बेटे को किडनी देकर इस मां ने दिया नया जीवन
मां तो भगवान का दूसरा रूप होती है। मां का आंचल ढाल बनकर अपने बच्चे को सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसी ही एक मिसाल 67 वर्षीय विद्या देवी ने कायम की। इन्होंने अपनी किडनी देकर अपने बेटे श्याम सुंदर को नया जीवन दिया।
67 साल की उम्र में जब अपने बेटे को दिन-ब-दिन कमजोर होता देखा मां ने अपनी किडनी देने की न केवल सोची बल्कि उसे कर भी दिखाया। श्याम सुंदर की पत्नी मधु ने बताया कि 1993 में उनके पति की किडनी में स्टोन थे इस कारण आपरेशन करवाना पड़ा लेकिन दर्द कम न होने पर डाक्टर को दिखाया।
तब डाक्टर ने बताया कि इनकी किडनी में बचपन से फफोले हैं इसलिए कुछ दवाएं लिखकर दीं। सस्ती दवा से नुकसान हुआ और किडनी खराब हो गई। डेढ़ वर्ष पहले उल्टियां नहीं रुक रही थीं इसलिए फिर डाक्टर को दिखाया तो डाक्टर ने बताया कि डायलिसिस करवाना पड़ेगा।
छह माह डायलिसिस के बाद भी जब कुछ फर्क न पड़ा तो किडनी बदलने की बात आई। तब 67 वर्षीय मां ने हिम्मत दिखाई और अपनी किडनी डोनेट की। अब दोनों मां-बेटा स्वस्थ हैं।
इतना करने के बाद भी इस मां का कहना है कि उन्होंने ऐसा करके कोई एहसान नहीं किया बल्कि यह तो उनका फर्ज था। उनकी बहुएं मधु और राज को भी अपनी सास पर गर्व है।
मोहाली के आईबीवाई अस्पताल की डा. राका कौशल का कहना है कि वैसे तो जवान लोग भी किडनी देते हुए घबराते हैं लेकिन 67 वर्षीय महिला द्वारा किडनी देने की बात सुनकर वे भी हैरान हो गए थे। लेकिन मां है ही ऐसी शख्सियत। किडनी देने की कोई उम्र नहीं होती बस यह देखना होता है कि वह ठीक प्रकार से कार्य कर रही हो।
किडनी खराब होने के लक्षण
कब मनाया जाता है
मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है मदर्स डे। पहली बार 1908 में एना जारविस द्वारा मां केसम्मान में मनाया गया था।
बच्चे भी निभाएं अपना फर्ज
अभिभावक तो हर उम्र में हर हाल में अपना फर्ज निभाते हैं लेकिन हममें से कितने ऐसे बच्चे हैं जो अपना फर्ज निभाते हैं। अगर हर व्यक्ति अपना फर्ज निभाए तो दुनिया बहुत हसीन हो जाएगी।