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राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शिक्षण संस्थानों को लेकर स्पष्ट की स्थिति, ये हैं नियम
Fri, 24 Jan 2020 11:40 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 24 Jan 2020 11:40 AM IST
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उपभोक्ता सुरक्षा
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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कोचिंग सेंटर के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में कोई भी व्यक्ति केस दायर कर सकता है। स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के खिलाफ नहीं। चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की फुल बेंच ने शिक्षण संस्थानों को लेकर स्थिति साफ की है। आयोग ने कहा है कि विद्यार्थी उपभोक्ता नहीं होते हैं।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की सर्किट बेंच इन दिनों सेक्टर-19 स्थित कंज्यूमर कोर्ट में चल रही है। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने करीब 25 शिक्षण संस्थानों से संबंधित याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। आयोग ने कहा है कि कोचिंग सेंटर स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी की तरह नहीं होते हैं, क्योंकि स्कूल और कॉलेज एक रेगुलेटरी अथॉरिटी की तरफ से रेगुलेट किए जाते हैं।
इसके साथ ही वह नियम और कानूनों के तहत परीक्षा में बैठने और पास होने वाले छात्रों को डिग्री व डिप्लोमा भी प्रदान करते हैं, जबकि कोचिंग सेंटर लाभ कमाने के उद्देश्य से चलाए जाते हैं। वह अपनी सुविधा के अनुसार अन्य जगहों पर भी सेंटर को स्थापित करते हैं।
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राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की सर्किट बेंच इन दिनों सेक्टर-19 स्थित कंज्यूमर कोर्ट में चल रही है। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने करीब 25 शिक्षण संस्थानों से संबंधित याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। आयोग ने कहा है कि कोचिंग सेंटर स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी की तरह नहीं होते हैं, क्योंकि स्कूल और कॉलेज एक रेगुलेटरी अथॉरिटी की तरफ से रेगुलेट किए जाते हैं।
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इसके साथ ही वह नियम और कानूनों के तहत परीक्षा में बैठने और पास होने वाले छात्रों को डिग्री व डिप्लोमा भी प्रदान करते हैं, जबकि कोचिंग सेंटर लाभ कमाने के उद्देश्य से चलाए जाते हैं। वह अपनी सुविधा के अनुसार अन्य जगहों पर भी सेंटर को स्थापित करते हैं।
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ओएक्सएल स्कूल ऑफ मल्टीमीडिया के रिवीजन पिटीशन पर भी फैसला
ओएक्सएल स्कूल ऑफ मल्टीमीडिया की तरफ से राष्ट्रीय आयोग के समक्ष एक रिवीजन पिटीशन फाइल की गई थी। शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता की डिग्री इसलिए पूरी नहीं हो पाई थी क्योंकि यूजीसी ने कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के साथ ओएक्सएल स्कूल की एफिलिएशन रद्द कर दी थी।
दरअसल, ओएक्सएल स्कूल कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से एफिलेटेड था और अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों को कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से डिग्री प्रदान कराता था। इस रिवीजन पटीशन पर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग की फुल बेंच ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी विद्यार्थी उपभोक्ता नहीं होता है, इसलिए वह राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में शिकायत नहीं कर सकता है।
स्कूल से जुड़े किसी भी मामले की सुनवाई उपभोक्ता फोरम में नहीं
राष्ट्रीय आयोग ने यह भी साफ किया कि किसी भी स्कूल से जुड़े मामले की सुनवाई उपभोक्ता फोरम में नहीं की जाएगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसा ही होता आया है, लेकिन किन्ही कारणों की वजह से ‘शिक्षण संस्थान’ और ‘कोचिंग संस्थान’ के बीच कन्फ्यूजन पैदा हो गया था, जिसकी वजह से कई मामले उपभोक्ता फोरम में दायर हो रहे थे। उन्होंने साफ किया है कि स्कूल में ट्रांसपोर्टेशन से जुड़ी या अन्य मामलों को लेकर भी उपभोक्ता फोरम में स्कूल को पार्टी नहीं बनाया जा सकता है।
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दरअसल, ओएक्सएल स्कूल कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से एफिलेटेड था और अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों को कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से डिग्री प्रदान कराता था। इस रिवीजन पटीशन पर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग की फुल बेंच ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी विद्यार्थी उपभोक्ता नहीं होता है, इसलिए वह राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में शिकायत नहीं कर सकता है।
स्कूल से जुड़े किसी भी मामले की सुनवाई उपभोक्ता फोरम में नहीं
राष्ट्रीय आयोग ने यह भी साफ किया कि किसी भी स्कूल से जुड़े मामले की सुनवाई उपभोक्ता फोरम में नहीं की जाएगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसा ही होता आया है, लेकिन किन्ही कारणों की वजह से ‘शिक्षण संस्थान’ और ‘कोचिंग संस्थान’ के बीच कन्फ्यूजन पैदा हो गया था, जिसकी वजह से कई मामले उपभोक्ता फोरम में दायर हो रहे थे। उन्होंने साफ किया है कि स्कूल में ट्रांसपोर्टेशन से जुड़ी या अन्य मामलों को लेकर भी उपभोक्ता फोरम में स्कूल को पार्टी नहीं बनाया जा सकता है।
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