{"_id":"5f538a7e8ebc3e439d50bbd1","slug":"motivational-story-of-a-teacher-from-karnal-on-teacher-s-day","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षक दिवस: इंद्री हल्के को एलडी तुली जैसा नहीं मिला गुरु, आज भी लोग करते हैं याद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षक दिवस: इंद्री हल्के को एलडी तुली जैसा नहीं मिला गुरु, आज भी लोग करते हैं याद
Sat, 05 Sep 2020 06:26 PM IST
ajay kumar
कर्मबीर लाठर, अमर उजाला, चंडीगढ़
कर्मबीर लाठर, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 05 Sep 2020 06:26 PM IST
विज्ञापन
teachers day
करनाल के इंद्री हल्के में 1964 में लक्ष्मण दास तुली को तत्कालीन राष्ट्रपति राधाकृष्णन ने शिक्षक अवार्ड से सम्मानित किया था। उसके बाद इस हल्के में किसी को यह अवार्ड नहीं मिला। एलडी तुली की शख्सियत पर हल्कावासियों को गर्व है। 1885 में इंद्री में प्राथमिक स्कूल बना था जो अपग्रेड होकर 1956 में माध्यमिक विद्यालय बना। बाद में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तक अपग्रेड हुआ।
विज्ञापन
10 मार्च 1910 को पाकिस्तान में जन्मे लक्ष्मण दास का परिवार विभाजन के समय करनाल जिले के इंद्री गांव में आकर बस गया था। लक्ष्मण दास ने इंद्री के विद्यालय में बच्चों को पढ़ाया। वह स्कूल के मुखिया थे। उस वक्त स्कूल की ना चारदीवारी थी और ना पेयजल के लिए नल। स्कूल समय के बाद वह अपने पशु चिकित्सक दोस्त डॉ. वजीर सिंह व इंद्री के सरपंच गिरधारी लाल के साथ गांव-गांव जाते और चंदा एकत्रित करते। उन्होंने जन सहयोग और ईमानदारी से स्कूल की चारदीवारी, नल का इंतजाम और कमरे बनवाए।
विज्ञापन
उनके द्वारा पढ़ाए गए विद्यार्थी देश में उच्च पदों पर रहे। दयाल सिंह कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. रामजीलाल और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केएल तुली भी उनके शिष्य रहे। डॉ. रामजीलाल बताते हैं कि लक्ष्मणदास तुली को किसी से कोई लालच नहीं था। इंद्री में स्कूल का विकास उनका सपना था जो पूरा हुआ।
विज्ञापन
शिक्षक एलडी तुली का खुद के घर का बरामदा नहीं था और उसकी जगह घास-फूस व पटेरे का छप्पर था। इसके बावजूद उन्हें स्कूल की चारदीवारी की चिंता रहती थी। वह बच्चों से कीकर की कांटेदार झाड़ियां मंगवाते और स्कूल की बाड़ लगवाते थे। बोर्ड कक्षाओं के बच्चों को रात को भी निशुल्क पढ़ाते थे। ऐसे साधारण व्यक्तित्व वाले लोग विरले ही मिलते हैं। उनकी मांग है कि विद्यालय में किसी नई इमारत का नाम एलडी तुली के नाम से किया जाए।