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कप्तान के आते ही सरकारी भर्तियों पर संकट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 13 Aug 2014 10:38 PM IST
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हरियाणा में नए राज्यपाल के पद ग्रहण करने के साथ ही सरकार के सामने संकट खड़े होने शुरू हो गए हैं। राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में चल रही भर्ती पर संकट के बादल छा गए हैं।
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हरियाणा राजभवन की ओर से जारी किए गए निर्देशों के बाद ऐसा हुआ है। इस सदंर्भ में राज्यपाल के समक्ष कुछ लोगों ने शिकायत की थी। जिसके बाद यह निर्णय लिया गया है। इसके अलावा राज्य में रेडक्रास सोसायटी में की जाने वाली नियुक्तियों पर भी राज्यपाल ने रोक लगा दी है। गर्वनर रेडक्रास के चयेरमैन है।
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आशंका जताई जा रही थी कि सरकार कुछ लोगों को चुनाव से पहले इन पदों पर एडजस्ट कर सकती थी। मालूम हो की रेवाड़ी के मीरपुर विश्वविद्यालय में नियुक्तियों को लेकर कुछ प्रोफेसरों ने राज्यपाल से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि भर्ती प्रक्रिया में क्षेत्र और जाति के हिसाब से हो रही हैं। उधर, राजभवन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अब विधानसभा चुनाव के बाद ही विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के आसार हैं।
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हालांकि सरकारी तंत्र ने यह तर्क दिया है कि बिना स्टाफ के विभिन्न संकाय की कक्षाओं को चलाने में दिक्कत आ रही है। साथ ही यह भी तर्क दिया जा रहा है कि आचार संहिता से पहले यह भर्तियां होनी जरूरी हैं, लेकिन अभी तक के हालातों को देखते हुए अब यह भर्तियां चुनाव के बाद ही होती नजर आ रही हैं।
उधर,स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने टीचिंग और नान टीचिंग स्टाफ की भर्ती रोकने के फैसले का स्वागत किया है।
अहिरवाल के नेताओं को झटका:
भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद सबसे ज्यादा झटका अहिरवाल के नेताओं को लगेगा। जिनके यहां स्थानीय लोग आवेदन लेकर आ रहे थे। पिछले दिनों सरकार के साथ मान मनव्वल के खेल में उक्त नेता ने इस भर्ती में अपने क्षेत्र के नेताओं को रखवाने की वकालत की थी।