अमृतसर ट्रेन हादसाः पत्नी के पक्ष में उतरे नवजोत सिद्धू, रेलवे पर डाली जिम्मेदारी, दाग दिए कई सवाल
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जौड़ा फाटक रेल हादसे के बाद पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने पहली बार एक चैनल पर आकर सफाई दी है। उन्होंने अपनी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू का बचाव करते हुए रेलवे के कंधों पर सारी जिम्मेदारी डाल दी है। सिद्धू ने कहा कि पुलिस कमिश्नर ने रावण दहन के लिए परमिशन दी थी, लेकिन परमिशन ग्राउंड के अंदर रावण दहन किया गया। जिस जगह हादसा हुआ है, वह कार्यक्षेत्र रेलवे के दायरे में आता है, जीआरपी से लेकर आरपीएफ तक सब रेलवे के अधीन है, ऐसे में वहां जुटी भीड़ को क्यों नहीं हटाया गया।
उनकी पत्नी वहां चीफ गेस्ट थी, उनको एक नहीं 6 कार्यक्रमों में जाना था। दशहरे के दिन यह उनका शायद पांचवां कार्यक्रम था, जहां से वह निकले, रास्ते में उन्हें यह सूचना मिली कि यहां हादसा हो गया है तो तुरंत पुलिस कमिश्नर को फोन किया और अस्पताल में पहुंचकर घायलों के इलाज में लग गईं। इस दौरान वह साउथ में थे।
वह 7:30 बजे बेंगलुरू पहुंचे तो पता चला कि जौड़ा फाटक पर हादसा हो गया है। जिसके बाद वह यहां पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल राजनीति करने में जुटे हैं। लेकिन वह लाशों पर राजनीति नहीं करते। इसलिए अधिक कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने कहा कि बाहिबल कलां कांड में सुखबीर बादल ने क्यों नहीं लोगों के घर जाकर हाल-चाल पूछे।
सिद्धू ने उठाए सवाल
नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि रेलवे की टॉप ट्रेन लोगों को कुचलकर गुजरती हुई निकली। हेड लाइट क्यों नहीं थी। हेडलाइट होती तो 3 किलोमीटर पहले ही लोगों को पता चल जाता कि सामने से ट्रेन आ रही है। एक गाय भी ट्रेन से कट जाती है तो ट्रेन को रोका जाता है। जो ट्रेन 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है वह 110 किलोमीटर की रफ्तार से क्यों निकली।
सिद्धू ने कहा कि फाटक पर गेटमैन होता है, 300 मीटर दूर तैनात खड़े गेटमैन की कोई जिम्मेदारी नहीं। ट्रेन चालक की कोई जिम्मेदारी नहीं। रेलवे की पुलिस है, रेलवे की प्रोटक्शन फोर्स है, वह क्या कर रही थी। दशहरा की स्टेज से भी कई बार लोगों को चेतावनी दी गई कि पटरी को खाली करवा दें। लेकिन रेलवे प्रशासन नहीं जागा।