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राष्ट्रीय स्तर की मुक्केबाज पार्किंग में वाहनों की पर्ची काट रही

Sun, 08 Aug 2021 02:30 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 08 Aug 2021 02:30 AM IST
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National level boxer cutting the slip of vehicles in the parking
जांच करते सीएफएसएल और चंडीगढ़ पुलिसे के कर्मचारी।
चंडीगढ़। काश! इस खिलाड़ी को स्कॉलरशिप मिल गई होती तो वह भी पदक झटककर चंडीगढ़ के साथ-साथ देश का नाम रोशन करतीं। लेकिन सहायता न मिलने के चलते अनदेखी की शिकार राष्ट्रीय स्तर की मुक्केबाज रीतू आज घर का खर्चा चलाने के लिए पार्किंग की पर्ची काटने को मजबूर हैं। 23 साल की रीतू का परिवार धनास में रहता है। उन्हें इस बात का मलाल है कि प्रतिभा होते हुए भी उनकी अनदेखी हुई।
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रीतू ने बताया कि उनके तीन भाई हैं। बड़ा भाई मोहाली में कुक का काम करता है। वहीं रीतू के दो छोटे भाई पढ़ाई करते हैं। आर्थिक तंगी और स्कॉलरशिप न मिलने के कारण रीतू ने अपने मुक्केबाजी के कॅरिअर को बंद करना ही बेहतर समझा। इसके बाद वह सेक्टर- 22 मेन मार्केट में पेड पर्किंग में वाहनों की एंट्री की पर्चियां काटने का काम कर रही हैं।
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2016-17 में स्कूल नेशनल मुक्केबाजी में तीसरा स्थान पाया
नेशनल लेवल की खिलाड़ी रीतू ने बताया कि वह सेक्टर- 20बी के सरकारी स्कूल की छात्रा रही हैं और इसी स्कूल से 12वीं कक्षा पास की। पहले वालीबॉल खेलती थीं। बाजूओं की मजबूती को देखते हुए स्कूल वालों ने उसे मुक्केबाजी में हिस्सा लेने के लिए कहा। इसके बाद से उसने मुक्केबाजी करनी शुरू कर दी थी। वर्ष 2016-17 में तेलंगाना में स्कूल नेशनल मुक्केबाजी चैंपियनशिप में उनका तीसरा स्थान आया था।
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स्कॉलरशिप नहीं मिली थी, पिता बिमारी से घर बैठ गए
रीतू ने बताया कि जब वह स्कूल नेशनल की पोजीशन का स्कॉलरशिप का फॉर्म जमा करवाने के लिए गई तो उन्हें बताया गया कि फॉर्म जमा करवाने की तिथि निकल गई है। इसके बाद उनका मन काफी दुखी हुआ और उन्होंने मुक्केबाजी के खेल को बंद कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता राम अवतार रिक्शा चलाते थे, लेकिन बीमारी के चलते घर पर बैठ गए। उनकी माता घर का काम करती हैं। जब परिवार का खर्चा नहीं चला तो उन्होंने पेड पार्किंग में वाहनों की पर्चियां काटनी शुरू कर दीं। उन्होंने बताया कि वह एक साल से पर्चियां काट रही हैं। यहां पर एक दिन के 300-350 रुपये मिलते हैं। इससे परिवार का खर्चा चलता है।
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