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संसद में बोलीं किरण खेर- पंजाब की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी हो अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति
Thu, 28 Nov 2019 12:27 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 28 Nov 2019 12:27 PM IST
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Kirron Kher
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चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर ने बुधवार को संसद में चंडीगढ़ में अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियों के मुद्दे को उठाया। खेर ने लोकसभा में शून्य काल में कहा कि वर्तमान में चंडीगढ़ में अनुकंपा के आधार पर जो नियुक्ति की जाती है, इसके लिए चंडीगढ़ में 5 प्रतिशत की अधिकतम सीमा तय की गई है। इस सीमा की वजह से अधिकांश आवेदकों को अनुकंपा नियुक्तियों का लाभ नहीं मिल पाता है।
सांसद किरण खेर ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर होने वाली नियुक्ति का उद्देश्य परिवार के आश्रित सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देना है, जिसका सरकारी सेवा में रहते हुए या तो निधन हो गया हो या 55 साल की उम्र प्राप्त करने से पहले वह स्वास्थ्य कारणों से रिटायर हो गया हो।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब स्टेट सिविल सर्विसेज नियमों को अपनाया है, चंडीगढ़ के कर्मचारी अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को छोड़कर पंजाब के कर्मचारियों के समान वेतन, भत्ते, सेवानिवृत्ति की आयु और पेंशन लाभ आदि की तरह अन्य लाभों के हकदार हैं।
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अगर बाकी सब मामलों में पंजाब के नियम चंडीगढ़ में लागू हैं तो अनुकंपा आधार पर नियुक्तियों के नियम भी पंजाब सरकार के ही लागू होने चाहिए। उन्होंने गृह मंत्रालय से आग्रह किया कि है चंडीगढ़ में भी पंजाब की तर्ज पर पांच प्रतिशत की अधिकतम लिमिट को खत्म किया जाए। इस तरह से मृतक के परिवार वालों को राहत दी जा सकती है।
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सांसद किरण खेर ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर होने वाली नियुक्ति का उद्देश्य परिवार के आश्रित सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देना है, जिसका सरकारी सेवा में रहते हुए या तो निधन हो गया हो या 55 साल की उम्र प्राप्त करने से पहले वह स्वास्थ्य कारणों से रिटायर हो गया हो।
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उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब स्टेट सिविल सर्विसेज नियमों को अपनाया है, चंडीगढ़ के कर्मचारी अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को छोड़कर पंजाब के कर्मचारियों के समान वेतन, भत्ते, सेवानिवृत्ति की आयु और पेंशन लाभ आदि की तरह अन्य लाभों के हकदार हैं।
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अगर बाकी सब मामलों में पंजाब के नियम चंडीगढ़ में लागू हैं तो अनुकंपा आधार पर नियुक्तियों के नियम भी पंजाब सरकार के ही लागू होने चाहिए। उन्होंने गृह मंत्रालय से आग्रह किया कि है चंडीगढ़ में भी पंजाब की तर्ज पर पांच प्रतिशत की अधिकतम लिमिट को खत्म किया जाए। इस तरह से मृतक के परिवार वालों को राहत दी जा सकती है।