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जब पार्षद ने पूछा, सेलवेल पर मेहरबानी क्यों
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 31 Dec 2013 11:00 AM IST
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निगम सदन की बैठक में सेलवेल कंपनी पर अफसरों की मेहरबानी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। यह मुद्दा भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह ने उठाया।
सिंह ने कहा कि अफसरों ने पूरी तरह से कंपनी पर मेहरबानी दिखाई है और सभी नियमों को ताक पर रख दिया। इस वजह से निगम को पिछले छह सालों में आठ करोड़ का नुकसान हुआ है।
शहर के पब्लिक टायलेट्स पर विज्ञापनों से निगम को करोड़ों की आय हो सकती थी, लेकिन जिस कंपनी को ठेका दिया गया, उससे कोई विज्ञापन कर नहीं लिया जा रहा है।
सतिंदर सिंह ने कहा कि इन टायलेट्स पर 25 स्क्वायर फीट के छह हजार रुपये प्रतिवर्ष रुपये विज्ञापन कर के रूप में लिए जा सकते थे।
सतिंदर सिंह ने बैठक के आखिर में यह सवाल सदन में रखा। मेयर सुभाष चावला ने कहा कि यह प्रस्ताव एफएंडसीसी की मीटिंग में पास हो चुका है और अब इस पर चर्चा की जरूरत नहीं है।
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ये था मामला
पब्लिक टॉयलेट के रख-रखाव केलिए निगम ने 2007 में सेलवेल मीडिया सर्विसेज कंपनी को ठेका दिया था। कंपनी का टेंडर 2012 में खत्म हो गया और उसे एक साल की एक्सटेंशन दे दी। अब इस महीने कंपनी को फिर से पांच सालों के लिए टेंडर दे दिया। इसके लिए निगम ने 6.26 करोड़ का बजट बनाया है। सतिंदर सिंह ने कहा कि निगम अफसर पब्लिक मनी का दुरुपयोग कर रहे हैं।
ज्यादा रेट पर दे दिया टेंडर
सतिंदर ने कहा कि पहले कंपनी को टायलेट के रख-रखाव के लिए 12 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे। अब नए टेंडर में यह रेट बढ़ा दिया गया है। अब निगम कंपनी को 17,800 रुपये प्रतिमाह दे रहा है। सतिंदर सिंह ने कहा कि सभी पब्लिक टायलेट का ठेका एक ही रेट पर दे दिया गया जबकि इन्हें सेक्टर के आधार पर बांटना चाहिए था।
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सिंह ने कहा कि अफसरों ने पूरी तरह से कंपनी पर मेहरबानी दिखाई है और सभी नियमों को ताक पर रख दिया। इस वजह से निगम को पिछले छह सालों में आठ करोड़ का नुकसान हुआ है।
शहर के पब्लिक टायलेट्स पर विज्ञापनों से निगम को करोड़ों की आय हो सकती थी, लेकिन जिस कंपनी को ठेका दिया गया, उससे कोई विज्ञापन कर नहीं लिया जा रहा है।
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सतिंदर सिंह ने कहा कि इन टायलेट्स पर 25 स्क्वायर फीट के छह हजार रुपये प्रतिवर्ष रुपये विज्ञापन कर के रूप में लिए जा सकते थे।
सतिंदर सिंह ने बैठक के आखिर में यह सवाल सदन में रखा। मेयर सुभाष चावला ने कहा कि यह प्रस्ताव एफएंडसीसी की मीटिंग में पास हो चुका है और अब इस पर चर्चा की जरूरत नहीं है।
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ये था मामला
पब्लिक टॉयलेट के रख-रखाव केलिए निगम ने 2007 में सेलवेल मीडिया सर्विसेज कंपनी को ठेका दिया था। कंपनी का टेंडर 2012 में खत्म हो गया और उसे एक साल की एक्सटेंशन दे दी। अब इस महीने कंपनी को फिर से पांच सालों के लिए टेंडर दे दिया। इसके लिए निगम ने 6.26 करोड़ का बजट बनाया है। सतिंदर सिंह ने कहा कि निगम अफसर पब्लिक मनी का दुरुपयोग कर रहे हैं।
ज्यादा रेट पर दे दिया टेंडर
सतिंदर ने कहा कि पहले कंपनी को टायलेट के रख-रखाव के लिए 12 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे। अब नए टेंडर में यह रेट बढ़ा दिया गया है। अब निगम कंपनी को 17,800 रुपये प्रतिमाह दे रहा है। सतिंदर सिंह ने कहा कि सभी पब्लिक टायलेट का ठेका एक ही रेट पर दे दिया गया जबकि इन्हें सेक्टर के आधार पर बांटना चाहिए था।