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मेट्रो प्रोजेक्ट एमओयू अब केंद्र के पाले में
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 05 Nov 2013 12:28 PM IST
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ट्राइसिटी के मेट्रो प्रोजेक्ट का एमओयू अब केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के पाले में है। पंजाब और हरियाणा से लिखित में मंजूरी मिलने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने इसे मंत्रालय को भेज है।
अब मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद ही एमओयू पर चंडीगढ़ प्रशासन, पंजाब और हरियाणा हस्ताक्षर करेंगे। इसके बाद ही मेट्रो के लिए स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) का गठन होगा और इसके बाद मेट्रो प्रोजेक्ट गति पकड़ेगा और मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाने के प्रयास किए जाएंगे।
यह प्रोजेक्ट अपने तय समय से काफी लेट चल रहा है। पिछले साल अगस्त में जब इसकी डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) सौंपी गई थी तो उम्मीद जताई गई थी कि नवंबर 2013 तक निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
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पंजाब और हरियाणा ने एमओयू की कुछ शर्तों पर आपत्ति जताई थी, इसके बाद संशोधित एमओयू तैयार कर इस पर दोनों राज्यों की सहमति ली गई।
पंजाब और हरियाणा को सबसे बड़ी आपत्ति यह थी कि मेट्रो के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) का गठन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में न किया जाए। एमओयू से अब इस शर्त को हटा लिया गया है।
एमओयू में स्पष्ट किया गया है कि प्रोजेक्ट के लिए गठित एसपीवी में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र सरकार का बराबर का हिस्सा होगा। एसपीवी का नाम चंडीगढ़ ट्राइसिटी मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (सीटीएमटीसी) होगा। यह एसपीवी कंपनीज एक्ट 1956 के तहत पंजीकृत होगा। सीटीएमटीसी ही ट्राइसिटी के मेट्रो प्रोजेक्ट को आगे तक ले जाएगी।
पंजाब और हरियाणा द्वारा संशोधित एमओयू मंजूरी देने में हो रही देरी के कारण मंत्रालय ने लगभग डेढ़ माह पहले दोनों राज्यों को पत्र भेजकर ड्राफ्ट को मंजूरी देने को कहा था।
प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार जल्द ही पंजाब और हरियाणा के साथ इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस संबंध में चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा ने कहा कि पंजाब और हरियाणा से लिखित मंजूरी आने के बाद उसे केंद्र सरकार के पास भेज दिया गया है।
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अब मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद ही एमओयू पर चंडीगढ़ प्रशासन, पंजाब और हरियाणा हस्ताक्षर करेंगे। इसके बाद ही मेट्रो के लिए स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) का गठन होगा और इसके बाद मेट्रो प्रोजेक्ट गति पकड़ेगा और मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाने के प्रयास किए जाएंगे।
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यह प्रोजेक्ट अपने तय समय से काफी लेट चल रहा है। पिछले साल अगस्त में जब इसकी डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) सौंपी गई थी तो उम्मीद जताई गई थी कि नवंबर 2013 तक निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
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पंजाब और हरियाणा ने एमओयू की कुछ शर्तों पर आपत्ति जताई थी, इसके बाद संशोधित एमओयू तैयार कर इस पर दोनों राज्यों की सहमति ली गई।
पंजाब और हरियाणा को सबसे बड़ी आपत्ति यह थी कि मेट्रो के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) का गठन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में न किया जाए। एमओयू से अब इस शर्त को हटा लिया गया है।
एमओयू में स्पष्ट किया गया है कि प्रोजेक्ट के लिए गठित एसपीवी में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र सरकार का बराबर का हिस्सा होगा। एसपीवी का नाम चंडीगढ़ ट्राइसिटी मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (सीटीएमटीसी) होगा। यह एसपीवी कंपनीज एक्ट 1956 के तहत पंजीकृत होगा। सीटीएमटीसी ही ट्राइसिटी के मेट्रो प्रोजेक्ट को आगे तक ले जाएगी।
पंजाब और हरियाणा द्वारा संशोधित एमओयू मंजूरी देने में हो रही देरी के कारण मंत्रालय ने लगभग डेढ़ माह पहले दोनों राज्यों को पत्र भेजकर ड्राफ्ट को मंजूरी देने को कहा था।
प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार जल्द ही पंजाब और हरियाणा के साथ इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस संबंध में चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा ने कहा कि पंजाब और हरियाणा से लिखित मंजूरी आने के बाद उसे केंद्र सरकार के पास भेज दिया गया है।