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Chandigarh: तीन साल पहले पुलिस ने पकड़ी थी 100 करोड़ की कोकीन, एनसीबी का सप्लीमेंट्री चालान-इफेड्रिन था
Mon, 08 Jul 2024 01:22 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 08 Jul 2024 01:22 PM IST
सार
2021 में कुरियर कंपनी में एक व्यक्ति से मिले पार्सल से 14 पैकेट बरामद हुए थे। पुलिस ने इसे कोकीन समझकर केस दर्ज किया था। बाद में सीएफएसएल की जांच में खुलासा हुआ था कि पकड़ा गया पदार्थ इफेड्रिन था।
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Drugs, ड्रग्स
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मई 2021 में चंडीगढ़ पुलिस द्वारा 100 करोड़ की कोकीन पकड़कर वाहवाही लूटने के मामले आखिरकार तीन साल बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने सप्लीमेंट्री चालान कोर्ट में पेश कर दिया।
इस चालान में जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस द्वारा पकड़ी गई कोकीन कोई नशीला पदार्थ नहीं बल्कि इफेड्रिन है जिसका प्रयोग अकसर दवाइयां इत्यादि बनाने में किया जाता है। सीएफएसएल की रिपोर्ट में भी पहले ही इसका खुलासा हो चुका है।
10 किलो 24 ग्राम कमर्शियल क्वांटिटी में होने के चलते मामले की जांच वर्ष 2022 में गृह मंत्रालय द्वारा एनसीबी को ट्रांसफर कर दी गई थी। लेकिन एनसीबी को इसका सप्लीमेंट्री चालान पेश करने में तीन साल का लंबा वक्त लग गया। हालांकि चंडीगढ़ पुलिस कोर्ट में अपनी जांच से संबंधित आरोपियों के खिलाफ पहले चालान पेश कर चुकी थी। अब कोर्ट में इसकी सुनवाई 12 जुलाई को होनी है।
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जानकारी के मुताबिक चंडीगढ़ सेक्टर-31 थाना के एसएचओ नरेंद्र पटियाल को गुप्त सूचना मिली थी कि इंडस्ट्रियल एरिया फेस-2 में स्थित कुरियर कंपनी में एक व्यक्ति भारी मात्रा में नशीला पदार्थ लेकर आया हुआ है। सूचना पाते ही इंस्पेक्टर व अन्य जांच टीमें मौके पर पहुंची। जांच टीम ने कुरियर कंपनी में उक्त व्यक्ति से मिले पार्सल चैक किए गए तो इनमें गत्ते के डिब्बों में सामान के अंदर 14 पैकेट बरामद हुए थे। पुलिस ने इसे कोकीन समझ उक्त व्यक्ति अशफाक रहमान निवासी चेन्नई तमिलनाड़ू के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट-21 के तहत मामला दर्ज किया था। जांच टीम के मुताबिक यह कोकीन के पैकेट अस्ट्रेलिया में भेजे जाने थे। इस प्रकरण के बाद पुलिस ने 100 करोड़ की कोकीन पकड़ने का दावा करते हुए खूब वाहवाही लूटी थी।
एफएसएल की रिपोर्ट में खुल गई थी पुलिस की पोल
सेक्टर-31 पुलिस द्वारा पकड़ी गई कोकीन के कुछ सैंपल लेकर जांच के लिए सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरट्री (सीएफएसएल) लैब में भेजे गए। लेकिन कुछ ही समय बाद जब रिपोर्ट आई तो वह काफी चौंकाने वाली थी। क्योंकि जांच रिपोर्ट में बरामद की गई 100 करोड़ की कोकीन महज एक इफेड्रिन पाऊउर निकला जिसका प्रयोग अकसर अलग-अलग प्रकार की दवाइयां बनाने में किया जाता है। यह इफेड्रिन एनडीपीएस एक्ट के अधीन ही नहीं आता है और इसकी क्वाटिंटी भी गैर कामर्शियल मानी जाती है जबकि नशीले पदार्थों का वजन क्वाटिंटी पर आधारित होता है। इफेड्रिन को नशीले पदार्थ की कैटेगिरी में भी नहीं रखा गया है और यह महज एक कंट्रोल्ड सबस्टांस की श्रेणी में आता है। इसी कारण जांच टीमों ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 9-ए, 25-ए, 27-ए, 29 इजाद कर दी थी।
सप्लीमेंट्री चालान पेश करने में लगा दिए तीन साल
यह मामला वर्ष 2022 में गृह मंत्रालय ने एनसीबी के पास ट्रांसफर कर दिया था। लेकिन सीएफएसएल की जांच रिपोर्ट आने के बाद भी एनसीबी सप्लीमेंट्री चालान पेश करने में आनाकानी करती रही। क्योंकि इफेड्रिन सीधे तौर पर एनडीपीएस अधिनियम के अनुसार नियंत्रित दवा के दायरे में आता है। इसकी छोटी या वाणिज्यिक मात्रा की कोई अनुसूची नहीं है। बाकायदा भारत की राजपत्र अधिसूचना दिनांक 28.12.1999 के अनुसार भी इफेड्रिन एक नियंत्रित पदार्थ है और कमर्शियल मात्रा की श्रेणी में नहीं आता है।
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इस चालान में जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस द्वारा पकड़ी गई कोकीन कोई नशीला पदार्थ नहीं बल्कि इफेड्रिन है जिसका प्रयोग अकसर दवाइयां इत्यादि बनाने में किया जाता है। सीएफएसएल की रिपोर्ट में भी पहले ही इसका खुलासा हो चुका है।
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10 किलो 24 ग्राम कमर्शियल क्वांटिटी में होने के चलते मामले की जांच वर्ष 2022 में गृह मंत्रालय द्वारा एनसीबी को ट्रांसफर कर दी गई थी। लेकिन एनसीबी को इसका सप्लीमेंट्री चालान पेश करने में तीन साल का लंबा वक्त लग गया। हालांकि चंडीगढ़ पुलिस कोर्ट में अपनी जांच से संबंधित आरोपियों के खिलाफ पहले चालान पेश कर चुकी थी। अब कोर्ट में इसकी सुनवाई 12 जुलाई को होनी है।
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जानकारी के मुताबिक चंडीगढ़ सेक्टर-31 थाना के एसएचओ नरेंद्र पटियाल को गुप्त सूचना मिली थी कि इंडस्ट्रियल एरिया फेस-2 में स्थित कुरियर कंपनी में एक व्यक्ति भारी मात्रा में नशीला पदार्थ लेकर आया हुआ है। सूचना पाते ही इंस्पेक्टर व अन्य जांच टीमें मौके पर पहुंची। जांच टीम ने कुरियर कंपनी में उक्त व्यक्ति से मिले पार्सल चैक किए गए तो इनमें गत्ते के डिब्बों में सामान के अंदर 14 पैकेट बरामद हुए थे। पुलिस ने इसे कोकीन समझ उक्त व्यक्ति अशफाक रहमान निवासी चेन्नई तमिलनाड़ू के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट-21 के तहत मामला दर्ज किया था। जांच टीम के मुताबिक यह कोकीन के पैकेट अस्ट्रेलिया में भेजे जाने थे। इस प्रकरण के बाद पुलिस ने 100 करोड़ की कोकीन पकड़ने का दावा करते हुए खूब वाहवाही लूटी थी।
एफएसएल की रिपोर्ट में खुल गई थी पुलिस की पोल
सेक्टर-31 पुलिस द्वारा पकड़ी गई कोकीन के कुछ सैंपल लेकर जांच के लिए सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरट्री (सीएफएसएल) लैब में भेजे गए। लेकिन कुछ ही समय बाद जब रिपोर्ट आई तो वह काफी चौंकाने वाली थी। क्योंकि जांच रिपोर्ट में बरामद की गई 100 करोड़ की कोकीन महज एक इफेड्रिन पाऊउर निकला जिसका प्रयोग अकसर अलग-अलग प्रकार की दवाइयां बनाने में किया जाता है। यह इफेड्रिन एनडीपीएस एक्ट के अधीन ही नहीं आता है और इसकी क्वाटिंटी भी गैर कामर्शियल मानी जाती है जबकि नशीले पदार्थों का वजन क्वाटिंटी पर आधारित होता है। इफेड्रिन को नशीले पदार्थ की कैटेगिरी में भी नहीं रखा गया है और यह महज एक कंट्रोल्ड सबस्टांस की श्रेणी में आता है। इसी कारण जांच टीमों ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 9-ए, 25-ए, 27-ए, 29 इजाद कर दी थी।
सप्लीमेंट्री चालान पेश करने में लगा दिए तीन साल
यह मामला वर्ष 2022 में गृह मंत्रालय ने एनसीबी के पास ट्रांसफर कर दिया था। लेकिन सीएफएसएल की जांच रिपोर्ट आने के बाद भी एनसीबी सप्लीमेंट्री चालान पेश करने में आनाकानी करती रही। क्योंकि इफेड्रिन सीधे तौर पर एनडीपीएस अधिनियम के अनुसार नियंत्रित दवा के दायरे में आता है। इसकी छोटी या वाणिज्यिक मात्रा की कोई अनुसूची नहीं है। बाकायदा भारत की राजपत्र अधिसूचना दिनांक 28.12.1999 के अनुसार भी इफेड्रिन एक नियंत्रित पदार्थ है और कमर्शियल मात्रा की श्रेणी में नहीं आता है।