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ड्रग्स रैकेटः मुसीबत में फंसे मजीठिया, इधर गिरफ्तारी की मांग, उधर बचाने की कोशिश

Sat, 17 Mar 2018 12:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 17 Mar 2018 12:32 PM IST
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navjot sidhu recommend enquiry of Majithia’s role in drug racket case
बिक्रमजीत सिंह मजीठिया - फोटो : file photo
ड्रग्स रैकेट में बिक्रम सिंह मजीठिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक ओर उन्हें गिरफ्तार करके जांच करने की मांग हो रही है, उधर बचाने की कोशिश की जा रही है। दरअसल, कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू ने ड्रग्स रैकेट की जांच को एसटीएफ की रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि इसमें मजीठिया की भूमिका की जांच की सिफारिश की गई है। एसटीएफ ने कहा है कि उसके पास मजीठिया के खिलाफ जांच शुरू करने को पर्याप्त सबूत हैं।
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सिद्धू और उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर ने अपने सरकारी आवास पर प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसटीएफ की 34 पेज की जांच रिपोर्ट मीडिया के सामने पेश की। उसके महत्वपूर्ण अंश पढ़ कर सुनाए। साथ ही अपनी ही सरकार से मांग की कि अब मजीठिया को गिरफ्तार कर जांच शुरू की जाए। सिद्धू ने कहा कि वह कई बार कह चुके हैं, चालीस विधायक लिख कर दे चुके हैं। लेकिन सीएम चाहते हैं कि पूरी तरह मजबूत सबूतों के बाद ही कार्रवाई की जाए।
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एसटीएफ ने एनफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट द्वारा की गई जांच और लिए बयानों को अपनी जांच का आधार बनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक मजीठिया कनाडा वासी सतप्रीत सत्ता, परमिंदर सिंह पिंदी को जानते थे। ये लोग पंजाब आते थे तो मजीठिया के घर पर रहते, उनकी गाड़ियों में घूमते, उन्हें सिक्योरिटी दी जाती। नशों के कारोबार में लिप्त लोगों के बीच कोई विवाद होता तो मजीठिया हल कराते। ऐसा जगदीश भोला और जगजीत चाहल ने ईडी को बयान में बताया है।
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भोला ने कहा कि चाहल और बिट्टू औलख पहले नशे के कारोबार में नही थे। मजीठिया की शादी के रिस्पेशन पर इन्हें सत्ता और पिंदी से मिला कर कहा गया कि एनआरआईज केसाथ डील करनी है। चाहल ने अपनी फार्मा फैक्ट्री में स्यूडोफेड्रीन बना कर इन्हें भेजी। चाहल ने ईडी को बयान दिया है कि उसने कई किस्तों में मजीठिया को 35 लाख रुपये दिए। एसटीएफ ने सिफारिश की है कि मजीठिया की मनी ट्रांजेक्शन की जांच की जाए।

रेत खनन में भी नाम
सिद्धू दंपति ने एसटीएफ की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि जगजीत चाहल ने ईडी को बयान दिया है कि बिक्रम मजीठिया, बोनी अजनाला, बिट्टू औलख और रोजी बरकंदी रेत खनन केकारोबार में भी लिप्त थे। रेत खनन और नशों के कारोबारों में एक-दूसरे केलगे पैसे की भी जांच की जानी चाहिए।

मजीठिया को बचाने में जुटी केंद्रीय एजेंसियां

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Bikram Singh Majithia - फोटो : File Photo
पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी की जांच में हाईकोर्ट के सीधे दखल के बावजूद यह बात सामने आ रही है कि इस मामले को रफा दफा करने के लिए केंद्रीय एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। एसआईटी द्वारा सीलबंद रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बावजूद हाईकोर्ट में इस मामले को उठा रहे वकील को हटाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।

यह मामला उजागर होते ही हाईकोर्ट द्वारा इस केस की जांच में जुटे अधिकारियों की सुरक्षा यकीनी बनाने के आदेश भी जारी किए हैं। पंजाब में नशा कारोबार में पकड़े गए तस्करों द्वारा बिक्रम सिंह मजीठिया समेत कई नेताओं के नाम सार्वजनिक किए जाने के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने मामले की जांच तो शुरू की, लेकिन जांच में किसी नेता पर आंच नहीं आने दी। इन हालात को देखते हुए हाईकोर्ट ने जांच का काम अपने अधीन एसआईटी के सुपुर्द कर दिया।

गत वर्ष मार्च में एसआईटी ने अपनी 1500 पेज की रिपोर्ट अदालत को सौंपी लेकिन उसमें किसी राजनेता का नाम शामिल नहीं किया। यह रिपोर्ट 17 महीने में 20 बड़े तस्करों के दर्जनों फोन व व्यक्तिगत कंप्यूटरों की जांच पर आधार पर तैयार की गई थी। इस एसआईटी का गठन अकाली-भाजपा शासन के दौरान किया गया था लेकिन इसने अपनी रिपोर्ट सूबे में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद मोहाली कोर्ट में पेश की। रिपोर्ट में कहा गया था कि 20 तस्करों में से 13 के खिलाफ अभियोग चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।

रिपोर्ट में इन तस्करों के नाम भी दिए गए

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बिक्रम सिंह मजीठिया - फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट में इन तस्करों के नाम भी दिए गए, जो इस प्रकार हैं- सतिंदर धम्मा पंचकूला, बलजिंदर सिंह उर्फ सोनू अमृतसर, जगदीश सिंह उर्फ भोला, पूर्व डीएसपी मोहाली, सरबजीत सिंह उर्फ साबा पूर्व सब इंस्पेक्टर अमृतसर, जगजीत सिंह चहल अमृतसर, मनिंदर सिंह औलख उर्फ बिट्टू अमृतसर, दीप सिंह उर्फ दीपू  पंचकूला, परमजीत सिंह उर्फ पम्मा अमृतसर, परमजीत सिंह चहल अमृतसर, सुरजीत सिंह दिल्ली, हरमिंदर सिंह जालंधर, देविंदर सिंह उर्फ हैप्पी  बठिंडा, अनिल चवन उर्फ रवि गोवा।

लेकिन अनूप सिंह काहलों के खिलाफ एसआईटी ने कोई टिप्पणी नहीं की। किसी राजनेता का नाम भी नहीं लिया गया। इसी हफ्ते जब ड्रग माफिया और बिक्रम मजीठिया के बीच संबंधों की जांच कर रही एसटीएफ के बाद ईडी ने भी हाईकोर्ट में अपनी सीलबंद रिपोर्ट सौंपी तो पंजाब सरकार ने भी इस मामले की जांच का काम दो सदस्यीय कमेटी को सौंपे जाने की बात कही। हाईकोर्ट ने भी इस मामले में ईडी, इनकम टैक्स और अन्य राष्ट्रीय व राज्य स्तर की एजेंसियों को सहयोग देने के आदेश जारी कर दिए।

लेकिन इसी बीच यह बात सामने आई कि सीनियर एडवोकेट को इस मामले से हटाने के लिए ईडी के निदेशक पर दबाव डाला जा रहा है, क्योंकि इसी सीनियर एडवोकेट ने गत नवंबर माह के दौरान मजीठिया और ड्रग माफिया के बीच संबंधों का मामला हाईकोर्ट से समक्ष उठाया था, जिस पर हाईकोर्ट ने जांच के आदेश जारी कर दिए थे। अब इसी सीनियर एडवोकेट के मामले से अलग करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों द्वारा ईडी निदेशक को लिखे गए पत्र भी कोर्ट को दिखाए गए, जिनमें ईडी निदेशक से कहा गया था कि वे उक्त सीनियर एडवोकेट से अलग हो जाएं।
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