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मुरथल कांड: एसआईटी रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 03 Dec 2016 10:10 PM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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हरियाणा में फरवरी में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान कथित मुरथल गैंगरेप की घटना पर हरियाणा सरकार की ओर से दाखिल की गई एसआईटी रिपोर्ट पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शनिवार को कई सवाल उठाए। जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने इसी मामले पर सोनीपत की स्पेशल ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट और शनिवार को हाईकोर्ट में एसआईटी की रिपोर्ट में भिन्नता पर सख्ती दिखाई।
खंडपीठ ने कहा कि डीएसपी भारती डबास ने हाईकोर्ट को जानकारी दिए बिना ही ट्रायल कोर्ट के समक्ष कैंसलेशन रिपोर्ट फाइल की जिसमें इस मामले से धारा 376 हटाने को कहा गया। एसजेएम ने अपनी रिपोर्ट में कुछ अलग कहा है, जो चिंताजनक है। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा- आप वहां कुछ और करते हैं और हमें कुछ और ही बताते हैं। इसलिए एसआईटी स्पष्ट करे कि अब तक उसने ट्रायल कोर्ट के समक्ष फाइल चालान पेश नहीं किया लेकिन पांचों आरोपियों को रेप के मामले से बाहर कर दिया गया है।
इस पर हरियाणा की पैरवी कर रहे भारत के एडिशनल सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट से इस विषय को स्पष्ट करने के लिए समय की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर को अगली सुनवाई की तिथि तय कर दी।
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खंडपीठ ने कहा कि डीएसपी भारती डबास ने हाईकोर्ट को जानकारी दिए बिना ही ट्रायल कोर्ट के समक्ष कैंसलेशन रिपोर्ट फाइल की जिसमें इस मामले से धारा 376 हटाने को कहा गया। एसजेएम ने अपनी रिपोर्ट में कुछ अलग कहा है, जो चिंताजनक है। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा- आप वहां कुछ और करते हैं और हमें कुछ और ही बताते हैं। इसलिए एसआईटी स्पष्ट करे कि अब तक उसने ट्रायल कोर्ट के समक्ष फाइल चालान पेश नहीं किया लेकिन पांचों आरोपियों को रेप के मामले से बाहर कर दिया गया है।
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इस पर हरियाणा की पैरवी कर रहे भारत के एडिशनल सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट से इस विषय को स्पष्ट करने के लिए समय की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर को अगली सुनवाई की तिथि तय कर दी।
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'आप ट्रायल कोर्ट में कुछ और करते हैं और हमें कुछ और बताते हैं'
मुरथल गैंगरेप केस
- फोटो : File Photo
गलत ऑडियो पेश करने पर हो कार्रवाई
शनिवार को आईजी ममता सिंह के नेतृत्व वाली एसआईटी की ओर से मामले की जांच संबंधी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई। इसमें कहा गया कि मामले की जांच के बाद एसआईटी इस नतीजे पर पहुंची है कि पत्रकार तारिक अनवर ने इस मामले में यह कहते हुए एक ऑडियो रिकार्डिंग पेश की थी कि यह ऑडियो रेप पीड़िता का है लेकिन असल में यह ऑडियो अन्य महिला का है। इस पर एमिक्स क्यूरे अनुपम गुप्ता ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराते हुए कहा कि तारिक अनवर पर झूठे साक्ष्य पेश करने के लिए कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्हें पत्रकार होने के नाते सजा से छूट नहीं दी जानी चाहिए।
‘विजयवर्धन ने दी थी केस की जानकारी ’
अनुपम गुप्ता ने इस बात पर ऐतराज जताया कि प्रकाश सिंह कमेटी के सदस्य हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन ने उन्हें मुरथल रेप मामले की कोई जानकारी नहीं दी थी और न ही मुख्यमंत्री ने उनसे इस मामले को रफादफा करने को कहा था। गुप्ता ने कहा कि विजय वर्धन झूठ बोल रहे हैं। उनसे हुई बातचीत को लेकर वे अपने बयान पर कायम हैं। चाहें तो मेरी कॉल डिटेल चेक कर सकते हैं कि उनसे मेरी बात हुई या नहीं। उन्होंने मुझसे काफी कुछ कहा था। शनिवार को मामले की सुनवाई के दौरान फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर सोनीपत, अंबाला, करनाल, फतेहाबाद समेत विभिन्न जिलों को सेशन जजों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की।
शनिवार को आईजी ममता सिंह के नेतृत्व वाली एसआईटी की ओर से मामले की जांच संबंधी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई। इसमें कहा गया कि मामले की जांच के बाद एसआईटी इस नतीजे पर पहुंची है कि पत्रकार तारिक अनवर ने इस मामले में यह कहते हुए एक ऑडियो रिकार्डिंग पेश की थी कि यह ऑडियो रेप पीड़िता का है लेकिन असल में यह ऑडियो अन्य महिला का है। इस पर एमिक्स क्यूरे अनुपम गुप्ता ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराते हुए कहा कि तारिक अनवर पर झूठे साक्ष्य पेश करने के लिए कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्हें पत्रकार होने के नाते सजा से छूट नहीं दी जानी चाहिए।
‘विजयवर्धन ने दी थी केस की जानकारी ’
अनुपम गुप्ता ने इस बात पर ऐतराज जताया कि प्रकाश सिंह कमेटी के सदस्य हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन ने उन्हें मुरथल रेप मामले की कोई जानकारी नहीं दी थी और न ही मुख्यमंत्री ने उनसे इस मामले को रफादफा करने को कहा था। गुप्ता ने कहा कि विजय वर्धन झूठ बोल रहे हैं। उनसे हुई बातचीत को लेकर वे अपने बयान पर कायम हैं। चाहें तो मेरी कॉल डिटेल चेक कर सकते हैं कि उनसे मेरी बात हुई या नहीं। उन्होंने मुझसे काफी कुछ कहा था। शनिवार को मामले की सुनवाई के दौरान फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर सोनीपत, अंबाला, करनाल, फतेहाबाद समेत विभिन्न जिलों को सेशन जजों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की।