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हरियाणा: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विश्वविद्यालयों में होंगे नए शोध, छह अंतर संकाय शोध केंद्र स्थापित होंगे
Sun, 13 Mar 2022 11:49 AM IST
ajay kumar
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 13 Mar 2022 11:49 AM IST
सार
मुख्यमंत्री मनोहर लाल को उम्मीद है कि ये केंद्र समय के साथ देश के अग्रणी शोध संस्थानों के रूप में उभरेंगे। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता आर्थिक विकास के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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जलवायु परिवर्तन (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा सरकार जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए विश्वविद्यालयों में शोध कराएगी। ये शोध विवि में चल रहे मौजूदा संकायों से अलग होंगे। इसके लिए सरकार विश्वविद्यालय में जल, वायु, पृथ्वी, जंगल और ऊर्जा क्षेत्र के छह अंतर संकाय शोध केंद्र स्थापित करेगी। छठा अंतर विषय केंद्र कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया और प्रौद्योगिकी पर अनुसंधान करेगा।
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सरकार ने इस तरह के शोध को बढ़ावा देने का खाका तैयार कर लिया है। 2022-23 में इसकी शुरुआत कर दी जाएगी। शोध के जरिये कृषि और जीवनयापन के साधनों पर पड़ रहे जलवायु परिवर्तन के अप्रत्याशित प्रभाव से निपटा जाएगा। नए अंतर संकाय शोध केंद्र उच्च शिक्षण संस्थानों से शोधकर्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करेंगे। केंद्रों की स्थापना व शोध के लिए बजट का प्रावधान सरकार मुहैया कराएगी। इस कार्य के लिए विश्वविद्यालयों कर चयन प्रतिस्पर्धा के आधार पर किया जाएगा। इसमें सरकारी और निजी विवि प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
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अग्रणी शोध संस्थानों के रूप में उभरेंगे केंद्र: मनोहर
मुख्यमंत्री मनोहर लाल को उम्मीद है कि ये केंद्र समय के साथ देश के अग्रणी शोध संस्थानों के रूप में उभरेंगे। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता आर्थिक विकास के लिए गंभीर चिंता का विषय है। प्रदेश सरकार ने इसे अपने सतत विकास लक्ष्यों में शामिल किया है। जलवायु क्रियाशीलता पर सरकार बल दे रही है। हमें अपने विवि में इस तरह के विषयों पर नए शोध को बढ़ावा देने की जरुरत है। इस दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाए हैं। नए वित्त वर्ष में कार्ययोजना को धरातल पर उतारा जाएगा।
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10 हाईटेक नर्सरियों में सब स्वचालित होगा
प्रदेश सरकार नए वित्त वर्ष में 10 हाईटेक नर्सरियां विकसित करेगी। इनमें स्वचालित तरीके से जलवायु नियंत्रण, ग्रीन हाउस, पॉली हाउस, रूट ट्रेनर सुविधाएं, जर्मिनेशन बेड, वनस्पति प्रसार सुविधाएं, सिंचाई और उर्वरक सुविधाएं होंगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरे साल गुणवत्ता वाली पौध तैयार की जा सकेगी।