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Punjab election 2022: हवा का रुख भांप रहे डेरा समर्थक, सियासी खमोशी ने बढ़ाई राजनीतिक दलों की चिंता
Fri, 11 Feb 2022 01:49 AM IST
ajay kumar
सुशील कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)
सुशील कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 11 Feb 2022 01:49 AM IST
सार
राम रहीम की फरलो ने सियासी दलों को चिंता में डाल दिया है। वोटबैंक के खिसकने की आशंका से अकाली दल सीधे तौर पर इसे भाजपा की चाल बता रहा है। अन्य दल भी इस प्रकरण को लेकर भाजपा पर सवाल उठा रहे हैं। जबकि आम आदमी पार्टी इस मामले में बयान देने से बच रही है।
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राम रहीम
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
राम रहीम के फरलो पर जेल से बाहर आते ही डेरा समर्थकों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। अनुयायी अपने स्तर पर एक दूसरे से संपर्क साध कर मुख्यालय में हो रही गतिविधियों की जानकारी हासिल कर रहे हैं। डेरा समर्थक सीमित संख्या में एकत्र होकर हालात पर चर्चा कर रहे हैं। अनुयायियों में खुशी की लहर है लेकिन उनकी ‘सियासी खामोशी’ ने तमाम राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।
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डेरा अनुयायी फिलहाल सियासी हवा का रुख भांप रहे हैं और मुख्यालय से अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी तरफ विभिन्न राजनीतिक दल, डेरामुखी की फरलो को मुद्दा बनाकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साध रहे हैं। इस प्रकरण को भाजपा की चाल बताकर उस पर सियासी लाभ लेने के आरोप लग रहे हैं। इस संबंध में डेरा सिरसा के ब्लाक अध्यक्ष शैबर सिंह ने कहा कि सियासी तौर पर कोई फैसला नहीं हुआ है। डेरामुखी का जो भी आदेश होगा उसका पालन हर हाल में किया जाएगा। मतदान से कुछ समय पहले कोई फैसला हो सकता है। उन्होंने कहा कि डेरे की ओर से अतिरिक्त गतिविधियां नहीं की जा रही हैं।
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मालवा की अधिकांश सीटों पर बन सकते हैं नए समीकरण
डेरा फैक्टर का प्रभाव समूचे मालवा इलाके में हैं और समर्थकों का रुख मालवा की अधिकांश सीटों पर नए समीकरण को जन्म दे सकता है। इससे किसी एक दल का नहीं बल्कि अलग-अलग सीटों पर अलग-अलग दलों का संतुलन बिगड़ सकता है। कडे़ मुकाबले वाली सीटों पर बड़ा उलटफेर होने के अनुमान है।
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मालवा के बठिंडा, मानसा, संगरूर, बरनाला, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब समेत अन्य जिलों में डेरा सिरसा के लाखों की संख्या में अनुयायी हैं। डेरे के सियासी विंग एक इशारे में सियासी हवा का रुख बदलने की क्षमता रखता है और समर्थकों का मिजाज किसी भी राजनीतिक दल पर भारी पड़ सकता है। डेरा समर्थक हर विस सीट पर 20 से 30 हजार वोट को प्रभावित करने का दावा करते हैं।