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कभी मजदूरी किया करते थे, आज सालाना टर्न ओवर 40 करोड़
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर
Updated Sun, 17 Jan 2016 01:41 PM IST
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कभी जगाधरी की बर्तन फैक्ट्रियों में दिहाड़ी करने वाले राजेश खरबंदा आज सफल उद्यमी हैं। उनकी फैक्ट्रियों में बने मिल्क केन एक दर्जन से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं। तीन यूनिटों का सालाना टर्न ओवर 40 करोड़ है। कुल संपत्ति करीब 30 करोड़ है और वे 10 फीगर में इंकम टैक्स दे रहे है।
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ईमानदारी, मेहनत और लगन को वह अपनी सफलता का मूल मंत्र मानते हैं। यमुनानगर के इंडस्ट्रियल एरिया में दो व कालाआंब में एक यूनिट हैं।
यहां बनने वाले 70 प्रतिशत मिल्क केन भारत व 30 प्रतिशत विदेशों में निर्यात किए जाते हैं। ये पनामा, निकारागोआ, यूगांडा, मोरक्को, मालावी सहित 25 देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।
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खराबंदा बताते है कि उनके पिता पेपर मिल में नौकरी करते थे। वर्ष 1965 में उन्होंने आईटीआई में रेफ्रिजेशन में डिप्लोमा किया। इसके बाद कुछ साल दिल्ली में जाकर नौकरी की। वर्ष 1975 से 1980 तक वे जगाधरी की बर्तन फैक्ट्रियों में लेबर के तौर पर काम करते रहे।
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यहां से मिलने वाली तनख्वाह से जगाधरी में खरीदे गए छोटे प्लाटों की किश्त देते रहे। वर्ष 1980 में उन्होंने अपने प्लॉट बेचकर व कमेटियां उठाकर यमुनानगर इंडस्ट्रियल एरिया में प्लाट खरीदा और बर्तन बनाने लगे।
कुछ समय बाद ही उन्होंने मिल्क केन बनाने शुरू कर दिए। अपनी मेहनत के बलबूते वह साल दर साल सफलता की ऊंचाइयों को छूते चले गए।