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'दो शरीर और एक आत्मा' दिलाएगी कांग्रेस को जीत, जानिए क्या कहते हैं समीकरण
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 29 Nov 2016 09:31 AM IST
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सिद्धू के चुनाव न लड़ने के क्या हैं मायने?
भाजपा को अलविदा कहने वाले पूर्व सांसद नवजोत सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर और पूर्व हॉकी स्टार परगट सिंह सोमवार को कांग्रेस में शामिल हो गए। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में दोनों विधायकों ने कांग्रेस का दामन थामा। प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह, पंजाब इंचार्ज आशा कुमारी और पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने उनका पार्टी में स्वागत किया।
नवजोत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में ज्वाइन करने की संभावना पर डॉ. नवजोत कौर ने कहा कि इस मौके पर वह कुछ नहीं कह सकतीं, लेकिन वह और उनके पति दो शरीर और एक आत्मा हैं। अब आत्मा कब तक शरीर के बिना रह सकती है। उन्होंने कहा कि वह बिना शर्त कांग्रेस ज्वाइन कर रही हैं, उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, निभाएंगी। पटियाला की रहने वाली डॉ. नवजोत कौर 2012 में भाजपा के टिकट पर अमृतसर ईस्ट से विधायक बनी थीं।
इस साल अक्तूबर में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। जबकि, परगट सिंह जालंधर कैंट से शिअद के टिकट पर विधायक बने थे, उन्होंने सितंबर में इस्तीफा दे दिया था। विधानसभा के 16 नवंबर को हुए विशेष सत्र में दोनों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान परगट के कई समर्थक भी कांग्रेस में शामिल हुए। जिनमें जसपाल वडै़च, मनिंदर बावा, अशविंदर पाल सिंह, हरजिंदर सिंह, कैप्टन आरपीएस कंग, बलदेव सिंह शामिल थे।
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नवजोत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में ज्वाइन करने की संभावना पर डॉ. नवजोत कौर ने कहा कि इस मौके पर वह कुछ नहीं कह सकतीं, लेकिन वह और उनके पति दो शरीर और एक आत्मा हैं। अब आत्मा कब तक शरीर के बिना रह सकती है। उन्होंने कहा कि वह बिना शर्त कांग्रेस ज्वाइन कर रही हैं, उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, निभाएंगी। पटियाला की रहने वाली डॉ. नवजोत कौर 2012 में भाजपा के टिकट पर अमृतसर ईस्ट से विधायक बनी थीं।
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इस साल अक्तूबर में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। जबकि, परगट सिंह जालंधर कैंट से शिअद के टिकट पर विधायक बने थे, उन्होंने सितंबर में इस्तीफा दे दिया था। विधानसभा के 16 नवंबर को हुए विशेष सत्र में दोनों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान परगट के कई समर्थक भी कांग्रेस में शामिल हुए। जिनमें जसपाल वडै़च, मनिंदर बावा, अशविंदर पाल सिंह, हरजिंदर सिंह, कैप्टन आरपीएस कंग, बलदेव सिंह शामिल थे।
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डॉ. नवजोत कौर और परगट सिंह के कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद दोनों की सीटों पर सियासी समीकरण बदलने की उम्मीद है। परगट सिंह कह चुके हैं कि दोनों अपनी-अपनी सीटों से ही लड़ेंगे, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही जालंधर कैंट से जगबीर बराड़ को उम्मीदवार घोषित कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी उन्हें नकोदर या शाहकोट से लड़ा सकती है। वहां परंपरागत दावेदार नहीं हैं। डॉ. नवजोत कौर को अमृतसर ईस्ट की जगह किसी और सीट से लड़ाया जा सकता है। क्योंकि यहां से कांग्रेस के सुनील दत्ती दावेदार हैं।
उधर कहा जा सकता है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने भी अपना मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। यह बात जगजाहिर है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तनातनी रही है और सिद्धू ने अभी कांग्रेस में शामिल न होकर बता भी दिया कि वह कैप्टन की प्रधानगी में नहीं रहेंगे। कांग्रेस के लिए सिद्धू दंपति को टिकट देना संभव नहीं था। इसलिए पत्नी तो आज कांग्रेस में शामिल हो गईं लेकिन सिद्धू खुद कब औपचारिक तौर पर कांग्रेस का हाथ थामेंगे यह किसी को नही पता।
वहीं, आम आदमी पार्टी को जाहिर तौर इससे घाटा होगा। उसके पास अभी भी सिख चेहरा नहीं है जिसे सीएम के तौर पर पेश कर सके। नवजोत सिद्धू के तौर पर 'आप' को एक सिख चेहरा मिल सकता था। खैर, यदि चुनाव कैंपेन के दौरान सिद्धू ने 'आप' को निशाना बनाया तो 'आप' को नुकसान होना भी तय है।
उधर कहा जा सकता है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने भी अपना मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। यह बात जगजाहिर है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तनातनी रही है और सिद्धू ने अभी कांग्रेस में शामिल न होकर बता भी दिया कि वह कैप्टन की प्रधानगी में नहीं रहेंगे। कांग्रेस के लिए सिद्धू दंपति को टिकट देना संभव नहीं था। इसलिए पत्नी तो आज कांग्रेस में शामिल हो गईं लेकिन सिद्धू खुद कब औपचारिक तौर पर कांग्रेस का हाथ थामेंगे यह किसी को नही पता।
वहीं, आम आदमी पार्टी को जाहिर तौर इससे घाटा होगा। उसके पास अभी भी सिख चेहरा नहीं है जिसे सीएम के तौर पर पेश कर सके। नवजोत सिद्धू के तौर पर 'आप' को एक सिख चेहरा मिल सकता था। खैर, यदि चुनाव कैंपेन के दौरान सिद्धू ने 'आप' को निशाना बनाया तो 'आप' को नुकसान होना भी तय है।