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'गाय अगर माता है तो मां का दान कैसे हो सकता है?'
रिशु राज सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 30 Oct 2017 09:14 AM IST
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National Seminar on Nationalism and Culture
- फोटो : अमर उजाला
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प्रगतिशील लेखक संघ और पंजाब कला परिषद की ओर से राष्ट्रवाद और सभ्याचार विषय पर सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में आयोजित नेशनल सेमिनार का रविवार को समापन हो गया। आखिरी दिन राष्ट्रवाद और हाशिए पर समाज तो चौथे सेशन में राष्ट्रवाद मीडिया और फिल्मों के प्रभाव जैसे विषय पर गंभीरता से चरचा की गई।
इस मौके पर पश्चिम बंगाल के सीनियर जर्नलिस्ट गीतेश शर्मा ने कहा कि लोग धर्म को लेकर बहुत ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। जब तक धर्म की जड़ें गहरी होंगी, क्रांति नहीं आ सकती। परिवर्तन तो आएगा। पंजाब में कभी रोटी के नाम पर दंगा नहीं होता। यहां इतने किसान आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन उनके हक में कोई दंगा नहीं होता, जबकि कोई असामाजिक तत्व धार्मिंक ग्रंथ की बेअदबी करे तो भारी दंगा हो जाता है। ये कैसी मानसिकता का शिकार हो गए हैं लोग।
गाय पर हो रहे विवादों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि गाय सबकी माता कैसे हो गईं? शास्त्रों में इस बात का कोई जिक्र नहीं हैं, बल्कि गाय का दान किया जाता है और अगर गाय माता है तो मां का दान कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक हम धर्म की बेड़ियों में जकड़े रहेंगे, तब तक देश का विकास संभव नहीं है। राधा-कृष्ण के प्रेम का सभी सम्मान करते हैं, लेकिन ऐसा सामान्य जीवन में होता है तो ऑनर किलिंग हो जाता है।
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इस मौके पर पश्चिम बंगाल के सीनियर जर्नलिस्ट गीतेश शर्मा ने कहा कि लोग धर्म को लेकर बहुत ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। जब तक धर्म की जड़ें गहरी होंगी, क्रांति नहीं आ सकती। परिवर्तन तो आएगा। पंजाब में कभी रोटी के नाम पर दंगा नहीं होता। यहां इतने किसान आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन उनके हक में कोई दंगा नहीं होता, जबकि कोई असामाजिक तत्व धार्मिंक ग्रंथ की बेअदबी करे तो भारी दंगा हो जाता है। ये कैसी मानसिकता का शिकार हो गए हैं लोग।
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गाय पर हो रहे विवादों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि गाय सबकी माता कैसे हो गईं? शास्त्रों में इस बात का कोई जिक्र नहीं हैं, बल्कि गाय का दान किया जाता है और अगर गाय माता है तो मां का दान कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक हम धर्म की बेड़ियों में जकड़े रहेंगे, तब तक देश का विकास संभव नहीं है। राधा-कृष्ण के प्रेम का सभी सम्मान करते हैं, लेकिन ऐसा सामान्य जीवन में होता है तो ऑनर किलिंग हो जाता है।
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देश में एक अलग तरह का राष्ट्रवाद पैदा हो गया है
National Seminar on Nationalism and Culture
देश में एक अलग तरह का राष्ट्रवाद पैदा हो गया है
वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय ने कहा कि देश में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद एक अलग तरह का राष्ट्रवाद सुनाई दे रहा है। पहले भी हिंदुत्व की बातें हुआ करती थीं। अब बस फर्क यह आ गया है कि लोग हिंसा में उतर आए हैं। मिमिकरी आर्टिस्ट श्याम रंगीला का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब आर्टिस्टों को काम करने नहीं दिया जा रहा है। पहले कटाक्ष और आलोचना को लोग स्वीकारते थे, मगर अब बिलबिला उठते हैं। किसी की नकल करने पर उसे सेंसर कर दिया जाता है। श्याम रंगीला के उस वीडियो के प्रसारण पर रोक लगा दी गई, जिसमें उन्होंने पीएम की मिमिक्री की थी।
चंडीगढ़ में साहित्य के प्रति गजब की दीवानगी
प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव राजेंद्र राजन ने कहा कि पंजाब की धरती गुरुनानक से लेकर पाश और पीर-फकीरों की धरती है। राजन ने चुनौती देते हुए कहा कि आज के हालात को चुप रहकर नहीं देखेंगे। ये श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की धरती है। हम कलम से लिखते तो हैं पर जरूरत पड़ने पर उसे तलवार भी बना सकते हैं। चंडीगढ़ के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यहां के लोगों में साहित्य के प्रति गजब की दीवानगी हैं।
यहां ऐसे लोग हैं जो सिर कटा सकते हैं लेकिन झुका नहीं सकते। समापन के मौके पर बोलते हुए राजन ने कहा कि वह यहां से हौंसला, उम्मीद और दीवानगी लेकर जा रहे हैं। वहीं लेखक परिसंवाद के राष्ट्रीय संयोजक सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि देश में वर्तमान में अच्छे दिन, सबका साथ सबका विकास जैसा कुछ नहीं दिखाई देता। हमें मंथन करना होगा कि कारपोरेट जगत की हिंसा से कैसे देश की आर्थिकता और देश की सांझी संस्कृति को बचाया जाए।
वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय ने कहा कि देश में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद एक अलग तरह का राष्ट्रवाद सुनाई दे रहा है। पहले भी हिंदुत्व की बातें हुआ करती थीं। अब बस फर्क यह आ गया है कि लोग हिंसा में उतर आए हैं। मिमिकरी आर्टिस्ट श्याम रंगीला का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब आर्टिस्टों को काम करने नहीं दिया जा रहा है। पहले कटाक्ष और आलोचना को लोग स्वीकारते थे, मगर अब बिलबिला उठते हैं। किसी की नकल करने पर उसे सेंसर कर दिया जाता है। श्याम रंगीला के उस वीडियो के प्रसारण पर रोक लगा दी गई, जिसमें उन्होंने पीएम की मिमिक्री की थी।
चंडीगढ़ में साहित्य के प्रति गजब की दीवानगी
प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव राजेंद्र राजन ने कहा कि पंजाब की धरती गुरुनानक से लेकर पाश और पीर-फकीरों की धरती है। राजन ने चुनौती देते हुए कहा कि आज के हालात को चुप रहकर नहीं देखेंगे। ये श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की धरती है। हम कलम से लिखते तो हैं पर जरूरत पड़ने पर उसे तलवार भी बना सकते हैं। चंडीगढ़ के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यहां के लोगों में साहित्य के प्रति गजब की दीवानगी हैं।
यहां ऐसे लोग हैं जो सिर कटा सकते हैं लेकिन झुका नहीं सकते। समापन के मौके पर बोलते हुए राजन ने कहा कि वह यहां से हौंसला, उम्मीद और दीवानगी लेकर जा रहे हैं। वहीं लेखक परिसंवाद के राष्ट्रीय संयोजक सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि देश में वर्तमान में अच्छे दिन, सबका साथ सबका विकास जैसा कुछ नहीं दिखाई देता। हमें मंथन करना होगा कि कारपोरेट जगत की हिंसा से कैसे देश की आर्थिकता और देश की सांझी संस्कृति को बचाया जाए।
सवाल उठा- यह सेमिनार चंडीगढ़ में क्यों?
National Seminar on Nationalism and Culture
सवाल उठा- यह सेमिनार चंडीगढ़ में क्यों?
चौथे सेशन में राष्ट्रवाद मीडिया और फिल्म पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय ने कहा कि जब उन्हें इस कार्यक्रम की जानकारी मिली तो उनके दिमाग में पहला सवाल आया कि यह सेमिनार चंडीगढ़ में ही क्यों? फिर सोचा पंजाब में शायद इसलिए किया जा रहा है कि बाकी कहीं और करेंगे तो पिट जाएंगे। उत्तर प्रदेश, बिहार या कहीं और आयोजित किया जाता तो हंगामा हो जाता।
इसी पर सेमिनार के आखिर में बोलते हुए प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव राजेंद्र राजन ने कहा कि जब चारों और अंधेरा है तो सोचा कहां जाए, फिर दिमाग में आया कि उस धरती पर चलते हैं जहां गुरु गोबिंद सिंह, भगत सिंह और करतार सिंह सराभा जैसे महान योद्धा लड़े और अपने प्राण त्याग दिये। उन्होंने कहा कि साहित्यकार किसी से डरते नहीं हैं। ऐसे सेमिनार देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में डॉक्यूमेंट्री मेकर राहुल रॉय, फिल्म निर्माता सबा दीवान, जगदीश शर्मा, गीतेश शर्मा, इरा भास्कर, डा अमीर सल्ताना, कंवलजीत कौर ढिल्लो, स्वर्ण सिंह विर्क ने भी अपनी बात रखी।
चौथे सेशन में राष्ट्रवाद मीडिया और फिल्म पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय ने कहा कि जब उन्हें इस कार्यक्रम की जानकारी मिली तो उनके दिमाग में पहला सवाल आया कि यह सेमिनार चंडीगढ़ में ही क्यों? फिर सोचा पंजाब में शायद इसलिए किया जा रहा है कि बाकी कहीं और करेंगे तो पिट जाएंगे। उत्तर प्रदेश, बिहार या कहीं और आयोजित किया जाता तो हंगामा हो जाता।
इसी पर सेमिनार के आखिर में बोलते हुए प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव राजेंद्र राजन ने कहा कि जब चारों और अंधेरा है तो सोचा कहां जाए, फिर दिमाग में आया कि उस धरती पर चलते हैं जहां गुरु गोबिंद सिंह, भगत सिंह और करतार सिंह सराभा जैसे महान योद्धा लड़े और अपने प्राण त्याग दिये। उन्होंने कहा कि साहित्यकार किसी से डरते नहीं हैं। ऐसे सेमिनार देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में डॉक्यूमेंट्री मेकर राहुल रॉय, फिल्म निर्माता सबा दीवान, जगदीश शर्मा, गीतेश शर्मा, इरा भास्कर, डा अमीर सल्ताना, कंवलजीत कौर ढिल्लो, स्वर्ण सिंह विर्क ने भी अपनी बात रखी।