सुलह के फार्मूले पर भी रार: अब सांसद मनीष तिवारी ने जताया सिद्धू को प्रदेश पार्टी प्रधान बनाने पर एतराज
पंजाब कांग्रेस के विवाद को लेकर केंद्रीय नेतृत्व की परेशानी खत्म नहीं हो रही है। आलाकमान की तमाम कोशिशों के बावजूद विवाद बढ़ता ही जा रहा है।
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Demographics of Punjab:
— Manish Tewari (@ManishTewari) July 16, 2021
1. Sikhs : 57.75 %
2. Hindus : 38.49%
3. Dalits : 31:94 % (Sikh&Hindus)
Punjab is both progressive & SECULAR.
ਹਿੰਦੂ ਤੇ ਸਿੱਖ ਦਾ ਨਹੁੰ-ਮਾਸ ਦਾ ਰਿਸ਼ਤਾ ਹੈ!
BUT
balancing SOCIAL INTEREST GROUPs is key
बराबरी सामाजिक न्याय की बुनियाद है!
EQUALITY pic.twitter.com/mKddV4TYOR
पंजाब कांग्रेस के विवाद को लेकर केंद्रीय नेतृत्व की परेशानी खत्म नहीं हो रही है। आलाकमान की तमाम कोशिशों के बावजूद विवाद बढ़ता ही जा रहा है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह किसी भी कीमत पर नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी का प्रदेश प्रधान नहीं बनने देना चाहते। वहीं, सिद्धू चुनाव प्रचार समिति का प्रधान और कार्यकारी समिति का सदस्य बनने पर सहमत नहीं हैं।
सिद्धू को पार्टी का प्रदेश प्रधान बनाए जाने की खबरों से नाराज कैप्टन ने गुरुवार को पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को फोन कर कहा कि पंजाब में 2022 का विधानसभा चुनाव उन्हीं की नुमाइंदगी में लड़ा जाएगा। कैप्टन ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब कांग्रेस का प्रधान भी उनकी मर्जी से ही बनेगा।
उन्होंने सोनिया को यह भी आश्वासन दिया कि कांग्रेस फिर से पंजाब में पिछले विधानसभा चुनाव का इतिहास दोहराएगी। इधर, सिद्धू को चुनाव प्रचार समिति का प्रधान और कार्यकारी समिति का सदस्य बनाए जाने की बात चली तो उसके बाद सिद्धू भी खफा हो गए। नाराज सिद्धू ने चंडीगढ़ पहुंचकर अपने समर्थक कैबिनेट मंत्री और विधायकों के साथ आगे की रणनीति तैयार की। बैठक में तय किया गया कि रणनीति के तहत सिद्धू एक दो-दिन में आलाकमान से बात करेंगे, जिसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।