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हरियाणाः 5 नगर निगमों में बजी चुनाव की 'रणभेरी', जारी किया गया शेड्यूल, 3 क्लिक में जानिए
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 22 Nov 2018 01:36 PM IST
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इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन
हरियाणा में पांच नगर निगमों के चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। राज्य चुनाव आयुक्त डॉ. दलीप सिंह ने वीरवार को प्रेस कांफ्रेंस करके शेड्यूल जारी कर दिया। इसके साथ ही प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। हिसार, रोहतक, यमुनानगर, पानीपत व करनाल में नगर निगम चुनाव होंगे। चुनाव मतदान 16 दिसंबर को होगा। एक से 6 दिसंबर तक नामांकन भरे जाएंगे। 19 दिसम्बर को चुनाव परिणाम आएगा।
नगर निगम हिसार, रोहतक, यमुनानगर मेयर के लिए ओपन है। करनाल नगर निगम में मेयर पद महिला के लिए आरक्षित है। पानीपत निगम में मेयर पद बीसी महिला के लिए आरक्षित है। इस बार मतदान ईवीएम से होगा। मेयर के बैलेट पेपर गुलाबी रंग का होगा। पार्षद के बैलेट पेपर का रंग सफेद होगा। एक कंट्रोलिंग यूनिट से दो ईवीएम जुड़ी होंगी। एक में मेयर, दूसरी में पार्षद के लिए वोट किया जाएगा।
देश में पहली बार निगम चुनाव में नोटा भी उम्मीदवार होगा। नोटा को सबसे अधिक मत पड़ने पर चुनाव रद्द होगा। दूसरी बार चुनाव होने पर पहली बार के चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। ऐसा होने से राजनीतिक दलों पर अच्छे उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारने का दबाव रहेगा। तीन तरह के पर्यवेक्षक की निगरानी में चुनाव होंगे। पुलिस, व्यय व सामान्य पर्यवेक्षक चुनाव पर नजर रखेंगे।
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राज्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि अब पूरे प्रदेश में नहीं, बल्कि पांचों नगर निगमों में ही आचार संहिता लागू हो जाएगी। ऐसे में अब कोई भी प्रदेश स्तरीय घोषणा करने से पहले सरकार चुनाव आयोग से अनुमति लेगी। चुनाव प्रभावित न होने की स्थिति में ही घोषणा करने की मंजूरी मिलेगी। एक दिसंबर तक बने वोट वैध होंगे। पहली जनवरी 2018 की मतदाता सूची के अनुसार मतदान होगा।
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नगर निगम हिसार, रोहतक, यमुनानगर मेयर के लिए ओपन है। करनाल नगर निगम में मेयर पद महिला के लिए आरक्षित है। पानीपत निगम में मेयर पद बीसी महिला के लिए आरक्षित है। इस बार मतदान ईवीएम से होगा। मेयर के बैलेट पेपर गुलाबी रंग का होगा। पार्षद के बैलेट पेपर का रंग सफेद होगा। एक कंट्रोलिंग यूनिट से दो ईवीएम जुड़ी होंगी। एक में मेयर, दूसरी में पार्षद के लिए वोट किया जाएगा।
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देश में पहली बार निगम चुनाव में नोटा भी उम्मीदवार होगा। नोटा को सबसे अधिक मत पड़ने पर चुनाव रद्द होगा। दूसरी बार चुनाव होने पर पहली बार के चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। ऐसा होने से राजनीतिक दलों पर अच्छे उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारने का दबाव रहेगा। तीन तरह के पर्यवेक्षक की निगरानी में चुनाव होंगे। पुलिस, व्यय व सामान्य पर्यवेक्षक चुनाव पर नजर रखेंगे।
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राज्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि अब पूरे प्रदेश में नहीं, बल्कि पांचों नगर निगमों में ही आचार संहिता लागू हो जाएगी। ऐसे में अब कोई भी प्रदेश स्तरीय घोषणा करने से पहले सरकार चुनाव आयोग से अनुमति लेगी। चुनाव प्रभावित न होने की स्थिति में ही घोषणा करने की मंजूरी मिलेगी। एक दिसंबर तक बने वोट वैध होंगे। पहली जनवरी 2018 की मतदाता सूची के अनुसार मतदान होगा।
सभी राजनीतिक दलों के लिए अहम हैं नगर निगम चुनाव
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पांचों निगम के चुनाव को सभी राजनीतिक दल बेहद अहम मानकर चल रहे हैं। चुनावी नतीजे भाजपा के पक्ष में आए तो सरकार और आत्मविश्वास के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी, जबकि कांग्रेस और इनेलो इन चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर बढ़े हुए मनोबल के साथ चुनाव मैदान में ताल ठोकने की तैयारी कर रही है। पांचों निगमों के चुनाव से शहरी मतदाताओं के रुझान का भी पता चलेगा।
हुड्डा सरकार में बने थे आठों निगम
पूर्व भजनलाल सरकार ने सबसे पहले फरीदाबाद नगर परिषद को नगर निगम का दर्जा दिया था। इसके बाद किसी भी सरकार ने राज्य में निगमों की संख्या में इजाफा नहीं किया। 2005 में सत्ता में आने के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सबसे पहले 2008 में गुरुग्राम को नगर निगम बनाया। इसके बाद उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में एक साथ सात शहरों हिसार, रोहतक, पानीपत, करनाल, यमुनानगर, अंबाला व पंचकूला को नगर निगम का दर्जा दिया। मौजूदा सरकार ने सोनीपत नगर परिषद को अपग्रेड कर निगम बनाया है।
सरकार नहीं कर पाएगी नई घोषणाएं
पांच निगमों में चुनाव के चलते पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इससे सरकार कोई नई घोषणा नहीं कर सकेगी। सरकार सिर्फ ऐसे नए काम व घोषणाएं कर सकती है, जिससे नगर निगमों के मतदाता प्रभावित न होते हों।
हुड्डा सरकार में बने थे आठों निगम
पूर्व भजनलाल सरकार ने सबसे पहले फरीदाबाद नगर परिषद को नगर निगम का दर्जा दिया था। इसके बाद किसी भी सरकार ने राज्य में निगमों की संख्या में इजाफा नहीं किया। 2005 में सत्ता में आने के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सबसे पहले 2008 में गुरुग्राम को नगर निगम बनाया। इसके बाद उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में एक साथ सात शहरों हिसार, रोहतक, पानीपत, करनाल, यमुनानगर, अंबाला व पंचकूला को नगर निगम का दर्जा दिया। मौजूदा सरकार ने सोनीपत नगर परिषद को अपग्रेड कर निगम बनाया है।
सरकार नहीं कर पाएगी नई घोषणाएं
पांच निगमों में चुनाव के चलते पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इससे सरकार कोई नई घोषणा नहीं कर सकेगी। सरकार सिर्फ ऐसे नए काम व घोषणाएं कर सकती है, जिससे नगर निगमों के मतदाता प्रभावित न होते हों।