इस्तीफे के बाद सिद्धू का वीडियो संदेश: अधिकारियों की नियुक्ति पर उठाए सवाल, कहा- इस तरह सिस्टम नहीं बदला जा सकता
नवजोत सिंह सिद्धू ने 72 दिन बाद ही मंगलवार को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। अचानक लिए इस फैसले से कांग्रेस नेतृत्व सकते में आ गया था। उनके इस्तीफे के कारण के बारे में कई कयास लगाए जा रहे थे। बुधवार को सिद्धू ने खुद सभी कयासों पर विराम लगा दिया।
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नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगाते हुए बुधवार को कहा कि उनकी किसी से कोई निजी लड़ाई नहीं है और उनकी लड़ाई सिर्फ पंजाब के मुद्दों को लेकर है, जिनके लिए वह समझौता नहीं कर सकते।
सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो के जरिए अपनी बात रखते हुए सिद्धू ने कहा- ‘मैंने 17 साल का राजनीतिक सफर एक मकसद के साथ किया है। पंजाब के लोगों के जीवन को बेहतर बनाना और मुद्दों पर कड़ा स्टैंड लेते हुए डटे रहना हमेशा मेरी प्राथमिकता रही है। पंजाब में मुद्दे अहम हैं और मैं उन पर अडिग हूं और रहूंगा।
पंजाब के मुद्दों की जंग लड़ने के लिए मैं हमेशा खड़ा रहूंगा और इससे कोई समझौता नहीं करूंगा। मैं न तो हाईकमान को गुमराह कर सकता हूं और न होने दे सकता हूं।’ सिद्धू ने कहा, ‘मैं हक और सच की लड़ाई लड़ता रहा हूं। इसमें पद या कद की कोई बात तो कभी थी ही नहीं। जिन मुद्दों को लेकर कांग्रेस पार्टी आवाज बुलंद करती रही है, वह आज गौण होते जा रहे हैं।
मैं आज देख रहा हूं कि मुद्दों से समझौता हो रहा है। छह साल पहले जिन लोगों ने बादलों को क्लीनचिट दी, उन्हें आज सरकार में जगह दी जा रही है। जिन्होंने ब्लेंकेट बेल दिलाई, उनको राज्य का एडवोकेट जनरल लगाया जा रहा है।’
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सिद्धू ने अपने तल्ख तेवर बरकरार रहते हुए कहा- ‘दागी अफसरों के सहारे सिस्टम को दोबारा खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। मां की कोख को चोट पहुंचाने वालों को पहरेदार नहीं बनाया जा सकता, इसलिए मैं अड़ूंगा भी लड़ूंगा भी। भले ही मुझे इसके लिए कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े।’
उल्लेखनीय है कि नवजोत सिद्धू द्वारा प्रदेश प्रधान पद से दिया गया इस्तीफा कांग्रेस हाईकमान ने मंजूर नहीं किया है और पंजाब कांग्रेस के नेताओं को मामला सुलझाने को कह दिया है। मंगलवार को सिद्धू के इस्तीफे के बाद ये अटकलें तेज हो गईं थीं कि नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा मंत्रिमंडल और प्रशासन में नियुक्तियों को लेकर सिद्धू की सलाह नहीं लिए जाने से नाराज होकर ही सिद्धू ने इस्तीफा दिया है। बुधवार को सोशल मीडिया पर उन्होंने लाइव वीडियो के जरिए अपनी बात, इस शेर के साथ खत्म की- ‘उसूलों को आंच आए तो टकराना जरूरी है, अगर जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है।’
जल्दी ही मिल-बैठकर मामले को सुलझा लेंगे: चन्नी
नवजोत सिंह सिद्धू के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफे पर बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा है कि पार्टी प्रधान ही सूबे का मुखिया होता है और मुखिया को परिवार में बैठकर बातचीत करनी चाहिए। जल्द ही यह मसला भी सुलझा लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने सिद्धू से फोन पर बात की है और उनसे कहा है कि पार्टी सुप्रीम होती है। जो गड़बड़ी उन्हें (सिद्धू को) महसूस हो रही है, उन पर बैठकर बात करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परगट सिंह और अन्य कई मंत्री सिद्धू से मिलने गए थे। सिद्धू द्वारा अप्रत्याशित तरीके से अपने पद से इस्तीफा देकर क्या पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा, इस सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नहीं, उनकी तरफ से ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा। बल्कि सिद्धू ने उन्हें (चन्नी) कहा है कि वह उन्हें मिलने का समय देंगे और बैठकर बातचीत करेंगे।
सिद्धू द्वारा बुधवार को सोशल मीडिया पर दिए बयान पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मिल बैठकर बात हो सकती है। अगर किसी नियुक्ति के कारण लोगों में गलत संदेश जा रहा है या कोई गलत नियुक्ति हो गई है तो उस पर फिर से विचार किया जा सकता है। चन्नी ने यह भी कहा कि जब तक वे मुख्यमंत्री हैं, सूबे में न तो कोई गलत काम होगा, न भ्रष्टाचार होगा और न ही माफिया बचेगा।