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अनोखी तकनीकः हवा में फैले कोरोना का सफाया करेगा मच्छर मार रैकेट, नाम मिला 'एबीसीडी' का
Wed, 15 Jul 2020 10:32 AM IST
खुशबू गोयल
अमित शर्मा, मोहाली
अमित शर्मा, मोहाली
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 15 Jul 2020 10:32 AM IST
सार
- मोहाली के वैज्ञानिक डॉ. सम्राट घोष ने तकनीक को दिया एबीसीडी का नाम
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च के साइंटिस्ट आए आगे
- केंद्र सरकार को लिखा पत्र, महामारी से बचाने के लिए काफी फायदेमंद
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कोरोना का सफाया करेगा मच्छर मार रैकेट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। अब यह हवा में घुलकर अब अपना दायरा बढ़ा रहा है। संकट की इस घड़ी में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च मोहाली के साइंटिस्ट डॉ. सम्राट घोष आगे आए हैं। उनके मुताबिक, घरों में मच्छर मारने के लिए प्रयोग किए जाने वाले रैकेट से कोरोना का हवा में एनकाउंटर किया जा सकता है।
उन्होंने इसे पोर्टेबल मोबाइल कोरोना डिस्चार्ज बताया है और इसे एबीसीडी यानी एयर बोर्न कोरोना डिस्ट्रायर नाम दिया है। उन्होंने इस संबंध में भारत सरकार को पत्र भी भेजा है। डॉ. सम्राट के मुताबिक, मास्क लगाकर हम कोरोना से बच सकते हैं। लेकिन जब अपने घर या दफ्तर में हों तो हवा में तैर रहे कोरोना से कैसे बचें। इसे लेकर उन्होंने काफी रिसर्च की। इसका हल फिजिक्स की कोरोना डिस्चार्ज थ्योरी में दिखा।
इसके बाद उनके दिमाग में घरों में मच्छर आदि मारने के लिए प्रयोग होने वाले रैकेट का ख्याल आया। उन्होंने बताया कि रैकेट में सबसे पहले कोरोना डिस्चार्ज (साढ़े तीन हजार वोल्टेज) तैयार किया जाता है। जब हवा में मौजूद ऑक्सीजन इस कोरोना डिस्चार्ज के संपर्क में आती है तो यही ऑक्सीजन ओजोन में परिवर्तित हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओजोन सीधे कोरोना का एनकाउंटर करने में सक्षम है।
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उन्होंने इसे पोर्टेबल मोबाइल कोरोना डिस्चार्ज बताया है और इसे एबीसीडी यानी एयर बोर्न कोरोना डिस्ट्रायर नाम दिया है। उन्होंने इस संबंध में भारत सरकार को पत्र भी भेजा है। डॉ. सम्राट के मुताबिक, मास्क लगाकर हम कोरोना से बच सकते हैं। लेकिन जब अपने घर या दफ्तर में हों तो हवा में तैर रहे कोरोना से कैसे बचें। इसे लेकर उन्होंने काफी रिसर्च की। इसका हल फिजिक्स की कोरोना डिस्चार्ज थ्योरी में दिखा।
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इसके बाद उनके दिमाग में घरों में मच्छर आदि मारने के लिए प्रयोग होने वाले रैकेट का ख्याल आया। उन्होंने बताया कि रैकेट में सबसे पहले कोरोना डिस्चार्ज (साढ़े तीन हजार वोल्टेज) तैयार किया जाता है। जब हवा में मौजूद ऑक्सीजन इस कोरोना डिस्चार्ज के संपर्क में आती है तो यही ऑक्सीजन ओजोन में परिवर्तित हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओजोन सीधे कोरोना का एनकाउंटर करने में सक्षम है।
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बाथरूम में सबसे ज्यादा कोरोना का खतरा
डॉ. सम्राट के मुताबिक, विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना का ज्यादा खतरा बाथरूम में होता है। ऐसे में जरूरी है कि बाथरूम को साफ रखें। बाथरूम में मच्छर मारने वाले रैकेट को करीब पांच मिनट हवा में घुमाएं। उसके संपर्क में आने से वहां मौजूद वायरस खत्म हो जाएगा। इसके बाद वहां एग्जास्ट फैन चलाकर छोड़ दें। जो चीज ओजोन में परिवर्तित हुई होगी, वह आसानी से बाहर निकल जाएगी। साथ ही कोरोना का खतरा खत्म हो जाएगा। यह तकनीक हम घर, दुकान व अन्य जगह प्रयोग कर सकते हैं। यह काफी किफायती है। मात्र सौ से डेढ़ सौ रुपये में यह बाजार में उपलब्ध है।
कई आविष्कार कर चुके हैं साइंटिस्ट
डॉ. सम्राट इससे पहले पॉल्यूशन फ्री ग्रीन पटाखे तैयार कर चुके हैं। इससे जहां आग लगने का खतरा नहीं होता है। वहीं लोगों को किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। वहीं इस माध्यम से लोगों को रोजगार दिया जा सकता है। इसी तरह जैसे कोरोना ने दस्तक दी थी, उस समय उन्होंने नाक लंगोट व महिलाओं के लिए डोर वेल तकनीक तैयार की थी।
कई आविष्कार कर चुके हैं साइंटिस्ट
डॉ. सम्राट इससे पहले पॉल्यूशन फ्री ग्रीन पटाखे तैयार कर चुके हैं। इससे जहां आग लगने का खतरा नहीं होता है। वहीं लोगों को किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। वहीं इस माध्यम से लोगों को रोजगार दिया जा सकता है। इसी तरह जैसे कोरोना ने दस्तक दी थी, उस समय उन्होंने नाक लंगोट व महिलाओं के लिए डोर वेल तकनीक तैयार की थी।