{"_id":"5f128d27a8781c44ab024283","slug":"nagar-nigam-chandigarh-will-execute-jaypee-plant-with-help-if-nitttr-and-iit-roorki","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ः जेपी प्लांट चलाने के लिए आईआईटी रूढ़की के बाद अब एनआईटीटीटीआर की मदद लेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ः जेपी प्लांट चलाने के लिए आईआईटी रूढ़की के बाद अब एनआईटीटीटीआर की मदद लेंगे
Sat, 18 Jul 2020 11:18 AM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 18 Jul 2020 11:18 AM IST
सार
- एनआईटीटीटीआर की टीम ने प्लांट का किया निरीक्षण
- मशीनरी के चयन व क्षमता को लेकर भी निगम लेगा सुझाव
विज्ञापन
जेपी गारबेज प्लांट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट के संचालन के लिए नगर निगम अब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिग एंड रिसर्च (एनआईटीटीटीआर) की मदद लेगा। एनआईटीटीटीआर की टीम ने शुक्रवार को प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान मशीनों की स्थिति भी देखी। अगले सप्ताह तक एनआईटीटीटीआर अपनी रिपोर्ट निगम को सौंप देगा।
ज्वाइंट कमिश्नर सौरभ अरोड़ा ने बताया कि एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ का ही इंस्टीट्यूट है। इसलिए उससे समय-समय पर सुझाव लिए जा सकते हैं। चूंकि निगम के साथ एनआईटीटीटीआर का पहले से भी अनुबंध है, इसलिए वहां की टीम ने निगम के आग्रह पर प्लांट का निरीक्षण किया। सुबह टीम ने पहुंचकर कचरा प्रोसेसिंग की स्थिति देखी। मशीनों की क्षमता के बारे में भी आकलन किया।
हालांकि, टीम ने कहा कि मशीनों की स्थिति बहुत ज्यादा अच्छी नहीं लग रही है। वहीं, जिस हिसाब से प्लांट में कचरे का ढेर लगा है, उससे भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि बहुत ज्यादा कचरा प्रोसेस नहीं हो पा रहा है। टीम के सदस्य निरीक्षण के बाद वापस चले गए। हालांकि, अभी शहर से 500 टन कचरा निकल रहा है और 100 टन कचरा ही प्रोसेस हो रहा है। इससे प्लांट के अंदर कचरे का ढेर लग रहा है। अगले सप्ताह तक रिपोर्ट कंपाइल होकर निगम को सौंप दी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
ज्वाइंट कमिश्नर सौरभ अरोड़ा ने बताया कि एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ का ही इंस्टीट्यूट है। इसलिए उससे समय-समय पर सुझाव लिए जा सकते हैं। चूंकि निगम के साथ एनआईटीटीटीआर का पहले से भी अनुबंध है, इसलिए वहां की टीम ने निगम के आग्रह पर प्लांट का निरीक्षण किया। सुबह टीम ने पहुंचकर कचरा प्रोसेसिंग की स्थिति देखी। मशीनों की क्षमता के बारे में भी आकलन किया।
विज्ञापन
हालांकि, टीम ने कहा कि मशीनों की स्थिति बहुत ज्यादा अच्छी नहीं लग रही है। वहीं, जिस हिसाब से प्लांट में कचरे का ढेर लगा है, उससे भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि बहुत ज्यादा कचरा प्रोसेस नहीं हो पा रहा है। टीम के सदस्य निरीक्षण के बाद वापस चले गए। हालांकि, अभी शहर से 500 टन कचरा निकल रहा है और 100 टन कचरा ही प्रोसेस हो रहा है। इससे प्लांट के अंदर कचरे का ढेर लग रहा है। अगले सप्ताह तक रिपोर्ट कंपाइल होकर निगम को सौंप दी जाएगी।
विज्ञापन
रुड़की आईआईटी की रिपोर्ट आने में लगेगा थोड़ा समय
पिछले सप्ताह रुड़की आईआईटी की टीम ने जेपी प्लांट का निरीक्षण किया था। इस दौरान मशीनों के साथ कचरा प्रोसेसिंग का भी तरीका देखा गया था। उस दौरान टीम ने कहा था कि जितना कचरा प्रोसेस होना चाहिए, उतना प्रोसेस नहीं हो पा रहा है। हालांकि, समस्या क्या है वह रिपोर्ट आने के बाद ही जानकारी मिलेगी। इस रिपोर्ट को आने में अभी समय लगेगा। एनआईटीटीटीआर व रुड़की आईआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही निगम आगे कोई कदम उठाएगा।
एनआईटीटीटीआर से सड़कों के लिए भी निगम ने किया है अनुबंध
निगम ने एनआईटीटीटीआर के साथ सड़क के निर्माण कार्यों को लेकर भी अनुबंध किया है। इसमें एनआईटीटीटीआर सड़कों की गुणवत्ता के बारे में बताएगा। साथ ही कहां किस तरह का मैटेरियल उपयोग करना है, इसकी भी जानकारी देगा। सड़कों की उम्र बढ़ाने व शहर की सड़कों का नक्शा बनवाने के उद्देश्य से भी निगम ने एनआईटीटीटीआर के साथ अनुबंध किया है। यही कारण है निगम ने प्लांट का भी निरीक्षण एनआईटीटीटीआर से करवाया है।
प्लांट पर हर माह 1.20 करोड़ का खर्च
कमिश्नर केके यादव के अनुसार प्लांट के ऑपरेशन, बिजली बिल, लेबर और मेंटीनेंस पर 60 लाख रुपये खर्च होंगे। प्लांट को संचालित करने के लिए अभी जेपी ग्रुप के ही 85 कर्मचारियों को निगम ने प्लांट में काम पर लगाया हुआ है।
एनआईटीटीटीआर की टीम ने प्लांट का निरीक्षण कर लिया है। अगले सप्ताह तक इसकी रिपोर्ट आ जाएगी। रुड़की आईआईटी टीम की रिपोर्ट आने के बाद आगे कोई कदम उठाया जाएगा।
- सौरभ अरोड़ा, ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम
एनआईटीटीटीआर से सड़कों के लिए भी निगम ने किया है अनुबंध
निगम ने एनआईटीटीटीआर के साथ सड़क के निर्माण कार्यों को लेकर भी अनुबंध किया है। इसमें एनआईटीटीटीआर सड़कों की गुणवत्ता के बारे में बताएगा। साथ ही कहां किस तरह का मैटेरियल उपयोग करना है, इसकी भी जानकारी देगा। सड़कों की उम्र बढ़ाने व शहर की सड़कों का नक्शा बनवाने के उद्देश्य से भी निगम ने एनआईटीटीटीआर के साथ अनुबंध किया है। यही कारण है निगम ने प्लांट का भी निरीक्षण एनआईटीटीटीआर से करवाया है।
प्लांट पर हर माह 1.20 करोड़ का खर्च
कमिश्नर केके यादव के अनुसार प्लांट के ऑपरेशन, बिजली बिल, लेबर और मेंटीनेंस पर 60 लाख रुपये खर्च होंगे। प्लांट को संचालित करने के लिए अभी जेपी ग्रुप के ही 85 कर्मचारियों को निगम ने प्लांट में काम पर लगाया हुआ है।
एनआईटीटीटीआर की टीम ने प्लांट का निरीक्षण कर लिया है। अगले सप्ताह तक इसकी रिपोर्ट आ जाएगी। रुड़की आईआईटी टीम की रिपोर्ट आने के बाद आगे कोई कदम उठाया जाएगा।
- सौरभ अरोड़ा, ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम