जैसे लगते हैं। इससे लोगों की परेशानी बढ़ जाती है।


ऐसे बचाएं अपने घुटने को
1. वजन को नियंत्रित करे
2. मीठा, एल्कोहल, तली चीजो से बचे
3. रेगुलर वॉक करे
4. धीमी स्पीड में साइक्लिंग करे
5. पल्थी मारकर कम बैठे

यदि शुरुआत में ही किसी स्पेशलिस्ट से दिखाएं तो इस मर्ज से छुटकारा मिल सकता है। बाजार में अब कई दवाएं और इंजेक्शन मौजूद हैं। घुटना ट्रांसप्लांट में एट्यून नी सिस्टम सबसे लेटेस्ट तकनीक है। यह सच में एक क्रांति है।
- डा. मनुज वधवा, डायरेक्टर, मैक्स इलीट इंस्टीट्यूट आफ आर्थोपेडिक्स

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