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मुरथल गैंगरेप: हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के रवैये पर फिर उठाए सवाल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 02 Sep 2016 05:18 PM IST
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मुरथल गैंगरेप
- फोटो : file
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हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मुरथल में महिला यात्रियों से कथित गैंगरेप मामले की सुनवाई कर रही पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आंदोलन से उपजे हालात पर हरियाणा सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की है।
वीरवार को जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ के समक्ष हरियाणा सरकार की तरफ से आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा पर पुलिस कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट और प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपी गई।
इस बीच हरियाणा के गृह, जेल और क्रिमिनल इनवेस्टिगेशन एंड एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राम निवास की ओर से प्रकाश सिंह को 21 जुलाई को लिखा वह पत्र भी अदालत में पेश किया गया, जिसमें उन्होंने पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह को जाट आंदोलन की जांच की दूसरी असाइनमेंट पूरी न करने के निर्देश दिए थे।
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इस पत्र ने सरकार के सारे दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। खंडपीठ ने हरियाणा सरकार को रामनिवास के पत्र और प्रकाश सिंह को लेकर विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बयान पर अपना रुख स्पष्ट करने के निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 22 सितंबर तक स्थगित कर दी।
वीरवार को सुनवाई के दौरान मामले में एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने अदालत से कहा कि पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की साफ छवि के कारण ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने हरियाणा सरकार को जाट आंदोलन में हिंसा की जांच सौंपने को कहा था। अनुपम गुप्ता ने रामनिवास के पत्र का हवाला देते हुए अदालत से कहा कि हरियाणा सरकार पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह को दूसरी असाइनमेंट न करने के लिए आखिर क्यों कह रही है।
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वीरवार को जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ के समक्ष हरियाणा सरकार की तरफ से आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा पर पुलिस कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट और प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपी गई।
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इस बीच हरियाणा के गृह, जेल और क्रिमिनल इनवेस्टिगेशन एंड एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राम निवास की ओर से प्रकाश सिंह को 21 जुलाई को लिखा वह पत्र भी अदालत में पेश किया गया, जिसमें उन्होंने पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह को जाट आंदोलन की जांच की दूसरी असाइनमेंट पूरी न करने के निर्देश दिए थे।
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इस पत्र ने सरकार के सारे दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। खंडपीठ ने हरियाणा सरकार को रामनिवास के पत्र और प्रकाश सिंह को लेकर विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बयान पर अपना रुख स्पष्ट करने के निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 22 सितंबर तक स्थगित कर दी।
वीरवार को सुनवाई के दौरान मामले में एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने अदालत से कहा कि पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की साफ छवि के कारण ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने हरियाणा सरकार को जाट आंदोलन में हिंसा की जांच सौंपने को कहा था। अनुपम गुप्ता ने रामनिवास के पत्र का हवाला देते हुए अदालत से कहा कि हरियाणा सरकार पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह को दूसरी असाइनमेंट न करने के लिए आखिर क्यों कह रही है।
यह शर्मनाक स्थिति है
मुरथल गैंगरेप केस
- फोटो : getty
गुप्ता ने बुधवार को हरियाणा विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा प्रकाश सिंह को लेकर दिए बयान संबंधी मीडिया रिपोर्ट की प्रतियां भी हाईकोर्ट को सौंप कर कहा कि यह शर्मनाक स्थिति है कि जो सरकार आंदोलन के दौरान हिंसा नहीं रोक सकी और दोषियों पर कार्रवाई भी नहीं कर सकी, जिम्मेदार अफसरों को बचाने के लिए एक ईमानदार पूर्व डीजीपी पर आरोप लगा रही है।
उन्होंने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत से यह भी कहा कि प्रकाश सिंह ने मुख्यमंत्री के बयान का खंडन भी किया है। इसमें कहा गया है कि अगर उन्हें कोई पद लेना होता तो वे अपने प्रदेश यूपी में लेते, हरियाणा में नहीं। गुप्ता ने अदालत से कहा कि इलाका मजिस्ट्रेटों की रिपोर्ट से ही साफ हो चुका है कि हिंसा के दौरान सरकार पूरी तरह नाकाम रही।
एमिकस क्यूरी की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि एक ओर तो हरियाणा सरकार प्रकाश सिंह की तारीफ कर रही है कि उन्होंने आरक्षण आंदोलन में हिंसा के दौरान अफसरों की भूमि की जांच बेहतर तरीके से करके समय पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। वहीं दूसरी और ऐसे दंगों से निपटने के लिए और बेहतर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौजूदा सरकारी ढांचे में सुधर के लिए पूर्व डीजीपी को सुझाव देने का जो काम सौंपा गया था, अब उन्हें उसी काम से रोक रही है।
उन्होंने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत से यह भी कहा कि प्रकाश सिंह ने मुख्यमंत्री के बयान का खंडन भी किया है। इसमें कहा गया है कि अगर उन्हें कोई पद लेना होता तो वे अपने प्रदेश यूपी में लेते, हरियाणा में नहीं। गुप्ता ने अदालत से कहा कि इलाका मजिस्ट्रेटों की रिपोर्ट से ही साफ हो चुका है कि हिंसा के दौरान सरकार पूरी तरह नाकाम रही।
एमिकस क्यूरी की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि एक ओर तो हरियाणा सरकार प्रकाश सिंह की तारीफ कर रही है कि उन्होंने आरक्षण आंदोलन में हिंसा के दौरान अफसरों की भूमि की जांच बेहतर तरीके से करके समय पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। वहीं दूसरी और ऐसे दंगों से निपटने के लिए और बेहतर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौजूदा सरकारी ढांचे में सुधर के लिए पूर्व डीजीपी को सुझाव देने का जो काम सौंपा गया था, अब उन्हें उसी काम से रोक रही है।
स्टेटस रिपोर्ट में बताया, 2104 एफआईआर हुईं दर्ज, 1610 गिरफ्तारियां
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह
- फोटो : amar ujala
सुनवाई के दौरान हरियाणा पुलिस के आईजी (लॉ एंड आर्डर) अरशिंदर सिंह चावला की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया कि आंदोलन के दौरान हिंसा, आगजनी व लूटपाट के मामलों में पुलिस ने अब तक 2104 एफआईआर दर्ज करते हुए 1610 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
447 के खिलाफ अदालतों में चालान पेश कर दिए गए हैं। 3439 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू किया जा चुका है। स्टेटस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हरियाणा सरकार ने तीन मामलों की सीबीआई जांच की सिफारिश करते हुए डिपार्टमेंट ऑफ परसोनल एंड ट्रेनिंग नई दिल्ली को पत्र भेज दिया है और इस पर केंद्र सरकार के जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है।
जिन तीन मामलों की सीबीआई जांच की सिफारिश की गई है, उनमें रोहतक में वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर लूटपाट व आगजनी को लेकर 27 फरवरी को दर्ज एफआईआर और उनके घर पर तैनात पुलिस गार्ड पर हमले के मामले में 20 फरवरी को दर्ज एफआईआर तथा रोहतक के सर्किट हाउस में तैनात सुरक्षा कर्मियों पर हमले के मामले में 21 फरवरी को दर्ज एफआईआर का मामला शामिल है।
स्टेटस रिपोर्ट में कुल दर्ज केसों का जिलेवार ब्योरा देते हुए बताया गया है कि किस जिले में कितनी गिरफ्तारियां हुईं हैं।
पंचकूला में 1 केस दर्ज करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
447 के खिलाफ अदालतों में चालान पेश कर दिए गए हैं। 3439 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू किया जा चुका है। स्टेटस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हरियाणा सरकार ने तीन मामलों की सीबीआई जांच की सिफारिश करते हुए डिपार्टमेंट ऑफ परसोनल एंड ट्रेनिंग नई दिल्ली को पत्र भेज दिया है और इस पर केंद्र सरकार के जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है।
जिन तीन मामलों की सीबीआई जांच की सिफारिश की गई है, उनमें रोहतक में वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर लूटपाट व आगजनी को लेकर 27 फरवरी को दर्ज एफआईआर और उनके घर पर तैनात पुलिस गार्ड पर हमले के मामले में 20 फरवरी को दर्ज एफआईआर तथा रोहतक के सर्किट हाउस में तैनात सुरक्षा कर्मियों पर हमले के मामले में 21 फरवरी को दर्ज एफआईआर का मामला शामिल है।
स्टेटस रिपोर्ट में कुल दर्ज केसों का जिलेवार ब्योरा देते हुए बताया गया है कि किस जिले में कितनी गिरफ्तारियां हुईं हैं।
पंचकूला में 1 केस दर्ज करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार का एक्शन
जाट हिंसा पर प्रकाश सिंह ने सीएम को रिपोर्ट सौंपते।
- फोटो : amar ujala
हरियाणा के परसोनल विभाग की सचिव नीरजा शेखर की ओर से हाईकोर्ट में प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई के बारे में वीरवार को हलफनामा दाखिल किया गया।
हलफनामे में बताया गया कि कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा सरकार ने 5 आईपीएस, 19 डीएसपी और 35 नॉन गजटेड अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में इन सभी अधिकारियों पर ड्यूटी में कोताही बरतने का आरोप है। इसमें यह अधिकारी हैं- रोहतक रेंज के तत्कालीन आईजी श्रीकांत जाधव, जींद के तत्कालीन एसपी अभिषेक जोरवाल, कैथल के तत्कालीन एसपी कृष्ण मुरारी, सोनीपत के तत्कालीन एसपी अभिषेक गर्ग, पानीपत के तत्कालीन एसपी राहुल शर्मा, निलंबित एचपीएस अधिकारी अमित दहिया, निलंबित एचपीएस अमित भाटिया, निलंबित एचपीएस सुनील कुमार, निलंबित एचपीएस सतीश कुमार, निलंबित एचपीएस विनोद कुमार, निलंबित एचपीएस राजबीर सिंह, निलंबित एचपीएस संदीप मलिक, निलंबित एचपीएस जगत सिंह, निलंबित एचपीएस पवन कुमार, निलंबित एचपीएस बिजेंदर सिंह, निलंबित एचपीएस सुरेंद्र सिंह, निलंबित एचपीएस सुखबीर सिंह, राज्य विजिलेंस ब्यूरो में तत्कालीन डीएसपी अशोक कुमार बक्शी, भिवानी के तत्कालीन डीएसपी विजय देसवाल, कैथल मुख्यालय के तत्कालीन डीएसपी ताकन राज, सिवानी के तत्कालीन डीएसपी राजबीर देसवाल, पानीपत मुख्यालय में तत्कालीन डीएसओपी जोगिंदर सिंह, रोहतक में तत्कालीन डीएसपी डॉ. रविंदर कुमार व रोहतक में एसवीबी में तत्कालीन डीएसपी नरेंदर कुमार। स्टेटस रिपोर्ट में उन एनजीओ और ओआर के नाम भी दिए गए हैं, जिन पर प्रकाश सिंह कमेटी ने उंगली उठाई थी। स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन एनजीओ और ओआर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
स्टेटस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा सरकार ने आईएएस अधिकारियों में डीके बेहरा (रोहतक के तत्कालीन डीसी), अनिता यादव (झज्जर की तत्कालीन डीसी), चंद्रशेखर खरे (हिसार के तत्कालीन डीसी), निखिल गजराज (कैथल के तत्कालीन डीसी) राजीव रतन (सोनीपत के तत्कालीन डीसी) से भी जवाब तलब किया हुआ है। इनके साथ ही एचसीएस अधिकारियों- धमेंद्र सिंह, पंकज कुमार और जगदीप सिंह को निलंबित कर जवाब तलब किया हुआ है। जबकि एचसीएस महेश कुमार, सतपाल और बीर सिंह को भी जवाब देने के आदेश दिए गए हैं।
हलफनामे में बताया गया कि कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा सरकार ने 5 आईपीएस, 19 डीएसपी और 35 नॉन गजटेड अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में इन सभी अधिकारियों पर ड्यूटी में कोताही बरतने का आरोप है। इसमें यह अधिकारी हैं- रोहतक रेंज के तत्कालीन आईजी श्रीकांत जाधव, जींद के तत्कालीन एसपी अभिषेक जोरवाल, कैथल के तत्कालीन एसपी कृष्ण मुरारी, सोनीपत के तत्कालीन एसपी अभिषेक गर्ग, पानीपत के तत्कालीन एसपी राहुल शर्मा, निलंबित एचपीएस अधिकारी अमित दहिया, निलंबित एचपीएस अमित भाटिया, निलंबित एचपीएस सुनील कुमार, निलंबित एचपीएस सतीश कुमार, निलंबित एचपीएस विनोद कुमार, निलंबित एचपीएस राजबीर सिंह, निलंबित एचपीएस संदीप मलिक, निलंबित एचपीएस जगत सिंह, निलंबित एचपीएस पवन कुमार, निलंबित एचपीएस बिजेंदर सिंह, निलंबित एचपीएस सुरेंद्र सिंह, निलंबित एचपीएस सुखबीर सिंह, राज्य विजिलेंस ब्यूरो में तत्कालीन डीएसपी अशोक कुमार बक्शी, भिवानी के तत्कालीन डीएसपी विजय देसवाल, कैथल मुख्यालय के तत्कालीन डीएसपी ताकन राज, सिवानी के तत्कालीन डीएसपी राजबीर देसवाल, पानीपत मुख्यालय में तत्कालीन डीएसओपी जोगिंदर सिंह, रोहतक में तत्कालीन डीएसपी डॉ. रविंदर कुमार व रोहतक में एसवीबी में तत्कालीन डीएसपी नरेंदर कुमार। स्टेटस रिपोर्ट में उन एनजीओ और ओआर के नाम भी दिए गए हैं, जिन पर प्रकाश सिंह कमेटी ने उंगली उठाई थी। स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन एनजीओ और ओआर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
स्टेटस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा सरकार ने आईएएस अधिकारियों में डीके बेहरा (रोहतक के तत्कालीन डीसी), अनिता यादव (झज्जर की तत्कालीन डीसी), चंद्रशेखर खरे (हिसार के तत्कालीन डीसी), निखिल गजराज (कैथल के तत्कालीन डीसी) राजीव रतन (सोनीपत के तत्कालीन डीसी) से भी जवाब तलब किया हुआ है। इनके साथ ही एचसीएस अधिकारियों- धमेंद्र सिंह, पंकज कुमार और जगदीप सिंह को निलंबित कर जवाब तलब किया हुआ है। जबकि एचसीएस महेश कुमार, सतपाल और बीर सिंह को भी जवाब देने के आदेश दिए गए हैं।