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न सिंडिकेट की बैठक होगी, न सीनेट चुनाव
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के अफसरों पर मनमानी करने के लग रहे आरोपों पर विराम लगाने के लिए जल्द ही चांसलर की ओर से एक कमेटी गठित की जा सकती है जो पीयू का संचालन करेगी। इस कमेटी के अध्यक्ष वीसी ही होंगे।
बताया जा रहा है कि इस कमेटी में 11 सदस्यों को जगह मिलेगी। यह सभी पीयू के शिक्षक व अधिकारी होंगे। हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर फाइनल मुहर नहीं लगी, लेकिन योजना बन रही है। यह कमेटी तब तक कार्य करेगी, जब तक सीनेट रिफॉर्म नहीं हो जाता या फिर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस नहीं आ जाता। सूत्रों का कहना है कि इस योजना के तहत तो न तो सिंडिकेट की दिसंबर में बैठक होगी और न सीनेट चुनाव का रास्ता साफ होगा।
लगभग दो माह से सीनेट चुनाव को लेकर घमासान चल रहा है। इसे लेकर आए दिन प्रदर्शन हो रहे हैं। कभी पूर्व सीनेटर तो कभी सिंडिकेट के सदस्य प्रदर्शन कर रहे हैं। वे प्रदर्शन के दौरान आरोप लगा रहे हैं कि वीसी मनमाने फैसले ले रहे हैं। यह बात ऊपर तक भी पहुंची है। सूत्रों का कहना है कि पीयू के उच्चाधिकारी चाहते हैं कि एक कमेटी का फिलहाल गठन हो जाए जो पीयू के संचालन के निर्णय लेगी। इस योजना पर 20 दिसंबर के बाद मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि उस समय सिंडिकेट का कार्यकाल भी लगभग खत्म होने वाला होगा। सिंडिकेट के रहते कमेटी मैदान में उतरकर शायद ही काम कर पाए। वहीं दूसरी ओर पीयू प्रशासन का रुख देखकर पूर्व सीनेटर, सिंडिकेट सदस्य, एनएसयूआई के कार्यकर्ता आगामी योजना बनाने में जुटे हैं।
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बताया जा रहा है कि इस कमेटी में 11 सदस्यों को जगह मिलेगी। यह सभी पीयू के शिक्षक व अधिकारी होंगे। हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर फाइनल मुहर नहीं लगी, लेकिन योजना बन रही है। यह कमेटी तब तक कार्य करेगी, जब तक सीनेट रिफॉर्म नहीं हो जाता या फिर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस नहीं आ जाता। सूत्रों का कहना है कि इस योजना के तहत तो न तो सिंडिकेट की दिसंबर में बैठक होगी और न सीनेट चुनाव का रास्ता साफ होगा।
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लगभग दो माह से सीनेट चुनाव को लेकर घमासान चल रहा है। इसे लेकर आए दिन प्रदर्शन हो रहे हैं। कभी पूर्व सीनेटर तो कभी सिंडिकेट के सदस्य प्रदर्शन कर रहे हैं। वे प्रदर्शन के दौरान आरोप लगा रहे हैं कि वीसी मनमाने फैसले ले रहे हैं। यह बात ऊपर तक भी पहुंची है। सूत्रों का कहना है कि पीयू के उच्चाधिकारी चाहते हैं कि एक कमेटी का फिलहाल गठन हो जाए जो पीयू के संचालन के निर्णय लेगी। इस योजना पर 20 दिसंबर के बाद मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि उस समय सिंडिकेट का कार्यकाल भी लगभग खत्म होने वाला होगा। सिंडिकेट के रहते कमेटी मैदान में उतरकर शायद ही काम कर पाए। वहीं दूसरी ओर पीयू प्रशासन का रुख देखकर पूर्व सीनेटर, सिंडिकेट सदस्य, एनएसयूआई के कार्यकर्ता आगामी योजना बनाने में जुटे हैं।
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