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चंडीगढ़ः नगर निगम मेयर पद के लिए शुरू हुई लाबिंग, भाजपा में मच सकता है घमासान
राजेश ढल्ल, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 12 Nov 2018 04:40 PM IST
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देवेश मोदगिल
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मेयर देवेश मोदगिल का कार्यकाल खत्म होने में अब दो माह से भी कम का समय का बचा हुआ है। ऐसे में जनवरी 2019 के पहले सप्ताह में होने वाले मेयर चुनाव के लिए अभी से लाबिंग शुरू हो गई है। दावेदार भी खुलकर सामने आ गए हैं। बता दें कि अगले साल का मेयर पद आरक्षित वर्ग के पार्षद के लिए रिजर्व है। ऐसे में भाजपा में चार और कांग्रेस में एक दावेदार हैं। मुश्किल भाजपा के सामने है क्योंकि पार्टी में एक पद के लिए चार दावेदार हैं और इनमें से किसी एक को उम्मीदवार घोषित करना भाजपा के लिए आसान नहीं है। किसी एक पर मोहर लगने से पिछली बार की तरह भाजपा में फिर बवाल होना तय है। अगले साल लोकसभा के चुनाव भी हैं।
भाजपा में चंडीगढ़ से लोकसभा चुनाव के टिकट के लिए पार्टी अध्यक्ष संजय टंडन और सांसद किरण खेर के गुट में खींचतान चल रही है। ऐसे में दोनों ही गुट अपने चहेते पार्षद को मेयर की कुर्सी में बैठाकर लोकसभा चुनाव के लिए अपनी टिकट पक्की करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही अपने चहेते को मेयर का उम्मीदवार बनाकर दोनों गुट यह मैसेज भी देना चाहते हैं कि पार्टी में उनकी पकड़ ज्यादा मजबूत है। सांसद किरण खेर और भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन दोनों ही अगले लोकसभा चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार हैं। संघ की राय भी यहां के उम्मीदवार को तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। संगठन मंत्री दिनेश कुमार दावेदारों की गतिविधि पर नजर बनाए हैं।
मेयर पद के दावेदार
मेयर पद के लिए भाजपा में राजेश कालिया, सतीश कैंथ, भरत कुमार और फरमिला देवी दावेदारों की लिस्ट में हैं। इन चारों में से सिर्फ सतीश कैंथ अकेले ऐसे दावेदार हैं जो दूसरी बार नगर निगम में चुनाव आए हैं। सतीश कैंथ पिछले कार्यकाल में दो बार डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं जबकि राजेश कालिया भाजपा के सीनियर नेता हैं। भरत कुमार टंडन गुट के अलावा संघ के भी करीबी हैं। वहीं, फरमिला देवी सांसद किरण खेर गुट की हैं। उधर, कांग्रेस के चार पार्षदों में से सिर्फ एक ही पार्षद शीला फूल सिंह आरक्षित वर्ग से हैं। ऐसे में कांग्रेस की ओर से शीला फूल सिंह का उम्मीदवार बनना तय है। भाजपा में ही उम्मीदवार बनने की ज्यादा होड़ लगी हुई है क्योंकि यह माना जा रहा है कि उम्मीदवार बनने के बाद जीत दर्ज करना आसान है क्योंकि नगर निगम में कुल 26 में से 20 पार्षद भाजपा के हैं।
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गुटबाजी हावी, निर्दलीय उम्मीदवार भी होंगे मैदान में
भाजपा में गुटबाजी काफी हावी है। ऐसे में किसी एक को मेयर पद के लिए उम्मीदवार बनाए जाने पर दूसरे गुट द्वारा किसी दावेदार को निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतारे जाने की पूरी उम्मीद है। इस साल भी जब पार्टी ने देवेश मोदगिल को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया था तो टंडन गुट की ओर से आशा जसवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भर दिया हालांकि बाद में हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद जसवाल ने नामांकन वापस ले लिया था। मालूम हो कि 1999 में भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ केवल कृष्ण आदिवाल ने नामांकन भरकर मेयर का चुनाव जीता था हालांकि चुनाव जीतने के बाद आदिवाल भाजपा में ही रहे।
भाजपा की गुटबाजी और लड़ाई से कांग्रेस को मिल सकता है फायदा
नगर निगम में मेयर पद का चुनाव जीतने के लिए 14 वोटों की जरूरत है। नगर निगम में कुल 26 में से 20 पार्षद भाजपा के हैं। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार के लिए मेयर पद का रास्ता साफ है लेकिन सवाल पार्टी में गुटबाजी का है। चार दावेदारों में से एक को उम्मीदवार बनाने पर गुटबाजी तय है और इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। हालांकि कांग्रेस के पास सिर्फ 4 ही पार्षद हैं।
अगला मेयर भाजपा का ही बनेगा। सभी की राय लेने के बाद हाईकमान के निर्देश पर उम्मीदवार का चयन किया जाएगा।
- दिनेश कुमार, संगठन मंत्री, भाजपा
मेयर चुनाव के लिए कांग्रेस अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी। भाजपा पार्षदों और नेताओं में भारी गुटबाजी है, जिसका नुकसान शहर को हो रहा है। भाजपा की गुटबाजी के कारण ही कांग्रेस पार्टी मेयर का चुनाव जीतेगी।
- प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष
भाजपा पार्टी का मेयर बनना तय है। कांग्रेस मुकाबले में भी नहीं है। मेयर चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव भी भाजपा जीतेगी।
- संजय टंडन, भाजपा अध्यक्ष
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भाजपा में चंडीगढ़ से लोकसभा चुनाव के टिकट के लिए पार्टी अध्यक्ष संजय टंडन और सांसद किरण खेर के गुट में खींचतान चल रही है। ऐसे में दोनों ही गुट अपने चहेते पार्षद को मेयर की कुर्सी में बैठाकर लोकसभा चुनाव के लिए अपनी टिकट पक्की करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही अपने चहेते को मेयर का उम्मीदवार बनाकर दोनों गुट यह मैसेज भी देना चाहते हैं कि पार्टी में उनकी पकड़ ज्यादा मजबूत है। सांसद किरण खेर और भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन दोनों ही अगले लोकसभा चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार हैं। संघ की राय भी यहां के उम्मीदवार को तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। संगठन मंत्री दिनेश कुमार दावेदारों की गतिविधि पर नजर बनाए हैं।
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मेयर पद के दावेदार
मेयर पद के लिए भाजपा में राजेश कालिया, सतीश कैंथ, भरत कुमार और फरमिला देवी दावेदारों की लिस्ट में हैं। इन चारों में से सिर्फ सतीश कैंथ अकेले ऐसे दावेदार हैं जो दूसरी बार नगर निगम में चुनाव आए हैं। सतीश कैंथ पिछले कार्यकाल में दो बार डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं जबकि राजेश कालिया भाजपा के सीनियर नेता हैं। भरत कुमार टंडन गुट के अलावा संघ के भी करीबी हैं। वहीं, फरमिला देवी सांसद किरण खेर गुट की हैं। उधर, कांग्रेस के चार पार्षदों में से सिर्फ एक ही पार्षद शीला फूल सिंह आरक्षित वर्ग से हैं। ऐसे में कांग्रेस की ओर से शीला फूल सिंह का उम्मीदवार बनना तय है। भाजपा में ही उम्मीदवार बनने की ज्यादा होड़ लगी हुई है क्योंकि यह माना जा रहा है कि उम्मीदवार बनने के बाद जीत दर्ज करना आसान है क्योंकि नगर निगम में कुल 26 में से 20 पार्षद भाजपा के हैं।
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गुटबाजी हावी, निर्दलीय उम्मीदवार भी होंगे मैदान में
भाजपा में गुटबाजी काफी हावी है। ऐसे में किसी एक को मेयर पद के लिए उम्मीदवार बनाए जाने पर दूसरे गुट द्वारा किसी दावेदार को निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतारे जाने की पूरी उम्मीद है। इस साल भी जब पार्टी ने देवेश मोदगिल को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया था तो टंडन गुट की ओर से आशा जसवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भर दिया हालांकि बाद में हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद जसवाल ने नामांकन वापस ले लिया था। मालूम हो कि 1999 में भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ केवल कृष्ण आदिवाल ने नामांकन भरकर मेयर का चुनाव जीता था हालांकि चुनाव जीतने के बाद आदिवाल भाजपा में ही रहे।
भाजपा की गुटबाजी और लड़ाई से कांग्रेस को मिल सकता है फायदा
नगर निगम में मेयर पद का चुनाव जीतने के लिए 14 वोटों की जरूरत है। नगर निगम में कुल 26 में से 20 पार्षद भाजपा के हैं। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार के लिए मेयर पद का रास्ता साफ है लेकिन सवाल पार्टी में गुटबाजी का है। चार दावेदारों में से एक को उम्मीदवार बनाने पर गुटबाजी तय है और इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। हालांकि कांग्रेस के पास सिर्फ 4 ही पार्षद हैं।
अगला मेयर भाजपा का ही बनेगा। सभी की राय लेने के बाद हाईकमान के निर्देश पर उम्मीदवार का चयन किया जाएगा।
- दिनेश कुमार, संगठन मंत्री, भाजपा
मेयर चुनाव के लिए कांग्रेस अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी। भाजपा पार्षदों और नेताओं में भारी गुटबाजी है, जिसका नुकसान शहर को हो रहा है। भाजपा की गुटबाजी के कारण ही कांग्रेस पार्टी मेयर का चुनाव जीतेगी।
- प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष
भाजपा पार्टी का मेयर बनना तय है। कांग्रेस मुकाबले में भी नहीं है। मेयर चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव भी भाजपा जीतेगी।
- संजय टंडन, भाजपा अध्यक्ष