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राष्ट्रीय खेल दिवस: खेलों में पुरानी शान बहाल करने की रेस में पंजाब अब भी पीछे, हॉकी ही बचा रही है लाज

Thu, 29 Aug 2024 01:21 PM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 29 Aug 2024 01:21 PM IST
सार

पंजाब सरकार पंजाब खेलों को बढ़ावा देने के लिए नया एक्ट भी लेकर आ रही है, जिसके तहत अब खेल एसोसिएशनों में खिलाड़ियों को ही प्रतिनिधित्व दिया जाएगा, ताकि प्रदेश से अच्छे खिलाड़ी तैयार करने में मदद मिले।

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National Sports Day: Punjab is still behind in the race to restore its old glory in sports
हॉकी - फोटो : PTI

विस्तार

पंजाब सरकार प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर काम करने का दावा कर रही है, ताकि राज्य के खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाकर अच्छा प्रदर्शन कर सकें। इस मकसद के लिए सरकार नई खेल नीति लेकर आई, जिसमें खेलों को प्रफुल्लित करने और आधारभूत ढांचे को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

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मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी व इनामी राशि में भी बढ़ोतरी की गई। इसी तरह राज्य व जिला स्तर पर खेल गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। अब एक हजार खेल नर्सरियां स्थापित करने की भी तैयारी है, ताकि गांव स्तर तक ही खिलाड़ियों को तैयार किया जा सके। इसके बावजूद अभी भी प्रदेश में खिलाड़ियों के लिए ढांचागत सुविधाओं की कमी है।

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दो ओलंपिक में हॉकी ने ही बचाई लाज

यही कारण है कि बड़े मुकाबलों के लिए प्रदेश से अधिक खिलाड़ी नहीं निकल पा रहे हैं। टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में भी दोनों बार हॉकी की टीम ने लाज बचाई, जो देश के लिए मेडल लेकर आई। इस टीम में दोनों बार ही पंजाब के खिलाड़ी शामिल थे। टोक्यो ओलंपिक में पंजाब के 19 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जबकि हॉकी के 11 खिलाड़ी ही मेडल लाने में सफल रहे। इसी तरह पेरिस ओलंपिक में भी पंजाब से 19 खिलाड़ी हिस्सा लेने पहुंचे और जबकि सिर्फ हॉकी की टीम ही मेडल ला पाई। यह 52 साल में पहली बार है कि हॉकी की टीम लगातार दो बार मेडल जीतकर आई है। इससे पहले लगातार दो बार पदक 1968 में मैक्सिको और 1972 में म्यूनिख में जीते गए थे।

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अगर राष्ट्रीय खेलों की बात की जाए तो उसमें भी पंजाब का प्रदर्शन गिरा है। वर्ष 2015 के राष्ट्रीय खेलों में पंजाब ने शानदार प्रदर्शन किया था। केरल में हुए इन खेलों में पंजाब ने कुल 93 पदक जीते थे। इसमें 27 गोल्ड, 34 सिल्वर और 32 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके बाद वर्ष 2020 में राष्ट्रीय खेल होने थे, लेकिन कोविड के चलते ये खेल स्थगित कर दिए गए थे और बाद में इनको रद्द करना पड़ा था। यही वजह है कि फिर वर्ष 2022 में गुजरात में राष्ट्रीय खेल आयोजित किए गए। इनमें पंजाब सिर्फ 76 पदक जीत पाया था। गोल्ड मेडल पर सबसे अधिक असर पड़ा था और ये कम होकर 19 रह गए थे, जबकि 32 सिल्वर व 25 ब्रॉन्ज मेडल आए थे।

एशियन गेम्स में पंजाब ने तोड़ा रिकॉर्ड 

इसी तरह पिछले साल हांगझोऊ में संपन्न हुए एशियाई खेलों में पंजाब के खिलाड़ियों ने 72 साल का रिकॉर्ड तोड़कर अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया था। मुकाबले में सूबे के खिलाड़ियों ने 8 स्वर्ण, 6 रजत और 5 कांस्य पदकों के साथ कुल 19 पदक अपने नाम किए थे। एशियाई खेलों में हिस्सा लेने गए 48 पंजाबी खिलाड़ियों को तैयारी के लिए पंजाब सरकार ने प्रति खिलाड़ी 8 लाख रुपये के हिसाब के साथ कुल 4.64 करोड़ रुपये दिए थे। एशियाई खेलों के 72 वर्षों के इतिहास में पंजाब के खिलाड़ियों ने इससे पहले सबसे अधिक स्वर्ण पदक 1951 में नई दिल्ली और 1962 में जकार्ता एशियाई खेलों में क्रमश: 7-7 स्वर्ण पदक जीते थे। वर्ष 2023 में यह रिकॉर्ड तोड़ते हुए पंजाब के खिलाड़ियों ने 8 स्वर्ण पदक जीते हैं।

खेल नीति लाने का मकसद 

सरकार पिछले वर्ष खेल नीति लेकर आई थी, जिसमें गांवों और शहरों में कोच और खेल माहिरों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया था, ताकि ये कोच माहिर प्राथमिक प्रशिक्षण, एथलेटिक्स, खेलों, फिटनेस में सही दिशा दे सकें। इसमें हर शहर, टाउन व गांव में चार किलोमीटर के दायरे में एक खेल मैदान बनाने पर जोर दिया गया, ताकि जमीनी स्तर पर ही खिलाड़ियों को उचित सुविधाएं मिल सकें। अभी फिलहाल इस नीति के तहत काफी काम होना बाकी है।

अब खेल नर्सरियों से खिलाड़ी तैयार करेगी सरकार 

पंजाब खेल विभाग के निदेशक आनंद कुमार ने बताया कि 260 खेल नर्सरियां काम लगभग पूरा कर लिया है। साथ ही इन खेल नर्सरियों के लिए कोच व सुपरवाइजर की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो गई। तीन माह के अंदर वह इन खेल नर्सरियों को अलग-अलग जिलों में शुरू कर देंगे। इससे गांव स्तर पर ही 6 से 17 वर्ष की आयु के खिलाड़ी तैयार किए जाएंगे। सरकार की कुल एक हजार खेल नर्सरियां स्थापित करने की योजना है। पहले चरण में ये 260 नर्सरियां स्थापित की जा रही हैं।
 

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