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Hindi News ›   Chandigarh ›   New Name Anamika to Heirless Founded Girl Child

और '26' बन गई अनामिका, जानिए कैसे

Mon, 17 Feb 2014 08:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Mon, 17 Feb 2014 08:10 PM IST
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New Name Anamika to Heirless Founded Girl Child
कालका के रेलवे क्वार्टर के पास मिली बच्ची को अब अनामिका के नाम से पहचानी जाएगी। यह बच्ची 26 जनवरी को मिली थी, इसलिए नर्सों ने उसका नाम ‘26’ रख दिया था।
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जनरल अस्पताल में उपचाराधीन इस बच्ची को इसी नाम से पुकारा जाता था, लेकिन बाद में नर्सों को यह नाम अच्छा नहीं लगा। उसकी मासूमियत नर्सों को इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने नाम बदलकर अनामिका रख दिया।
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अब यही नाम शिशु गृह में भी रजिस्टर्ड होगा। सोमवार को जनरल अस्पताल पहुंचे जिला बाल कल्याण अधिकारी बीरेंद्र सिंह यादव ने भी इसकी पुष्टि की है।

वार्ड की नर्स पूनम सैनी ने बताया कि इतनी प्यारी बच्ची को 26 बुलाना अच्छा नहीं लगता। इसलिए उसे अनामिका का नाम दिया गया।

वहीं, निकू वार्ड में ड्यूटी पर तैनात मेडिकल आफिसर डा. संध्या ने बताया कि जब से पूनम ने इसका नाम अनामिका रखा है। धीरे-धीरे वार्ड के सभी स्टाफ इसे अनामिका के नाम से पुकारने लगे हैं। अब तो सबकी चहेती बन चुकी है गुड़िया अनामिका।
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नारियल तेल के मसाज से साफ्ट हुई स्किन
नर्स पूनम ने बताया कि पहले बच्ची का स्किन काफी रफ थी। उसके लिए नारियल का तेल लेकर आई और अब रोजाना इसी तेल से उसकी मालिश करती हैं। इससे अब उसकी स्किन साफ्ट हो चुकी है।

हर तीन दिन बाद उसे नहलाया जाता है। इंटर्न ज्योति और ललिता की निकू वार्ड में जब तक ड्यूटी रहती है, वे भी इस बच्ची का खास खयाल रखती हैं। बच्ची को हर दो घंटे पर 30-40 एमएल दूध दिया जा रहा है।

एक फुंसी से बना बड़ा जख्म
डा. संध्या ने बताया कि जब बच्ची को अस्पताल लाया गया था तो उसके पैर पर एक फुंसी थी। बाद में वह जख्म बन गया और धीरे-धीरे बड़ा जख्म हो गया। अब रोजाना उसकी ड्रेसिंग की जा रही है। जख्म ठीक होने में अभी समय लग सकता है।

स्टाफ नर्स भी लेना चाहती है गोद
सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल की नर्स अनीता ने भी अनामिका को गोद लेने की इच्छा जताई है। अनीता ने बताया कि अनामिका की देखरेख करते-करते अब वह आदत में शुमार हो गई है। अगर एक दिन उसे नहीं देखती तो उसकी चिंता सताने लगती है।

सोमवार को ट्रेनिंग थी, लेकिन शाम को ट्रेनिंग से सीधा घर जाने के बजाय वह अनामिका को देखने अस्पताल पहुंची और साथ में उसके लिए दूध भी लेकर गई थी। उसे दूध पिलाने के बाद घर लौट गई।  

बच्ची का हालचाल जानने अस्पताल पहुंचे अफसर
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी पंचकूला के चेयरमैन देवेंद्र कुमार और जिला बाल कल्याण अधिकारी बीरेंद्र सिंह यादव भी बच्ची का हालचाल जानने के लिए अस्पताल पहुंचे। नर्सों को बच्ची को अनामिका नाम से पुकारते देखकर बीरेंद्र सिंह ने भी कहा कि बच्ची को इसी नाम से शिशु गृह में रजिस्टर्ड किया जाएगा।


अभी बच्ची पुलिस और अस्पताल प्रबंधन कमेटी के अंडर है। जब तक वह मेडिकली फिट नहीं हो जाती, अस्पताल में उसका उपचार चलता रहेगा। उसके बाद ही शिशु गृह भेजा जाएगा।
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